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HP-SHIVA प्रोजेक्ट:775 करोड़ के लोन के लिए MOU की तैयारी; परियोजना से किसानों की आमदनी दोगुना करने का दावा

शिमला2 महीने पहले
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हिमाचल सरकार किसानों की आमदनी दोगुना करने के मकसद से एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से 775 करोड़ रुपए का ऋण (लोन) लेने के लिए MOU करने की तैयारी में है। यह करार बागवानी क्षेत्र की HP शिवा परियोजना को लेकर इसी साल सितम्बर महीने में किया जाएगा। इस परियोजना के पायलट चरण की सफलता के बाद ADB नवम्बर महीने से मेन प्रोजेक्ट के लिए ऋण देने की शुरुआत करेगा।

HP-SHIVA प्रोजेक्ट के पायलट चरण में तैयार किया जा रहा सब ट्रॉपिकल फ्रूट का बगीचा।
HP-SHIVA प्रोजेक्ट के पायलट चरण में तैयार किया जा रहा सब ट्रॉपिकल फ्रूट का बगीचा।

अक्तूबर में खत्म हो रहा पायलट चरण

अभी राज्य में सब-ट्रॉपिकल (उपोषण कटिबंधीय) हॉर्टिकल्चर, इरिगेशन एंड वेल्यू एडिशन प्रोजेक्ट (HP-SHIVA) का पायलट चरण चल रहा है, जो अक्तूबर में खत्म हो जाएगा। इसके बाद HP-SHIVA परियोजना का पहला चरण सात जिलों के 28 ब्लाक में लागू होगा। इनमें संतरा, अमरूद, अनार, आम, लीची इत्यादि फलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

1500 करोड़ की DPR मंजूरी के लिए केंद्र को भेजी

बेशक पहले चरण में लगभग 775 करोड़ का लोन हिमाचल को मिलना प्रस्तावित है, लेकिन बागवानी विभाग ने पहले चरण के लिए तकरीबन 1500 करोड़ रुपए की DPR बनाकर केंद्र सरकार की मंजूरी को भेज दी है। केंद्र की मंजूरी के भारत सरकार, राज्य सरकार और ADB के मध्य दिल्ली में लोन-एग्रीमेंट साइन किया जाएगा।

HP-SHIVA प्रोजेक्ट के तहत प्लांटेशन के लिए बनाए गए गड्ढें।
HP-SHIVA प्रोजेक्ट के तहत प्लांटेशन के लिए बनाए गए गड्ढें।

दो प्रोजेक्ट को मिलाकर बनी HP-SHIVA परियोजना

SHIVA प्रोजेक्ट का मकसद हिमाचल को फल राज्य के तौर पर विकसित करना है। दरअसल, जयराम की भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद दो प्रोजेक्ट बनाएं। एक प्रोजेक्ट किसानों की आय दोगुना करने के मकसद से सिंचाई सुविधाएं जुटाने को बनाया गया था, जबकि दूसरा प्रोजेक्ट सब ट्रॉपिकल फलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए।

अब सरकार ने दोनों ही प्रोजेक्ट फंडिंग के लिए ADB को भेजे। ADB ने भी इन्हें मंजूरी दे दी, लेकिन दोनों का एक संयुक्त प्रोजेक्ट बनाने को कहा, क्योंकि दोनों प्रोजेक्ट का मकसद किसानों की आमदनी बढ़ाना ही है। इसके बाद परियोजना को नाम HP-SHIVA रखा गया।

HP-SHIVA प्रोजेक्ट के पायलट प्रोजेक्ट में प्लांटेशन के लिए तैयार खेत।
HP-SHIVA प्रोजेक्ट के पायलट प्रोजेक्ट में प्लांटेशन के लिए तैयार खेत।

पायलट चरण की अपार सफलता

राज्य में बीते अढ़ाई सालों से इस प्रोजेक्ट का पायलट चरण लागू है। इसके अंतर्गत चार जिलों के तकरीबन 17 क्लस्टर में विभिन्न सब-ट्रॉपिकल फलों के बगीचे लगाए गए हैं। इनसे बागवानों को अच्छी आमदनी हो रही है। बागवानी अधिकारियों का दावा है कि बागवानी क्षेत्र में इससे पहले किसी भी प्रोजेक्ट का पायलट चरण इतना सफल नहीं रहा है।

HP-SHIVA प्रोजेक्ट के तहत तैयार बगीचे से फल तोड़ते हुए किसान।
HP-SHIVA प्रोजेक्ट के तहत तैयार बगीचे से फल तोड़ते हुए किसान।

HP-SHIVA प्रोजेक्ट में की जा रही यह गतिविधियां

SHIVA परियोजना में फसल तैयार करने लेकर मंडी तक पहुंचाने के संकल्पना की गई है। यानी बगीचा लगाने के लिए प्लांटिंग मटेरियल देने, सिंचाई टैंक बनाने, ड्रीप-इरिगेशन लगाने, अच्छी मंडियां बनाने, फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए फैसिंग लगाने के लिए अनुदान देने की व्यवस्था की गई है। बगीचों में सिंचाई की सुविधा के लिए टेंक बनाने का काम जल शक्ति महकमा कर रहा है।

HP-SHIVA प्रोजेक्ट के पायलट चरण में तैयार बगीचे में लगे फल।
HP-SHIVA प्रोजेक्ट के पायलट चरण में तैयार बगीचे में लगे फल।

इन 7 जिलों में लागू होगा पहला चरण

इस प्रोजेक्ट के पहला चरण में सिरमौर, सोलन, बिलासपुर, कागंड़ा, मंडी, हमीरपुर और ऊना में लागू होगा। इन 7 जिलों के 28 ब्लाक के कुल 358 कलस्टर बनाए गए हैं। पहले चरण में करीबन 4320 हैक्टेयर क्षेत्र पर विभिन्न फलों के पौधे लगाए जाएंगे। पहले और दूसरे चरण में 4000-4000 हैक्टेयर क्षेत्र को विभिन्न फसलों के अधीन लाया जाएगा। इसी तरह कुल 190 सिंचाई योजनाएं बनाई जाएगी। इनमें 40 प्रतिशत सिंचाई योजनाएं नई तथा 60 प्रतिशत पुरानी योजनाओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा।

HP-SHIVA प्रोजेक्ट के तहत तैयार बगीचे के मुआयना करते हुए बागवानी अधिकारी।
HP-SHIVA प्रोजेक्ट के तहत तैयार बगीचे के मुआयना करते हुए बागवानी अधिकारी।

6000 करोड़ की है शिवा परियोजना

राज्य सरकार का दावा है कि HP-SHIVA परियोजना लगभग 6000 करोड़ की है। पूरा कितना बजट मिलता है, यह पहले चरण की सफलता पर निर्भर करेगा। इस लोन को केंद्र और राज्य सरकार मिलकर चुकाएंगे।

HP-SHIVA प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया जा रहा बगीचा।
HP-SHIVA प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया जा रहा बगीचा।

सेब राज्य हिमाचल ऐसे बनेगा फ्रूट स्टेट

हिमाचल प्रदेश देशभर में APPLE स्टेट के तौर पर पहचाना जाता है। सरकार प्रदेश की पहचान FRIUT STATE के तौर पर बनाना चाहती है। इसी मकसद से अधिक ऊंचे क्षेत्रों में 1134 करोड़ रुपए की बागवानी विकास परियोजना विश्व बैंक की मदद से चल रही है, जबकि कम ऊंचे क्षेत्रों में सब ट्रॉपिकल फ्रूट की खेती के लिए तकरीबन 6000 करोड़ की HP-SHIVA परियोजना कार्यान्वित की जा रही है।

HP-SHIVA प्रोजेक्ट के पायलट चरण में तैयार डेमोस्ट्रेशन ऑर्चड।
HP-SHIVA प्रोजेक्ट के पायलट चरण में तैयार डेमोस्ट्रेशन ऑर्चड।

‘बीज से बाजार तक’’ संकल्पना: डॉ. देवेंद्र

HP-SHIVA परियोजना निदेशक देवेंद्र ठाकुर ने बताया कि विभाग ने 200 मिलियन डॉलर की DPR बनाकर भारत सरकार को भेज दी है, जबकि पहले चरण में लोन 100 मिलियन डॉलर के लगभग मिलना है। जल्द ही इस प्रोजेक्ट को लेकर ADB के साथ MOU साइन किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में ‘बीज से बाजार तक’’ संकल्पना है।

उन्होंने बताया कि इससे न केवल युवाओं को आजीविका अर्जन के अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि भविष्य के लिए पर्यावरण को सहेजने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत लगभग 20 हजार कृषक लाभान्वित होंगे और उन्हें एक करोड़ विभिन्न फलों के पौधे देने का लक्ष्य रखा गया है।

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