कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव:PCC ने सोनिया गांधी को निर्णय लेने के लिए किया अधिकृत; सिंगल लाइन प्रस्ताव पास

शिमला3 महीने पहले
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेशाध्यक्ष।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के लिए सोनिया गांधी को अधिकृत किया है। PCC की सोमवार को शिमला में आयोजित बैठक में सिंगल लाइन प्रस्ताव पास किया गया। PCC के ज्यादातर नेता राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के पक्ष में है।

सूत्रों की मानें तो हिमाचल कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने तो बैठक में राहुल गांधी के नाम का प्रस्ताव भेजने का सुझाव दिया था लेकिन PCC ने किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए राहुल का नाम के बजाय सोनिया गांधी को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया है क्योंकि जी-23 गुट के नेता राहुल गांधी का विरोध करते रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में मौजूद पदाधिकारी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में मौजूद पदाधिकारी।

PCC की यह बैठक AICC द्वारा नियुक्त सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) शमीमा रैना की अध्यक्षता में संपन्न हुई। यह प्रस्ताव भी शमीमा रैना के माध्यम से कांग्रेस की वर्किंग कमेटी (CWC) को भेजा जाएगा।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव के लिए 24 से 30 सितम्बर तक नामांकन मांगे गए हैं। 17 अक्टूबर को नए अध्यक्ष के लिए मतदान होना है। 19 अक्टूबर को नतीजे आएंगे, यानी दिवाली से पहले कांग्रेस को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलेगा। फिलहाल सोनिया गांधी कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

कांग्रेस में एक धड़ा गांधी परिवार से अध्यक्ष का हिमायती

देश में कांग्रेस नेताओं का एक धड़ा गांधी परिवार के खिलाफ खड़ा है। इसी का नतीजा जी-23 गुट है। कांग्रेस छोड़ने के बाद वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने भी राहुल गांधी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन कुछ नेता आज भी गांधी परिवार के हिमायती हैं। खासकर जब राहुल गांधी देशभर में भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इससे राहुल गांधी की लोकप्रियता और बढ़ेगी।

देश में लंबे समय से राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर बहस

देश में लंबे समय से बहस छिड़ी है कि गांधी परिवार से पार्टी अध्यक्ष बनाया जाए या फिर गैर गांधी परिवार से किसी काबिल नेता को कमान सौंपी जाए। इसी बीच हिमाचल कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के बजाय राष्ट्रीय अध्यक्ष पर फैसला लेने का जिम्मा छोड़ दिया है।

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