हिमाचल में निजी विश्वविद्यालयों के लिए नए नियम तय:सभी 17 यूनिवर्सिटी की फीस में बड़ा बदलाव; अब नहीं वसूल पाएंगे कई तरह के फंड, शिक्षा विभाग ने जारी की अधिसूचना

शिमलाएक महीने पहले
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हिमाचल सरकार ने प्रदेश के निजी क्षेत्रों में चल रहे विश्वविद्यालयों के लिए नए नियम तय कर दिए हैं। अब सभी 17 निजी विश्वविद्यालय मनमानी फीस नहीं वसूल पाएंगे। क्योंकि इनके शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए फीस ढांचे को तय कर दिया है। यूनिवर्सिटी अब छात्रों से बिल्डिंग फंड, इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, डेवलपमेंट फंड नहीं वसूलेगी। ट्यूशन फीस भी किश्तों में ली जाएगी। संयुक्त सचिव शिक्षा नवनीत कपूर की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।

अब कोई भी निजी विवि तय स्ट्रक्चर से ज्यादा फीस नहीं वसूल सकेगा। यदि वह ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हॉस्टल फीस के लिए भी नियम तय किए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रबंधन एक साथ छात्रों से हॉस्टल चार्ज नहीं वसूल सकेंगे। हॉस्टल में यदि छात्र अकेला कमरा लेता है तो उसकी फीस अलग होगी। यदि दो व तीन छात्र मिलकर कमरा शेयर करते हैं तो उसकी फीस भी अलग-अलग होगी। हॉस्टल सिक्योरिटी के तौर पर ली जाने वाली फीस को बाद में रिफंड करना होगा।

हिमाचल प्रदेश में संचालित प्राइवेट यूनिवर्सिटी का फाइल फोटो।
हिमाचल प्रदेश में संचालित प्राइवेट यूनिवर्सिटी का फाइल फोटो।

बिना मंजूरी शुरू नहीं कर सकेंगे नया कोर्स
सरकार की मंजूरी के बिना निजी विश्वविद्यालय कोई भी नया कोर्स शुरू नहीं कर सकेंगे। अगर किसी कोर्स के लिए सरकार से मंजूरी नहीं मिली है और फीस कमेटी ने उस कोर्स का फीस स्ट्रक्चर तय कर दिया है तो भी कोर्स मान्य नहीं होगा। विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि निजी विश्वविद्यालयों को यूजीसी के दिशा निर्देशानुसार ही शिक्षक भर्ती करनी होगी। प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से विवि के विद्यार्थियों को अवगत करवाना होगा।

शिकायतें लगातार पहुंच रही थीं सरकार के पास
सरकार के पास लगातार प्राइवेट विश्वविद्यालयों की फीस को लेकर मनमानी की शिकायतें आ रही थीं, जिसमें आरोप लगाया जा रहा था कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी वाले हॉस्टल, इमारत समेत अन्य कइ तरह के फंड वसूल रहे हैं। ऐसे में सरकार लगातार यह सोच रही थी कि कैसे इन पर नकेल कसी जाए। शिक्षा विभाग के साथ मंथन करने के बाद सरकार ने फीस ढांचे को तय कर दिया है। ऐसे में अब अभिभावकों को भी इस निर्णय से राहत मिलेगी।

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