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विदेशी तकनीक सीखना चाह रहे बागवान:इटली-ऑस्ट्रिया से लौटे अफसरों के साथ बैठक की मांग; CS और सचिव से गुहार

शिमला6 महीने पहले
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बागवानी की तकनीक को समझते हुए एप्पल ग्रोवर। - Dainik Bhaskar
बागवानी की तकनीक को समझते हुए एप्पल ग्रोवर।

इटली और ऑस्ट्रिया भेजे गए IAS, HAS और बागवानी अधिकारी वापस लौट आए हैं। हिमाचल के प्रगतिशील बागवान इन अधिकारियों के साथ बैठक करना चाह रहे हैं, ताकि विदेश से लौटे इन अफसरों द्वारा सीखी गई बागवानी की तकनीक को वह समझ सकें।

सेब के लकदक पौधा।
सेब के लकदक पौधा।

प्लम ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं प्रगतिशील बागवान दीपक सिंघा ने प्रदेश सरकार से जल्द एक कार्यशाला बुलाने की मांग की है, जिसमें प्रदेशभर से बागवानों को बुलाया जाए। उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी गूगल पर भी समझी जा सकती है, लेकिन अधिकारी खुद दो देशों का दौरा कर लौटें हैं।

दीपक सिंघा
दीपक सिंघा

CS और सचिव बागवानी को देंगे ज्ञापन: सिंघा

बागवान समझना चाह रहे हैं कि अधिकारियों ने विदेश में क्या सीखा? ताकि बागवान इसे ग्राउंड लेवल पर लागू कर सकें। दीपक सिंघा ने बताया कि एसोसिएशन की ओर से इसे लेकर मुख्य सचिव और सचिव बागवानी को एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा, जिसमें कार्यशाला बुलाने की मांग की जाएगी।

लोकेंद्र बिष्ट।
लोकेंद्र बिष्ट।

अधिकारियों से कराई जाए बागवानों की मीटिंग: बिष्ट

प्रोग्रेसिव ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र बिष्ट ने बताया कि विदेश गए अधिकारियों से मीटिंग होनी चाहिए। इससे बागवान समझ पाएंगे कि यूरोपीय देशों में सेब की खेती किस प्रकार की जा रही है। प्रदेश का बागवान तकनीक में बहुत पिछड़ा हुआ है। इसलिए अधिकारियों के साथ ग्रोवर की मीटिंग जरूरी है।

इसलिए विदेश भेजा अधिकारियों का दल

राज्य सरकार ने विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित बागवानी विकास परियोजना के अंतर्गत अधिकारियों का एक दल इटली और ऑस्ट्रिया भेजा था। मकसद बागवानी की तकनीक को समझना और इसे राज्य में लागू करना है, क्योंकि न्यूजीलैंड, इटली, अमेरिका, चीन जैसे देश प्रति हेक्टेयर 50 से 70 मीट्रिक टन सेब की पैदावार कर रहे हैं और तकनीक में पिछड़ा होने की वजह से हिमाचल में अभी सात से आठ मीट्रिक टन ही प्रति हेक्टेयर सेब का उत्पादन हो रहा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
प्रतीकात्मक तस्वीर।

बागवानी प्रोजेक्ट में हितधारकों की ट्रेनिंग का प्रावधान

उत्पादन को बढ़ाने के मकसद से ही 1134 करोड़ रुपए की बागवानी विकास परियोजना को लागू किया गया है। इस प्रोजेक्ट में हितधारकों की विदेशों में ट्रेनिंग का प्रावधान है, लेकिन प्रोजेक्ट की करीबन 5 साल की अवधि में असल हितधारक बागवानों को विदेश नहीं ले जाया गया है। जबकि कुछ बागवान इसी मांग को लेकर बीते दिनों मुख्य सचिव से भी मिल चुके हैं।

यह अधिकारी गए थे विदेश दौरे पर

कृषि सचिव राकेश कंवर, बागवानी निदेशक एवं IAS अधिकारी आरके पुरथी और राज्य मार्केटिंग बोर्ड के MD नरेश ठाकुर, बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक सुभाष चंद और उप निदेशक मंडी संजय गुप्ता विदेश गए थे।