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आज से गुप्त नवरात्रे:सुबह 5.52 से 7.47 तक घट स्थापना, छठा- सातवां गुप्त नवरात्र एक साथ, मंदिराें में श्रद्धालु कर सकेंगे पूजा

शिमला3 महीने पहले
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वर्ष में कुल चार बार नवरात्र का पर्व मनाया जाता है‌। इसमें माघ और आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्र मनाए जाते हैं। गुप्त नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा विधिवत तरीके से की जाती है। वर्ष में पड़ने वाली सभी चार नवरात्रि मां दुर्गा के भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।

इस बार के गुप्ता नवरात्रे आज यानी 11 जुलाई से शुरू होंगे और 18 जुलाई को समाप्त होंगे। आज पहले नवरात्रे काे सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू हो रहे हैं। माता रानी के भक्त गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन श्रद्धालु निराहार या फलादार रहकर मां दुर्गा की अराधना करते हैं।

प्रतिपदा तिथि में घर व मंदिर में कलश स्थापना की जाएगी। हालांकि अब मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खाेल दिए गए हैं। ऐसे में इस बार लाेग मंदिराें में भी मां की पूजा कर सकेंगे। बीते वर्ष गुप्त नवरात्राें के दाैरान मंदिराें में पूजा अर्चना बंद थी।

सर्वार्थ सिद्धि याेग हाेगा आज
इस बार गुप्त नवरात्र पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो कि आज सुबह 5:31 बजे से रात्रि 2:22 तक रहेगा और आज ही रवि पुष्य नक्षत्र भी पड़ रहा है, जो कि गुप्त नवरात्र में कलश स्थापना पर सभी कार्य सिद्ध करेगा। इस बार नवरात्र 8 दिन की होगी, क्योंकि षष्टी और सप्तमी तिथि एक ही दिन होने के कारण सप्तमी तिथि का क्षय हुआ है। इस गुप्त नवरात्र का आरंभ व समापन पर अति शुभकारी है, जो सर्वार्थ सिद्धि योग में बन रहा है। इस नवरात्र में पूजा की शुरूआत आर्द्रा नक्षत्र में होने से योग और उत्तम हो गया है।

घटस्थापना का समय

  • आषाढ़ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ तिथि-11 जुलाई
  • प्रतिपादा तिथि समाप्त-11 जुलाई के सुबह 07:47
  • अभिजीत मुहूर्त-11 जुलाई, दोपहर 12:05 से 12:59 तक
  • घट स्थापना मुहूर्त-11 जुलाई सुबह 05:52 से 07:47 तक
  • लाभ और अमृत का चौघड़िया प्रातः काल 9:08 मिनट से शुरू होकर 12:32 मिनट तक रहेगा।
  • अभिजित मुहूर्त- दिन में 12.05 मिनट से 12.59 मिनट तक रहेगा।

क्या हैं गुप्त नवरात्रे
चार नवरात्र में से दो को प्रत्यक्ष नवरात्र कहा गया है क्योंकि इनमें गृहस्थ जीवन यानी आम जनता पूजा पाठ करते हैं। लेकिन दो गुप्त नवरात्र होते हैं। इनमें आमतौर पर साधक सन्यासी, सिद्धि प्राप्त करने वाले, तांत्रिक-मांत्रिक देवी की उपासना करते हैं। हालांकि चारों नवरात्र देवी सिद्धि प्रदान करने वाली होती हैं।

लेकिन गुप्त नवरात्र के दिनों में देवी की दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है, जिनका तंत्र शक्तियों और सिद्धियों में विशेष महत्व है। वहीं, प्रत्यक्ष नवरात्र में सांसारिक जीवन से जुड़ी चीजें देने वाली देवी के 9 रूपों की पूजा होती है। गुप्त नवरात्र में सामान्य लोग भी किसी विशेष इच्छा की पूर्ति या सिद्धि के लिए गुप्त नवरात्र में साधना कर सकते हैं।

काैन सा नवरात्र कब
पहले दिन आज प्रतिपदा तिथि पर घट स्थापित किया जाएगा और माता शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।

  • 12 जुलाई काे द्वितीय तिथि द्वितीया तिथि प्रारंभ होगी और मां ब्रह्माचारिणी देवी की पूजा करने का विधान हाेगा।
  • 13 जुलाई काे तृतीय नवरात्र पर माता चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को सुख व समृद्धि का वरदान देती हैं।
  • 14 जुलाई काे चतुर्थी तिथि पर मां कुष्मांडा की पूजा होगी। मां कुष्मांडा की पूजा करने से रोग मुक्त हो जाते हैं।
  • 15 जुलाई काे मां स्कंदमाता की पूजा और आराधना का विधान है। मां स्कंदमाता अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करती हैं और उनकी रक्षा करती हैं।
  • 16 जुलाई काे आषाढ़ गुप्त नवरात्र के षष्ठी तिथि पर मां कात्यायनी और मां कालरात्री की पूजा की जाएगी।
  • 17 जुलाई काे दुर्गा अष्टमी का पर्व है और इस दिन महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी को अन्नपूर्णा स्वरूप भी कहा जाता है।
  • 18 जुलाई काे नवमीं तिथि पर सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
  • 19 जुलाई काे दशमी तिथि पर विजयदशमी पूजा होगी।
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