मंडी के डा. सुरेश अब BCCI के फिजियोथेरेपिस्ट:नेशनल क्रिकेट अकादमी बेंगलुरु में देंगे सेवाएं; 12 वर्ष से HPCA में नियुक्ति

शिमला3 महीने पहले
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फिजियोथेरेपिस्ट डा. सुरेश राठौर। - Dainik Bhaskar
फिजियोथेरेपिस्ट डा. सुरेश राठौर।

हिमाचल में मंडी के चौंतड़ा के साथ सटी ग्राम पंचायत सगनेहड़ के स्वाड़का गांव के युवा डॉ. सुरेश राठौर अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड में बतौर फिजियोथेरेपिस्ट अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। डॉक्टर सुरेश राठौर की इस नियुक्ति से चौंतड़ा और आसपास के क्षेत्र के लोगों में खुशी है। उनकी नियुक्ति पूरे क्षेत्र के लिए सम्मान की बात है।

बताया गया है कि बीसीसीआई की ओर से फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्ति के लिए टेस्ट आयोजित किया गया था। जिसमें देश-विदेश के कई चिकित्सकों और फिजियोथेरेपिस्ट ने भाग लिया। जिसमें बीसीसीआई की ओर से पांच डॉक्टरों का चयन किया गया। इनमें डा. सुरेश राठौर उत्तर भारत से पहले व्यक्ति चयनित हुए हैं। उनकी तैनाती नेशनल क्रिकेट अकादमी बेंगलुरु में हुई है।

12 साल तक एचपीसीए में रहे डॉक्टर

डा.सुरेश राठौर 12 वर्ष तक हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। दो वर्ष के अनुबंध के लिए बीसीसीआई में बतौर कर्मचारी अपनी सेवाएं देने वाले हिमाचल के पहले डॉक्टर हैं। सुरेश राठौर ने बताया कि हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में बतौर फिजियोथेरेपिस्ट के रुप में सेवा देने के लिए केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और अरुण धूमल का सहयोग रहा था। जिनके प्लेटफार्म के बलबुते करियर की शुरुआत करने का मौका मिला था। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के युवा क्रिकेट में करियर बना रहे हैं।

आर्य पब्लिक स्कूल चौंतड़ा में पढ़े

9 जुलाई 1983 को चौंतड़ा के स्वाड़का गांव में प्रधान सिंह के घर पैदा हुए डॉक्टर सुरेश राठौर की शुरुआती शिक्षा आर्य पब्लिक स्कूल चौंतड़ा और जमा दो की शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चौंतड़ा से उर्तीण हुई। जिसके बाद बेंगलुरु से फिजियोथेरेपिस्ट की बेचलर डिग्री और देहरादून से मास्टर की डिग्री प्राप्त की। सुरेश राठौर 2008 में बीसीसीआई के मान्यता प्राप्त फिजियोथेरेपिस्ट बन गए थे। जिसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा और हिमाचल प्रदेश की रणजी टीम अंडर 19 टूर्नामेंट सहित कार्य सहित बीसीसीआई में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में चीफ फिजियोथेरेपिस्ट​​​​​​​ के पद के कार्य कर रहे हैं।