महेंद्र सिंह की बेटी का CM जयराम पर हमला:वंदना बोलीं- उनके महिला सशक्तिकरण के दावे खोखले, रश्मिधर सूद का सबसे बड़ा फेल्योर

पूनम भारद्वाज, शिमला3 महीने पहले

हिमाचल विधानसभा चुनाव में मंडी की धर्मपुर सीट से भाजपा का टिकट न मिलने पर पार्टी नेता वंदना गुलेरिया ने CM जयराम ठाकुर पर सीधा हमला बोला। वंदना गुलेरिया जयराम सरकार में कद्दावर मंत्री रहे महेंद्र सिंह ठाकुर की बड़ी बेटी हैं। वह धर्मपुर से टिकट की दावेदार थीं, मगर BJP ने महेंद्र के बेटे रजत ठाकुर को टिकट दिया।

अपनी अनदेखी से भड़की वंदना गुलेरिया ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया और जयराम सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्टर पूनम भारद्वाज से वन-टू-वन बात में वंदना ने कई बड़ी बातें कहीं। वह बोलीं...

- अगर अपनी बात रखना बगावत है तो मैं बगावती ही सही।

- उत्तराधिकारी बेटे ही क्यों? बेटियां ही कब तक सेक्रीफाइस करती रहेंगी।

- परिवार व वंशवाद के नाम पर बेटियां ही क्यों बलि चढ़ती हैं?

मोबाइल से बाहर तक गूंजती आवाज में जयराम सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री महेंद्र ठाकुर की बेटी वंदना बोलीं,,,

  • क्या बेटा ही उत्तराधिकारी हो सकता है, बेटी क्यों नहीं? परिवारवाद में हमेशा बेटियों को ही पीसा जाता है।
  • पार्टी के लिए दिन-रात काम किया और जब चुनाव में टिकट देने की बारी आई तो किनारे कर दिया गया।
  • 3 बार जिला परिषद के चुनाव लड़ी हूं, 2 बार जीती, फील्ड में जी-जान से लोगों की सेवा और उनके काम किए तभी तो चुनाव जीता।

बातचीत करते-करते वंदना कुछ देर के लिए रुकी रुकीं और फिर बोलीं कि उन्होंने इस्तीफे देने से पहले हिमाचल प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष रश्मिधर सूद ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पार्टी अध्यक्ष सुरेश कश्यप को भी खूब सुनाई। वंदना ने कहा कि इन नेताओं की वजह से ही पहाड़ की महिलाएं आगे नहीं बढ़ पा रही।

उन्होंने कहा कि मैंने धर्मपुर सीट से पार्टी टिकट के लिए अप्लाई नहीं किया, लेकिन पार्टी के सर्वे में मैं वहां पहले नंबर पर आई थी। उसके बावजूद जब मेरी जगह मेरे भाई रजत ठाकुर को टिकट दिए जाने की खबर मिली तो मैं सोचती रह गई कि महिला को टिकट क्यों नहीं मिला।

वंदना ने कहा कि जयराम की अगुवाई भाजपा सरकार एक तरफ महिला सशक्तिकरण का दम भरती है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है और दूसरी तरफ जब महिलाओं को आगे लाने की बात आती है तो उन्हें आने नहीं दिया जाता। वंदना ने पूछा कि अगर संसद में या विधानसभा में महिलाओं को आने ही नहीं दिया जाएगा तो उनकी बात आगे कौन रखेगा?

वंदना ने पूछा कि क्या बेटा ही पिता की राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी हो सकता है, बेटी नहीं? अगर उन्हें टिकट नहीं देना था तो महिला मोर्चा की किसी अन्य सदस्य को दे देते। पार्टी ने टिकट आवंटन में महिलाओं की अनदेखी की।

राष्ट्रवादी परिवार से हूं, 10 साल से महिला मोर्चा में एक्टिव

वंदना कहती हैं कि वे 10 साल से भाजपा में एक्टिव हैं। वे राष्ट्रवादी परिवार से हूं, अपने हक के लिए लड़ना जानती हैं। उनके परिवार के सदस्य 1965, 1971, 1999 की लड़ाई में देश के लिए शहीद हुए। उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि है, वह कभी उसूलों से समझौता नहीं करतीं।

अपनी पार्टी के टिकट वितरण में महिलाओं को पूरा प्रतिनिधित्व नहीं देने पर सवाल उठाते हुए वंदना ने कहा कि यह दुख की बात है कि राज्य की 68 सीटों में से सिर्फ 6 पर महिलाओं को टिकट दिया गया। इससे भाजपा के महिला सशक्तिकरण के नारे की पोल खुलती है।

संपर्क में कांग्रेस और आप भी थीं

कुछ देर बाद, कुछ शांत होकर वंदना गुलेरिया ने बताया कि कांग्रेस उनके संपर्क में थी। हां यदि उन्हें घर आकर धर्मपुर से टिकट देते तो चुनाव लड़ती। आप पार्टी ने भी उनसे संपर्क साधा था, उन्हें भी मना कर दिया।

रश्मिधर सूद सबसे बड़ी फेलियर

वंदना गुलेरिया ने महिला मोर्चा अध्यक्ष रश्मिधर सूद को सबसे बड़ा फेलियर बताया। विधानसभा चुनाव में मोर्चा की एक भी महिला को टिकट नहीं मिला। मोर्चा अध्यक्ष किसी भी महिलाओं को टिकट नहीं दिलवा सकी।

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