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शहर में आम लाेगाें की सुविधा के लिए चलाई गई एचआरटीसी की टैक्सियाें में 50 फीसदी सवारियाें की शर्त लाेगाें पर भारी पड़ रही है। एचआरटीसी टैक्सियाें की संख्या न बढ़ने से लाेगाें काे परेशानी हाे रही है। काेराेना संक्रमण के चलते सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है कि 50 फीसदी ही लाेग टैक्सियाें में बैठ सकते हैं। ऐसे में 11 सीटर टैक्सी में ड्राइवर समेत कुल छह लाेग ही बैठ सकते हैं।
शहर में कुल 25 टैक्सियां चल रही हैं, ऐसे में सुबह और शाम के समय लाेगाें काे पैदल ही अपने कार्यालय और बाजार पहुंचना पड़ रहा है। टैक्सी चालकाें और लाेगाें के बीच हर राेज विवाद हाे रहा है। लाेगाें ने मांग की है कि यहां एचआरटीसी अधिक टैक्सियां चलाएं या फिर बैठने के लिए सवारियाें की संख्या में इजाफा करें। सबसे मुश्किल वरिष्ठ नागरिकाें और महिलाओं काे हाे रही है।
सुबह के लिए समय अधिकतर वरिष्ठ नागरिक रिज मैदान की ओर आते हैं। टैक्सियाें में जगह न मिलने के कारण उन्हें पैदल ही आना पड़ता है। एचआरटीसी के आरएम लाेकल देवासेन नेगी का कहना है कि सरकार की ओर से जाे निर्देश दिए गए हैं, हम उनकी पालना कर रहे हैं।
शहर में ऐसी जगह चलती है टैक्सियां, जहां नहीं जा सकती है बसें
शिमला शहर की बात करें तो यहां पर अधिकतर प्रतिबंधित मार्ग हैं। ऐसे में इन जगहों पर बसों का चलाना संभव नहीं है। इसलिए एचआरटीसी की ओर से टैक्सियों का संचालन इन रूटों पर किया गया है। जाखू, अनाडेल, कुफ्टाधार, दुधली, टुटू, समरहिल जैसे कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां से बसें आती ताे जरूर हैं, लेकिन ये बस स्टैंड तक ही पहुंचती हैं। जबकि टैक्सियां सीधे सीटीओ काे कनेक्ट करती हैं और लाेग आसानी से रिज और मालराेड पर पहुंच जाते हैं।
महिला और ड्राइवर में हुआ विवाद
साेशल मीडिया पर एक महिला यात्री और एचआरटीसी ड्राइवर के बीच विवाद का वीडियाे वायरल हाे रहा है। उक्त महिला चालक काे सीट देने के लिए कह रही हैं, जबकि चालक 50 फीसदी सवारियाें के नियम उन्हें समझा रहा है।
चल रही सिर्फ 25 टैक्सियां
शिमला में करीब 25 टैक्सियां चल रही हैं। जिनमें 11 इलेक्ट्रिक टैक्सियां समरहिल, संजौली, भट्टाकुफर, विकासनगर, कसुम्पटी, न्यू शिमला, टुटू, सचिवालय को चल रही हैं।
ईटीएम से मिलेंगे अब टिकट
एचआरटीसी की टैक्सियों में यात्रियों से मनमाने किराए की वसूली नहीं हो सकेगी। टैक्सियों में यात्रियों को ईटीएम (इलेक्ट्रानिक टिकटिंग मशीन) से टिकट दिए जाएंगे। सभी टैक्सियां जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) से लेस होंगी। यात्रियाें काे अगर टिकट नहीं मिलता है ताे वे इसकी शिकायत एचअारटीसी प्रबंधन से कर सकते हैं।
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