ड्रोन तैयार करने वाली कंपनियों को इंसेंटिव:हिमाचल में प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने के लिए 50 फीसदी सब्सिडी मिलेगी

शिमला4 महीने पहले
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक तस्वीर।

हिमाचल में ड्रोन तैयार करने वाली कंपनियां को निवेश करने पर इंसेंटिव दिया जाएगा। प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने के लिए कंपनियों को 50 प्रतिशत की सब्सिडी का लाभ भी मिलेगा। इन कंपनियों को भी अन्य उद्योगों की तरह ए, बी, सी कैटेगरी में विभाजित किया जाएगा और उन्हें भी उसी तर्ज पर इंसेंटिव का लाभ दिया जाएगा।

इसके तहत दूरदराज के क्षेत्र में सबसे पहला उद्योग लगाने पर विशेष इंसेंटिव ड्रोन निर्माता कंपनियों को भी दिया जाएगा। हिमाचल ने भारत सरकार के निर्देशों के बाद तेजी से अपनी ड्रोन पॉलिसी बनाई है, जिसमें इन कंपनियों को वो सभी बेनिफिट मिलेंगे जोकि दूसरे उद्योगों को यहां पर दिए जा रहे हैं।

ये मिलेंगे लाभ

ड्रोन निर्माता कंपनियों को अपने प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने के लिए 50 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी। बशर्ते प्रोजेक्ट एक लाख रुपए तक का हो, जिसकी प्लांट एवं मशीनरी के लिए यह राहत दी जाएगी। निर्माता कंपनियां लीज पर कोई प्लांट या स्पेस ले सकेंगी। इस पर उसे पहले साल के लिए 75 फीसदी सब्सिडी, दूसरे साल के लिए 50 फीसदी सब्सिडी और तीसरे, चौथे व पांचवें साल में 25 फीसदी सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

ग्रीन डाटा सेंटर बनाने के लिए यदि लीज पर कोई शेड आदि लिया जाता है तो पहले साल में 85 फीसदी तक की सब्सिडी देने का प्रावधान है। एक करोड़ रुपए तक के उद्योग को कैपिटल सब्सिडी प्रदान की जाएगी जो अधिकतम 25 फीसदी होगी। ड्रोन उद्योगों को स्टांप ड्यूटी की छूट रहेगी। वहीं लैंड यूज चेंज करवाने के लिए लगने वाली फीस भी माफ कर दी जाएगी। 25 लाख तक के लोन पर इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम के तहत 5 फीसदी तक की छूट देने का प्रावधान है। इसके अलावा भी कई सारे लाभ उद्योगों की तर्ज पर दिए जाने हैं। यहां बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने पर जोर दें रहे हैं।

ड्रोन पॉलिसी सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने तैयार की

हिमाचल की ड्रोन पॉलिसी सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने तैयार की है। यहां पर ड्रोन निर्माता कंपनियों को सरकार जमीन उपलब्ध करवाएगी और सभी तरह के लाभ दिए जाएंगे जोकि सामान्य उद्योगों को मिल रहे हैं। यानि सबसे अहम इनको भी कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी प्रदान की जाएगी जोकि केन्द्र सरकार के नियमों के तहत मिलती है। केन्द्र सरकार को राज्य का उद्योग विभाग जो प्रस्ताव भेजता है उसके तहत ही इन उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।