हिमाचल में उपचुनाव पर भास्कर एग्जिट पोल:अर्की-फतेहपुर पर कांग्रेस को बढ़त; जुब्बल-कोटखाई में बरागटा दिख रहे भारी, मंडी लोकसभा सीट पर कड़ी टक्कर

शिमलाएक वर्ष पहले
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हिमाचल प्रदेश में तीन विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए। मतगणना 2 नवंबर को होगी। सभी क्षेत्रों में मतदाताओं का मूड जानने के लिए दैनिक भास्कर ने इन सीटों का एग्जिट पोल कराया है। पोल के मुताबिक, दो विधानसभा सीटों में कांग्रेस जीत की ओर अग्रसर है और मंडी लोकसभा सीट पर कड़ी टक्कर है।

अर्की सीट पर सहानुभूति का वोट कांग्रेस की नैया पार कर सकता है। जुब्बल-कोटखाई में भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ रहे चेतन बरागटा ने भगवा पार्टी की राह मुश्किल बना दी है। फतेहपुर सीट कांग्रेस का गढ़ रही है और यहां भाजपा भीतरघात से भी जूझ रही है। सबसे कड़ी टक्कर मंडी लोकसभा सीट पर है जहां महंगाई के मुद्दे का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है मगर भाजपा कैंडिडेट व कारगिल हीरो ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह यहां उल्टफेर भी कर सकते हैं। कई ऐसे और फैक्टर हैं जिनके कारण इन सभी सीटों पर सत्ताधारी दल की राह मुश्किल हुई है और समीकरण कांग्रेस के पक्ष में बनते दिख रहे हैं। आइए इन फैक्टर्स पर एक नजर डालें...

मंडी संसदीय सीट : महंगाई पर मुखर हैं वोटर

हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। संसदीय क्षेत्र में 17 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। यहां वोटिंग भी अपेक्षा के मुकाबले काफी कम हुई। इसने सभी को चौंका दिया, यूथ भी वोट डालने के लिए आगे नहीं आया। मंडी के युवा और लोग महंगाई को लेकर भी मुखर होकर खुल कर बोल रहे हैं। ऐसे में अगर महंगाई बेरोजगारी के खिलाफ आकर लोगों ने वोट कर दिया होगा, तो भाजपा प्रत्याशी के लिए समस्या खड़ी हो जाएगी।

प्रतिभा को मिल सकते हैं सहानुभूति के वोट, पर...

कांग्रेस की प्रतिभा सिंह को प्रदेश के 6 बार मुख्यमंत्री रहे उनके पति स्व. वीरभद्र सिंह के नाम पर सहानुभूति के काफी वोट मिल सकते हैं। इसके बावजूद उनकी जीत की राह आसान नहीं है। उन्हें मनाली, लाहौल स्पीति, किन्नौर, रामपुर, करसोग से तो जरूर लीड मिल सकती है। हालांकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह जिला होने के कारण मंडी में झटका लग सकता है। संसदीय क्षेत्र के 17 विधानसभा क्षेत्रों में से 8 ऐसे हैं जो भाजपा का गढ़ हैं। यहां से भाजपा के प्रत्याशी ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर को बड़ी लीड मिल सकती है। सिराज मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का विधआनसभा क्षेत्र है। उन्होंने इस चुनाव के दौरान प्रचार भी यही किया कि मंडी हमारी है और इसे हमसे कोई छीन नहीं सकता। मुख्यमंत्री को गृह जिसे से सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि कांटे की टक्कर के इस मुकाबले मेंष दोनों दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।

अर्की : गुटबाजी में घिरी भाजपा की राह मुश्किल

अर्की विधानसभा क्षेत्र में वोटर की सहानुभूति कांग्रेस प्रत्याशी संजय अवस्थी की ओर है। भाजपा के लिए यहां इसलिए भी राह आसान नहीं है क्योंकि रतन सिंह पाल को टिकट देने के बाद यहां टिकट के दावेदार गोविंद राम शर्मा नाराज हो गए। हालांकि अर्की में ब्राह्मणवाद और 2 रियासतों के बीच जंग है। जातिगत वोट हासिल करने में अवस्थी कामयाब होते हैं तो भाजपा का कैडर भी उनके खाते में जा सकता है। जिस तरह से पोलिंग हुई है उस हिसाब से अवस्थी फायदे में दिख रहे हैं। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह के देहांत पर यह सीट खाली हुई है। ऐसे में उनके नाम पर भी सहानुभूति का वोट कांग्रेस को मिल सकता है। वहीं नाराज गोविंद राम ने प्रचार के दौरान भी भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट नहीं मांगे। ऐसे में उनके साथ जुड़े लोग भी कांग्रेस प्रत्याशी की ओर डायवर्ट हो सकते हैं।

फतेहपुर : नाराज खेमा करेगा भाजपा का बंटाधार

कांगड़ा जिले का फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है। कांग्रेस के सुजान सिंह पठानिया की मौत के बाद सीट खाली हुई थी। कांग्रेस ने सहानुभूति की वोट को लेने के लिए उनके बेटे भवानी सिंह पठानिया को विधानसभा सीट से मैदान में उतारा। वहीं, भाजपा ने बलदेव ठाकुर को टिकट देकर पार्टी के दूसरे खेमे को नाराज कर दिया। यहां पर भी स्थिति अर्की की तरह ही बन गई और भाजपा के टिकट के दावेदार ने पार्टी प्रत्याशी के लिए वोट मांगने से इनकार कर दिया। यहां वोटिंग भी ज्यादा हुई है और बने समीकरणों से कांग्रेस प्रत्याशी भवानी सिंह पठानिया की राह आसान लग रही है।

जुब्बल कोटखाई : भाजपा को भारी पड़ेगी बगावत

हिमाचल प्रदेश के उपचुनावों में जुब्बल कोटखाई सबसे हॉट सीट बनी हुई है। यहां पार्टी से बगावत करने वाले चेतन बरागटा भाजपा के लिए मुसीबत बन गए हैं। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना जनाधार जुटाने का भरसक प्रयास किया है। ऐसे में भाजपा की प्रत्याशी नीलम सरैइक और कांग्रेस के रोहित ठाकुर के लिए समस्या बढ़ गई है। यहां सबसे बड़ा समीकरण यह बन रहा है कि बरागटा के जाने से भाजपा का वोट बैंक बंट गया है और यह सीधे कांग्रेस के रोहित ठाकुर के पक्ष में जा रहा है। हालांकि चेतन अपने स्तर पर कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाते हैं तो उनकी राहत आसान हो जाती है। विधानसभा क्षेत्र में जिस तरह से बंपर वोटिंग हुई है उससे दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों के लिए खतरे की घंटी बजी है।

(नोट : भास्कर ने अपना एग्जिट पोल अपने न्यूज नेटवर्क के रिपोर्टर्स और स्ट्रिंगर्स की मदद से किया है।)

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