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परेशानी:नहीं मिल रहा प्रेग्नेंसी में डायबिटीज की जांच करने वाला ग्लूकाेज-75, केएनएच में नहीं हो पा रहे टेस्ट

शिमला15 दिन पहले
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केएनएच में सिविल सप्लाई की दुकान जहां ग्लूकोज-75 खत्म है। - Dainik Bhaskar
केएनएच में सिविल सप्लाई की दुकान जहां ग्लूकोज-75 खत्म है।

आमताैर पर प्रेग्नेंसी के दाैरान महिलाओं काे डायबिटीज हाेने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए हाेता है जब पैंक्रियाज में मां और बच्चे की जरूरताें काे पूरा के लिए पर्याप्त इन्सुलिन नहीं बन पाता। इसके लिए अस्पतालाें में डाॅक्टर गर्भ के 24 से 28 सप्ताह के बीच हर गर्भवती महिला का डायबिटीज टेस्ट करवाते हैं।

इस टेस्ट काे करने के लिए जीटीटी (ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट) या ग्लूकाेज-75 का टेस्ट किया जाता है। मगर प्रदेश के एकमात्र केएनएच स्थित सिविल सप्लाई की दुकानाें में 75 ग्राम ग्लूकाेज की सप्लाई ठप हाे गई है। पिछले कई दिनाें से यहां पर महिलाओं काे टेस्ट करवाने के लिए ग्लूकाेज नहीं मिल रहा है। इससे यहां पर अब महिलाओं के डायबिटीज के टेस्ट नहीं हाे रहे हैं।

सरकार ने इसके लिए केवल सिविल सप्लाई काे ही अथॉराइज्ड किया है। मगर अब यहां पर निजी मेडिसन शाॅप पर भी ग्लूकाेज नहीं मिल रहा है। ऐसे में अब महिलाओं के लिए परेशानी खड़ी हाे गई है। यदि समय पर डायबिटीज का पता नहीं चलता ताे इससे बच्चाें काे डायबिटीज हाेने का खतरा बढ़ जाता है।

इसलिए नहीं आ रही सप्लाई

जानकारी के अनुसार सिविल सप्लाई ने ग्लूकाेज की सप्लाई करने के लिए एक कंपनी से टेंडर किए हुए हैं। यही कंपनी 75 ग्लूकाेज प्रदेश के सभी अस्पतालाें में सप्लाई करती है। माैजूदा समय में कंपनी के ग्लूकाेज की डिमांड पूरी नहीं हाे पा रही है। ऐसे में अब इसका असर सप्लाई पर पड़ रहा है। केएनएच अस्पताल स्थित सिविल सप्लाई की दुकानाें में बीते कई दिनाें से इसकी सप्लाई नहीं आई है।

जिससे गर्भवती महिलाओं का डायबिटीज का टेस्ट नहीं हाे पा रहा है। यहां तक कि 75 ग्लूकाेज अन्य दुकानाें पर भी नहीं मिल पा रहा है क्योंकि इसकी सही दर अन्य मेडिसन शाॅप पर मिलना मुश्किल रहता है। वहां पर 100 ग्राम की पैकिंग ही मिल पाती है, जिससे टेस्ट करना मुश्किल हाे जाता है।

ये है जीटीटी या ग्लूकाेज-75 टेस्टः जीटीटी यानी ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट एक प्रकार का टेस्ट है, जिसमें 75 ग्राम ग्लूकोज का प्रयोग करके पहले और फिर 1- 2 घंटों के बाद के ब्लड में ग्लूकोज के स्तर को मापा जाता है। इस टेस्ट से महिलाओं काे काेई खतरा नहीं हाेता और टेस्ट के बाद भी काेई परेशानी नहीं आती।

यह टेस्ट आमतौर पर 24 से 28 हफ्ते की गर्भावस्था के बीच करवाया जाता है। हालांकि अगर पहले से गर्भवती महिला काे डायबिटीज है ताे यह टेस्ट पहले करवाने के लिए कहा जाता है। ऐसा 16 से 18 सप्ताह की गर्भावस्था पर किया जाता है और फिर 24 से 28 सप्ताह की प्रेग्नेंसी में यह दोबारा कराया जाता है।

राेजाना 500 से ज्यादा महिलाएं

केएनएच में राेजाना 500 से ज्यादा गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आती है। इसमें ज्यादातर महिलाओं काे जीटीटी टेस्ट करवाने के लिए कहा जाता है। यह महिलाएं सिविल सप्लाई की दुकानाें से 75 ग्लूकाेज खरीदती है, जिसके बाद उनका टेस्ट किया जाता है। मगर अब यहां पर ग्लूकाेज नहीं हाेने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। राेजाना कई महिलाएं यहां पर ग्लूकाेज लेने के लिए पहुंच रही है, मगर उन्हें यहां से निराश हाेकर लाैटना पड़ रहा है क्याेंकि यहां पर सप्लाई ही नहीं पहुंच पा रहा है।

हमारे पास प्रेग्नेंसी टेस्ट के ग्लूकोज की सप्लाई के लिए शिमला में एक ही वेंडर है। उसे सप्लाई के आदेश दे दिए गए हैं। जल्द ही सप्लाई पहुंच जाएगी। परेशानी नहीं आने दी जाएगी। -मानसी सहाय ठाकुर, प्रबंध निदेशक सिविल सप्लाई

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