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सावधानी बरतें:फ्लावरिंग के समय कर रहे हैं सेब के पाैधाें पर स्प्रे, जो भगा देेगा मधुमक्खियां, फिर परागकण न हाेने से कम हाेगा सेब

शिमलाएक महीने पहले
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सेब के बगीचों में फूलों के खिलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। - Dainik Bhaskar
सेब के बगीचों में फूलों के खिलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
  • फलों की बेहतर सेटिंग की स्टेज हो चुकी है शुरू, कीटनाश्क के ज्यादा इस्तेमाल से बचें

सेब के बगीचों पर फूलों के खिलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। फ्लावरिंग की इस बेहद संवेदनशील प्रक्रिया को सही ढंग से निपटाने के लिए बागबान अपने बगीचों मे कड़ी मेहनत कर रहे हैं। सेब के फलों की बेहतर सेटिंग में अहम भूमिका निभानी वाली परागकण प्रक्रिया के निपटान के लिए बागबान मधुमक्खियों का सहारा ले रहे हैं। जबकि कुछ ऐसे भी बागबान है जाे पिंक बड स्टेज में काफी ज्यादा कीटनाशक का छिड़काव कर रहे हैं। इससे फसल के खराब हाेने की आशंका हैं।

बागबानी विशेषज्ञों के मुताबिक यूरिया खाद एक से दस वर्ष और इससे ऊपर की आयु के फलदार पेड़ में डेढ़ किलो प्रयोग कर सकते हैं। यह मात्राएं दो हिस्सों में बराबर डाली जानी चाहिए। पहले 750 ग्राम यूरिया फूल आने के लगभग तीन हफ्ते पहले और 750 ग्राम फूल आने के एक महीने के बाद डालें। कैन खाद के सस्ते विकल्प के रूप में यूरिया को उपयोग में लाया जा सकता है। इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं। यह उपयुक्त मात्रा और विधि में प्रयोग करने पर मृदा स्वास्थ्य पर भी कोई विपरीत असर नहीं डालता।

पिंक बड स्टेज पर ये करें बागवान

  • खिले हुए फूल पर ज्यादा कीटनाशक का छिड़काव न करें, ताकि परागकण प्रक्रिया में सहायक कीटों को किसी प्रकार का नुकसान हो
  • पिंक बड निकलने पर जिंक व बोरोन की स्प्रे सही रहती हैं। इसके लिए 200 लीटर पानी में 100 ग्राम चिलेटिड जिंक व 200 ग्राम बोरोन मिलाकर छिड़का जाना चाहिए।
  • जहां बागबान को-रॉट या दाने के बीज सड़ने की समस्या से जूझ रहे हों, वहां पिंक बड स्टेज पर 200 लीटर पानी में 600 ग्राम डायथिन प्लस, 100 ग्राम बैवेस्टियन या 35 मिलीलीटर स्कोर के मिश्रण की स्प्रे कर इस परेशानी को दूर कर सकते हैं।
  • अगर फ्लावरिंग के दौरान पाला पड़ने का खतरा हो तो पिंक बड स्टेज पर 200 लीटर पानी में एक किलो पोटाशियम नाइट्रेट की स्प्रे से बेहतर फ्रूट सेटिंग में मदद मिलती है। पोटाश फ्रास्ट को रोकता है।

ये समय पौधों के लिए संवेदशील

कीटनाशक का अति-अधिक प्रयाेग सेब की फसल काे खराब कर सकता है। क्याेंकि, मधुमक्खियां कीटनाशक के कारण बगीचाें में नहीं आती है। इस कारण फूल अच्छी तरह से नहीं खिलता है। फ्लावरिंग के पहले दौर के साथ ही बागबानों के लिए सीजन का सबसे संवदेनशील समय की शुरुआत भी हो गई है।

सेब की पैदावार फ्लावरिंग पॉलिनेशन पर पूरी तरह से निर्भर रहती है। ऐसे में परागकण की इस प्रक्रिया का सही ढंग से निपट जाना बागबानों के लिए हमेशा अहम रहता है। -डाॅ. एसपी भारद्वाज, बागबानी विशेषज्ञ

बारिश-सूखे पर लें सलाह

बागबानी विभाग की ओर से जारी इस समय सारिणी का प्रयोग बागबान सिर्फ मौसम के सामान्य रहने पर ही कर सकते हैं, अगर आने वाले मौसम में सामान्य से अधिक बारिश या सूखा पड़ता है तो बागबान इस सारिणी का प्रयोग करने से पहले ब्लॉक बागबानी अधिकारी या बागबानी विशेषज्ञ से सलाह ले सकते हैं ताकि बागबानों के बगीचों पर किसी प्रकार का गलत प्रभाव पड़े।

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