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तकनीकी दिक्कतों को दूर करने का मामला:वन संरक्षण कानून सेंट्रल यूनिवर्सिटी सहित 30 प्राेजेक्टाें की राह में बना राेड़ा

शिमला5 दिन पहले
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  • सरकार ने प्राेजेक्टाें में एफसीए की तकनीकी दिक्कतों को दूर करने का उठाया मामला

वन संरक्षण अधिनियम 1980 प्रदेश में सेंट्रल यूनिवर्सिटी (सीयू) सहित 30 बढ़े प्राेजेक्टाें की राह में बाधा बन हुआ है। सरकार ने इन प्राेजेक्टाें में एफसीए की तकनीकी दिक्क्ताें काे दूर करने का मामला एक बार फिर केंद्र से उठाया है। हाल ही में सीयू काे लेकर उपजे विवाद के बाद सरकार ने इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

राजस्व मंत्री ने कहा कि वन संरक्षण कानून (एफसीए) के तहत भूमि का कानूनी दर्जा न बदलने की तकनीकी शर्त के चलते प्रदेश के लिए मंजूर सीयू समेत 30 प्रोजेक्टों के नाम वन भूमि का इंतकाल नहीं हो पा रहा है। इस मुद्दे काे राज्य सरकार लगातार केंद्र से उठा रहा है।

राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर से एफसीए की तकनीकी दिक्कतों को दूर करवाने के मामले में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से बात करने का आग्रह किया। अनुराग ने देहरा में रैली के मंच से इस मुद्दे पर अफसरशाही पर निशाना साधा था।

शुक्रवार को राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि सीयू धर्मशाला के लिए वन भूमि परिवर्तित करने के लिए प्रदेश सरकार ने तीव्रता से की कार्यवाही की है।

देहरा के लिए 34.55 हेक्टेयर भूमि दी थी सरकार ने

राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस विश्वविद्यालय के लिए दो परिसर स्थापित करने के लिए मंजूरी दी है। धर्मशाला में उत्तरी परिसर जदरांगल और देहरा में दक्षिणी परिसर शामिल हैं। दक्षिणी परिसर देहरा के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार ने 34.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि 2010 में ही केन्द्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के नाम स्थानांतरित कर दी थी।

जिसका इंतकाल भी 2010 में हो गया था। इसके अलावा 81.79 हेक्टेयर वन भूमि को उपयोगकर्ता एजेंसी निदेशक उच्चतर शिक्षा के नाम वन संरक्षण अधिनियम के तहत परिवर्तित करने की मंजूरी दिसम्बर 2018 को प्राप्त हुई थी। लेकिन इसमें यह शर्त लगाई गई थी कि जिस भूमि को परिवर्तित करने की मंजूरी प्रदान की गई है।

वह किसी भी स्थिति में बिना केंद्र सरकार के अनुमोदन से किसी अन्य एजेंसी , विभाग या किसी अन्य व्यक्ति के नाम स्थानांतरित नहीं की जा सकती। ऐसी परिवर्तित वन भूमि की विधिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। इसलिए यह मामला लटका हुआ है। केंद्रीय मंत्रालय ने बीते साल जुलाई में पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया था कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत जो वन भूमि परिवर्तित की जाती है।

उसकी विधिक स्थिति वन भूमि ही रहेगी। ऐसी परिवर्तित भूमि इंतकाल के माध्यम से उपयोगकर्ता एजेंसी या उपयोगकर्ता विभाग के नाम कागजात माल में राजस्व विभाग द्वारा स्थानांतरित नहीं की जा सकती। इसलिए केंद्रीय विश्वविद्यालय और 30 अन्य महत्त्वपूर्ण प्राेजेक्टाें का काम अधर में लटका हुआ है।

22 कराेड़ से अधिक की राशि की जा चुकी है जमा
प्रदेश सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए वन भूमि को परिवर्तित करने में त्वरित कार्यवाही की है। इसके लिए आवश्यक अनुमोदन भी दिसंबर 2018 में जारी किया गया। ग्रीन कवर प्लान के तहत पांच करोड़ 60 लाख रुपए नवंबर 2018 में कैम्पा हेड में जमा करवाए गए है । यह राशि पहले जमा की गई राशि 17 करोड़ 27 लाख 53 हजार रुपये के अतिरिक्त थी।

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