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हिमाचल उपचुनाव से पहले बागी हुए भाजपा के दो नेता:2 बार के विधायक गोविंद शर्मा और चेतन बरागटा निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव, शुक्रवार सुबह भरेंगे नामांकन

शिमला2 महीने पहले
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हिमाचल उपचुनावों ने भाजपा की राह मुश्किल कर दी है। भाजपा के 2 नेता बागी हो गए हैं और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। जुब्बल-कोटखाई से भाजपा के विधायक रहे स्वर्गीय नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा और अर्की विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के 2 बार के विधायक रहे गोविंद राम शर्मा ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। दोनों ही नेता भाजपा से नाराज चले हुए हैं। दोनों ने सार्वजनिक मंच से ऐलान करते हुए कहा कि वह 8 अक्टूबर शुक्रवार को नामांकन पत्र दायर करेंगे।

चेतन बरागटा ने गुम्मा में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी टिकट कट गई। भाजपा ने उन्हें यह कहा कि वह परिवारवाद के वंशज है और भाजपा परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देती। भाजपा की कैंडिडेट नीलम सरैयक पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि बीजेपी ने उस प्रत्याशी को टिकट दिया है, जो कांग्रेस के लोगों के साथ बैठकर संगठन को कमजोर करने की कोशिश करते रहे। संगठन के खिलाफ काम करते रहे। जिस तरह उनके पिता नरेंद्र बरागटा यहां की जनता के लिए विधानसभा के अंदर और बाहर संघर्ष करते रहे। वैसे ही वह भी बिना टिकट मिले यहां की जनता के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

जनसभा में भावुक हुए चेतन बरागटा
जनसभा के दौरान चेतन बरागटा भावुक होते भी नजर आए। उन्होंने रोते हुए कहा कि जब वह हरिद्वार से वापस आए, तब भाजपा नेताओं ने कहा कि उन्हें फील्ड में जाना है। अब उनके साथ धोखा क्यों किया गया। इसका जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने उन्हें ऐसे हटा दिया, जैसे दूध में गिरी मक्खी को निकाला हो। अब सूत्र बता रहे हैं कि वह यहां से आजाद उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दायर करने वाले हैं।

गोविंदराम शर्मा कल भरेंगे नामांकन
वहीं अर्की से भाजपा के 2 बार के विधायक रह चुके गोविंद राम शर्मा ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करते हुए कहा कि वह शुक्रवार सुबह 9 बजे अपना नामांकन पत्र दायर करेंगे। ऐसे में उन्होंने अर्की की जनता से अपील की है कि वह उन्हें सहयोग देने के लिए अस्पताल के सामने वाले मैदान में एकत्रित हों। वह 15 साल तक अर्की की जनता के लिए काम करते रहे। जिसने जैसा भी उन्हें काम बोला, उन्होंने वैसा काम किया। उनके साथ धोखा हुआ। 3 महीने से पार्टी के नेताओं, संगठन के नेताओं और मुख्यमंत्री के पास भी गुहार लगाते रहे कि जिसको भाजपा टिकट देना चाह रही है, वह पार्टी के विरुद्ध काम करता है। जब वह 2 बार विधायक चुने गए, तब भी उसने एक बार भी उनका समर्थन नहीं किया। उनकी जगह रतनपाल सिंह को टिकट दे दी गई, जिनके बूथ से उन्हें केवल 9% मत मिले थे।

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