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हिमाचल में मंत्रियों को सबसे ज्यादा खतरा:हर बार 45 से 75% मंत्री हारते रहे चुनाव; जयराम के ज्यादातर मंत्रियों की हालत भी टाइट

देवेंद्र हेटा,शिमला2 महीने पहले
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में तख्तापलट विधायकों का ही नहीं, बल्कि मंत्रियों का भी होता है। अगर 32 साल के इतिहास पर नजर डालें तो हर विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल के 45 से 75% मंत्री चुनाव हारते रहे हैं।

हिमाचल में मंत्रियों के चुनाव हारने का ये ट्रेंड 1990 से चला आ रहा है और इसी वजह से जयराम सरकार के ज्यादातर मंत्री भी सहमे हुए हैं।

भाजपा ने भी इस बार टिकट आवंटन में जयराम मंत्रिमंडल में रहे 2 मंत्रियों- सुरेश भारद्वाज और राकेश पठानिया- का विधानसभा हलका इस बार बदल दिया। इनमें सुरेश भारद्वाज को शिमला की जगह कसुम्पटी से टिकट दिया गया जबकि पठानिया को फतेहपुर से मैदान में उतारा गया। इन दोनों की स्थिति कमजोर बताई जा रही है। इसके अलावा भी जयराम के दो से तीन मंत्री कांटे की टक्कर में फंसे हैं।

2017 में 11 में से 3 मंत्री ही जीत पाए

वर्ष 2012 से 2017 तक हिमाचल में कांग्रेस की सरकार रही। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की कैबिनेट में विद्या स्टोक्स, कौल सिंह ठाकुर, जीएस बाली, प्रकाश चौधरी, धनीराम शांडिल, अनिल शर्मा, कर्ण सिंह, मुकेश अग्निहोत्री, सुजान सिंह पठानिया, सुधीर शर्मा और ठाकुर सिंह भरमौरी मंत्री थे। 2017 के चुनाव में इनमें से तीन मंत्री ही चुनाव जीत पाए। इनमें धनीराम शांडिल, मुकेश अग्निहोत्री और सुजान सिंह पठानिया शामिल थे।

वीरभद्र सिंह के पांच मंत्री- कौल सिंह ठाकुर, जीएस बाली, प्रकाश चौधरी, सुधीर शर्मा और ठाकुर सिंह भरमौरी अपनी सीट नहीं बचा पाए।

इसके अलावा विद्या स्टोक्स नामांकन रद्द हो जाने की वजह से मुकाबले से बाहर हो गईं जबकि अनिल शर्मा BJP में शामिल हो गए। कर्ण सिंह का निधन हो गया।

धूमल के 4 मंत्री भी हारे थे चुनाव

हिमाचल में वर्ष 2007 से 2012 तक भाजपा की सरकार थी और प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री थे। धूमल सरकार में जेपी नड्डा, नरेंद्र बरागटा, महेंद्र सिंह ठाकुर, सरवीण चौधरी, गुलाब सिंह ठाकुर, राजीव बिंदल, आईडी धीमान, किशन कपूर, रविंद्र रवि, खीमीराम, रमेश धवाला कैबिनेट मंत्री रहें। 2012 के विधानसभा चुनाव में इनमें से 4 मंत्री- नरेंद्र बरागटा, किशन कपूर, खीमीराम और रमेश धवाला हार गए, जबकि जेपी नड्डा केंद्रीय राजनीति में चले गए।

2007 में ये नहीं पहुंचे विधानसभा

वर्ष 2003 से 2007 तक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अगुवाई में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। वीरभद्र सिंह के साथ विद्या स्टोक्स, कौल सिंह ठाकुर, कुलदीप कुमार, आशा कुमारी, रामलाल ठाकुर, चंद्र कुमार, सिंघी राम, प्रकाश चौधरी, अनिल शर्मा और सत महाजन मंत्री थे। 2007 के विधानसभा चुनाव हुए तो कुलदीप, रामलाल ठाकुर, चंद्र कुमार, सिंघी राम, प्रकाश चौधरी और सत महाजन अपनी विधानसभा सीट बचा नहीं पाए।

2003 में भी 6 मंत्री हारे
वर्ष 1998 से 2003 तक हिमाचल में भाजपा की सरकार बनी। तब प्रेम कुमार धूमल पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। उनकी कैबिनेट में मोहन लाल, रामलाल मारकंडा, आईडी धीमान, नरेंद्र बरागटा, महेंद्र सिंह ठाकुर, प्रकाश चौधरी, रूप सिंह, मनसा राम, विद्या सागर चौधरी, राजन सुशांत, प्रवीण शर्मा और आरडी कश्यप शामिल थे। 2003 में चुनाव हुए तो रामलाल मारकंडा, नरेंद्र बरागटा, रूप सिंह, मनसा राम, प्रवीण शर्मा, विद्या सागर चौधरी जीत नहीं पाए।

इस बार इनकी स्थिति टाइट

इस बार भी जयराम कैबिनेट में रहे कई मंत्रियों की स्थिति टाइट बनी हुई है। कैबिनेट में सीएम के बाद नंबर-टू कहे जाने वाले महेंद्र सिंह ठाकुर इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे क्योंकि BJP ने उनकी जगह धर्मपुर सीट से उनके बेटे रजत ठाकुर को कैंडिडेट बनाया है। दो मंत्री सुरेश भारद्वाज और राकेश पठानिया भी सीट बदल दिए जाने की वजह से चुनौती का सामना कर रहे हैं।

राकेश पठानिया को BJP ने नूरपूर की जगह फतेहपुर से कैंडिडेट बना दिया जिसके बाद वह पार्टी के ही बागियों की चुनौती झेल रहे हैं। इसी तरह BJP हाईकमान ने जयराम सरकार में शहरी विकास मंत्री रहे सुरेश भारद्वाज को भी शिमला सीट की जगह कांग्रेस के गढ़ कहे जाने वाले कसुम्पटी से उम्मीदवार बना दिया। भारद्वाज अब कसुम्पटी से कांग्रेस के दो बार विधायक रह चुके अनिरुद्ध सिंह के सामने फंसे हैं।

राजीव सैजल की जंग भी आसान नहीं

जयराम सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉ. राजीव सैजल 2017 में कसौली सीट पर बहुत कम मार्जिन से जीते थे। इस बार वह कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी से कांटे की टक्कर का सामना कर रहे हैं। पांवटा साहिब सीट पर ऊर्जा मंत्री रहे सुखराम चौधरी और कांग्रेस के किरनेश जंग में रोचक मुकाबला है। यहां आम आदमी पार्टी के मनीष ठाकुर ने मुकाबले को रोचक बना दिया।

विक्रम सिंह की राह भी आसान नहीं

जसवा-परागपुर सीट पर उद्योग मंत्री विक्रम सिंह और कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह मनकोटिया में कांटे की टक्कर है। विक्रम सिंह यहां डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों के वोट पाने के लिए रेप केस में सजा काट रहे राम रहीम का आशीर्वाद लेने पहुंच गए थे। कुटलेहड़ सीट पर पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर और कांग्रेस के देवेंद्र कुमार भुट्‌टो में कड़ा मुकाबला है।

शिक्षामंत्री को गौड़ दे रहे टक्कर

जयराम सरकार में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर की मनाली सीट पर राह बहुत मुश्किल है। उन्हें कांग्रेस के भुवनेश्वर गौड़ से कड़ी चुनौती मिल रही है। इसी तरह शाहपुर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी और कांग्रेस के केवल सिंह पठानिया में मुकाबला है। तकनीकी शिक्षामंत्री राम लाल मारकंडा को लाहौल स्पीति सीट पर रवि ठाकुर और खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग को घुमारवीं सीट पर कांग्रेस के राजेश धर्माणी से कड़ी चुनौती मिल रही है।

हिमाचल में बन सकते हैं CM समेत 12 मंत्री

​​​​​​​​​हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 68 सीटें हैं। इस लिहाज से यहां CM समेत अधिकतम 12 मंत्री ही बन सकते हैं।