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कोरोना से राहत:आईजीएमसी और डीडीयू में 60 फीसदी खाली हुए काेराेना बेड; अभी 1047 एक्टिव केस, मई में 5000 पहुंच गया था आंकड़ा

शिमला4 महीने पहले
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  • ठीक होकर जाने लगे मरीज वहीं संक्रमण कम हाेने से मरीजों का आना भी घटा
  • डीडीयू में 51, आईजीएमसी में 109 मरीज भर्ती हैं अभी

15 मार्च के बाद जिला में काेराेना संक्रमण तेजी से फैलने लगा था। अप्रैल माह माह की शुरूआत तक जिला में राेजाना 100 से अधिक काेराेना मरीज आने लगे, जाे मई की शुरूआत तक 250 से ज्यादा पहुंच गए थे। यही नहीं मई माह में माैताें का आंकड़ा भी काफी तेजी से बढ़ा और पूरे माह में 210 लाेगाें की माैत हाे गई।

काेराेना संक्रमण के बढ़ते मामलाें ने विभाग काे भी परेशानी में डाल दिया था। मगर जून माह के आते ही काेराेना का असर कम हाेने लगा है। राहत की बात यह है कि बीते एक सप्ताह में जिला से सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी और डीडीयू में 60 फीसदी तक बेड अब खाली हाे चुके हैं। इसका कारण यह है कि अब संक्रमित मरीज कम आ रहे हैं, जबकि रिकवरी रेट ज्यादा हाे रही है।

इससे काफी राहत मिली है। डीडीयू अस्पताल में अब केवल 51 के करीब मरीज रह गए हैं, जबकि आईजीएमसी में भी 109 मरीज ही एडमिट हैं। अन्य मरीजाें काे यहां से रिकवर हाेने के बाद छुट्टी दे दी गई है। रविवार तक जिला शिमला में 1047 एक्टिव केस रहे गए हैं, जबकि मई माह में यह 5000 पहुंच गए थे। अब रिकवरी रेट भी ज्यादा है। राेजाना 100 से ज्यादा मरीज ठीक हाे रहे हैं।

कहां, कितने बेड

प्रशासन ने सबसे ज्यादा बेड आईजीएमसी अस्पताल में लगाए हैं। यहां पर 305 बेड काेराेना मरीजाें के लिए लगाए गए हैं, जबकि डीडीयू अस्पताल में माैजूदा समय में 140 बेड हैं। हालांकि डीडीयू अस्पताल में केवल 90 बेड की क्षमता थी। मगर मई माह में जब काेराेना मरीज लगातार बढ़ते गए ताे यहां पर बेड की संख्या बढ़ानी पड़ी, यहां पर कमराें के बाहर गैलरी में भी 40 के करीब बेड लगाने पड़े। इसी तरह आईजीएमसी में भी शुरूआत में 125 बेड लगाए गए थे, जाे बाद में मरीजाें की बढ़ती संख्या काे देखते हुए 305 तक पहुंचाने पड़े थे।

काेराेना के लिए करने पड़े कई अस्पताल एक्वायर

मई माह में जब काेराेना पीक पर था ताे यहां पर प्रशासन की चिंता बढ़ गई थी। इसके लिए प्रशासन ने आईजीएमसी, डीडीयू के अलावा आयुर्वेदिक अस्पताल छाेटा शिमला, वाॅकर अस्पताल समेत कई निजी अस्पतालाें काे भी एक्वायर कर दिया था। यहां पर ऑक्सीजन की व्यवस्था भी कर दी थी। कई दिन यहां पर मरीज भी रखे गए। मगर अब इन अस्पतालाें में भी मरीजाें की संख्या काफी कम हाे गई है। अगर यही रफ्तार रही ताे इस माह में इन अस्पतालाें में मरीजाें का आंंकड़ा शून्य हाे जाएगा।

मई में हुई सबसे ज्यादा माैतेंं

बीते वर्ष काेराेना का पहला मामला मई माह में आया था। उसके बाद सालभर काेराेना के मरीज आते रहे, इसमें माैतें भी हुई। में एक साल में मई माह काेराेना मरीजाें के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक रहा। मई माह में ही सबसे ज्यादा 210 मरीजाें की माैत हुई। इसके लिए कनलाेग में अलग से तीन शैड भी तैयार करने पड़े।

इससे पहले अप्रैल माह में 150 के करीब लाेगाें की जान काेराेना गई थी, जबकि बीते वर्ष में दिसंबर तक 180 के करीब लाेगाें की माैत हुई थी। वहीं मामले भी मई माह में सबसे ज्यादा आए हैं। जिला शिमला में 4000 से ज्यादा मरीज मई माह में ही आए।

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