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परिवार ने जिसे मरा समझा वो लौटा घर:कांस्टेबल हेतराम ने 13 साल बाद यूपी के फैजाबाद में ढूंढ़ा सुरेंद्र का परिवार, अब घर पहुंचा

शिमला12 दिन पहलेलेखक: जाेगेंद्र शर्मा
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कांस्टेबल हेतराम, घर से लापता सुरेंद्र भाई राकेश मिश्रा के साथ। - Dainik Bhaskar
कांस्टेबल हेतराम, घर से लापता सुरेंद्र भाई राकेश मिश्रा के साथ।
  • मानसिक रूप से परेशान सुरेंद्र 13 साल पहले छोड़ चुका था घर, खा रहा था दर-दर की ठोकरें

13 साल बाद जिस व्यक्ति काे मृत समझकर घर में श्राद्ध कर दिया गया हाे, वाे बाद में घर लाैट आए ताे ये किसी चमत्कार से कम नहीं हाेता है। ऐसी ही कहानी उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले के रहने वाले सुरेंद्र कुमार की है। वर्ष 2008 से घर से लापता सुरेंद्र कुमार अब अपने घर सकुशल पहुंचे हैं।

मानसिक रूप से परेशान सुरेंद्र काे घर पहुंचाने में हिमाचल स्वास्थ्य पुनर्वास केंद्र बालूगंज में तैनात पुलिस कांस्टेबल हेतराम का बड़ा याेगदान है। चार महीने पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर ने सुरेंद्र कुमार काे हिमाचल स्वास्थ्य पुनर्वास केंद्र बालूगंज भेजा था। यहां पर सुरेंद्र कुमार का इलाज शुरू हुआ। ये वर्ष 2008 से घर से लापता थे और इधर उधर भटक रहे थे।

कर चुके थे मरने के सारे कर्म

सुरेंद्र के भाई राकेश मिश्रा कहते हैं कि हमने सुरेंद्र को ढूंढ़ने की हर संभव काेशिश की। 13 साल का समय बहुत ज्यादा हाेता हैं। ऐसे में हमने हार मान ली की हमारा भाई अब इस दुनिया में नहीं हैं। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार मरने के बाद हाेने वाले सभी श्राद्ध और कर्म तक कर दिए थे। जब हमें फैजाबाद पुलिस ने बताया कि सुरेंद्र जिंदा है। हमें पहले ताे विश्वास ही नहीं हुआ। जब पूरी बात पता लगी कि सुरेंद्र जीवित है ताे हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

वीडियाे काॅल पर झट से बाेला सुरेंद्र, ये मेरा भाई है

कांस्टेबल हेतराम ने जब सुरेंद्र की बात वीडियाे काॅल पर उसके भाई राकेश मिश्रा से करवाई ताे वह एकदम से बाेल उठा, ये मेरा भाई राकेश है। खास बात ये है कि जाे व्यक्ति पिछले काफी समय से कुछ भी नहीं बाेल रहा था, वह अपने परिवार के सदस्याें काे देखकर झट से बाेल पड़ा। हेतराम का कहना है कि मुझे खुशी है कि मैंने किसी व्यक्ति काे इतने वर्ष के बाद उसके परिवार से मिलाया है।

हमारे पास मानसिक रूप से परेशान सुरेंद्र कुमार 5 दिसंबर 2020 काे दाखिल हुए थे। कांस्टेबल हेतराम की मेहनत से अब वे अपने परिवार के सदस्याें के पास पहुंच गए हैं। हम यहां अाने वाले राेगियाें की हर संभव मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
-डॉ. संजय पाठक, सीनियर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास केंद्र शिमला

कांस्टेबल बाेले, मुंह से कुछ नहीं बाेलता था, लिखने काे कहा ताे पता लगा फैजाबाद का

कांस्टेबल हेतराम का कहना है कि मानसिक रूप से बीमार सुरेंद्र कुमार बार-बार मेरे पास आता था। ऐसे में मैंने घर का पता पूछने की उससे पूरी काेशिश की, लेकिन वह मुंह से कुछ नहीं बाेल रहा था। ऐसे में मैंने एक एप्लीकेशन लिखने काे कहा। इसमें सुरेंद्र ने खुद काे फैजाबाद का बताया। फैजाबाद में पुलिस स्टेशन फाेन किया।

यहां पर पहले से ही सुरेंद्र के परिजनाें ने गुमशुदगी की रिपाेर्ट दर्ज करवाई हुई थी। सुरेंद्र फैजाबाद के मिल्कीपुर तहसील में पुरे झाऊ मिश्रा के रहने वाले थे। मरीज का एक भतीजा भी यूपी पुलिस में पुलिस कांस्टेबल के रूप में काम कर रहा है। ऐसे में परिवार का पता लगाना आसान हो गया। छह भाइयों और चार बहनों के किसान परिवार से संबंध रखने वाले सुरेंद्र काे अब उनके भाई राकेश मिश्रा को सौंप दिया गया है।

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