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समस्या:बागवानों को नकद भुगतान नहीं कर पाया एचपीएमसी, ऐसे में कैश की जगह दे रहा औजार या बाकी सामान

शिमला10 दिन पहले
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  • एचपीएमसी के पास 2 साल से रुका है बागवानाें का 16 कराेड़ रुपए

मंडी मध्यस्थ याेजना के तहत बेचे गए सेब का पैसा लेने के लिए बागवानाें काे संबंधित विभागाें के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। आज भी बागवानाें काे उनका पैसा नहीं मिल रहा है। बागवान हितैषी हाेने का दावा करने वाली सरकार ने पिछले दाे सालाें से बागवानाें का 16 करोड़ रुपए अदा नहीं किया है।

उधर सरकार के उपक्रम एचपीएमसी बागवानाें काे पैसाें के नगद भुगतान करने की बजाय बागवानी से संबंधित सामान दे रहा है। निगम के पास अपने पैसाें काे फंसता देख लाेग एचपीएमसी से न चाहते हुए भी खाद, स्प्रे, औजार आदि खरीदने काे मजबूर हाे रहे है।

इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत गरीब बागवानाें काे हाे रही है जिन्हें अपनी राेजमर्रा की वस्तुओं काे खरीदने के लिए पैसाें की सख्त जरुरत है, लेकिन नकद भुगतान न हाेने के कारण या ताे उन्हें पैसाें के लिए इंतजार करने काे कहा जा रहा है या पैसाें की जगह दूसरा उपकरण ले जाने काे कहा जा रहा है।

2019 में 33000 मिट्रिक टन सेब खरीदा गया था एमआईएस से

2019 में मंडी मध्यस्थ याेजना के तहत बागवानाें से 33000 मिट्रिक टन सेब खरीदा गया था। इसमें से चार कराेड़ रुपए की देनदारी अभी भी लंबित है। 2020 में 19000 मिट्रिक टन सेब एमआईएस के तहत खरीदा गया। स्कीम के तहत खरीदे गए सेब का भुगतान करने के लिए एचपीएमसी ने सरकार काे करीब 16 कराेड़ का बिल भेजा है।

सरकार से ग्रांट न मिलने के कारण यह पैसा भी लंबित है जिससे बागवानाें काे पैसाें का नकद भुगतान नही हाे पा रहा है। हालांकि निगम का दावा है कि इस बीच बागवानाें काे 3.50 कराेड़ रूपए का स्प्रे ऑयल और दूसरे अन्य उपकरण बागवानाें ले चुके हैं।

इसलिए शुरू की है याेजना... बी और सी ग्रेड का सेब खरीद कर बागवानाें काे नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने ये याेजना शुरू की है। इस याेजना से अच्छी क्वालिटी के सेब के बागवानाें काे उसके अच्छे दाम मिलते हैं।

नहीं मिला योजना का लाभ.. बागवान और फल उत्पादक संघ के नेता संजय चाैहान ने कहा कि इस स्कीम का मकसद बाजार में कंपनियाें के दबाव काे कम करना था, लेकिन लाभ बागवानाें काे पूरा लाभ नहीं मिल पाया। स्कीम के तहत खरीदे गए सेब की पेमेंट बागवानाें काे तीन साल से नहीं मिल पाई है।

एमआईएस के तहत खरीदे गए सेब के एवज में बागवानाें काे उचित दामाें पर बागवानी से संबंधित सामान उपलबध करवाया जा रहा है। सरकार से बकाया भुगतान के लिए 16 कराेड़ रुपए की मांग की गई है। सरकार से पैसा मिलते ही बागवानाें काे बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। 4 करोड़ की राशि बुधवार को प्राप्त हुई।
राेजश्वर गाेयल, प्रबंध निदेशक एचपीएमसी

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