कोरोनाकाल:आईजीएमसी बना मरीजों के लिए मददगार, पीजीआई में भी बंद है कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी, अब यहां पहुंच रहे मरीज

शिमला6 महीने पहले
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  • हर जगह स्वास्थ्य सेवाएं हैं प्रभावित लेकिन इस घड़ी में कैंसर अस्पताल बना जरूरतमंदों का मददगार

कोरोनाकाल में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। कई बड़े अस्पतालों में कोविड केयर सेंटर बना दिए गए हैं। जहां कोविड मरीजों का इलाज चल रहा है। बड़े अस्पतालों में भी इस समय कोविड मरीजों के इलाज को ही प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मगर मुसीबताें में आईजीएमसी शिमला का कैंसर अस्पताल मरीजाें के लिए मददगार साबित हाे रहा है। कैंसर अस्पताल शिमला में प्रदेश ही नहीं बल्कि बाहरी राज्याें चंडीगढ़, दिल्ली तक के कैंसर मरीज कीमाेथैरेपी और रेडियाेथैरेपी के लिए आ रहे हैं। 35 से 40 लोगों की रेडियोथैरेपी और लगभग 35 लोगों की कीमोथैरेपी चल रही है।

सभी जगह हुई कीमाेथैरेपी बंद

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े आईजीएमसी शिमला, टांडा मेडिकल कॉलेज में कैंसर मरीजों का इलाज किया जाता है। इसके साथ ही नेरचौक मेडिकल कॉलेज में कैंसर मरीजों की कीमोथैरेपी की जाती है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा की सीमा से सटे इलाकों के लोग पीजीआई चंडीगढ़ के अलावा दिल्ली एम्स में कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी के लिए जाते हैं।

लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के बीच पीजीआई चंडीगढ़, एम्स में कीमोथेरेपी या दूसरे निजी अस्पतालों में कीमोथेरेपी बंद हो चुकी है। हिमाचल के बाहर भी कई अस्पतालों में कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी मरीजों को दी जाती है। हिमाचल के साथ-साथ बाहरी राज्याें में कीमाेथैरेपी बंद है। ऐसे में यहां कैंसर के मरीजों की कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी नहीं हो पा रही है।

क्या कहते हैं मरीज

चंबा निवासी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी की कीमाेथैरेपी हाेनी थी, पीजीआई में बंद हाेने के कारण वह टैक्सी करके शिमला के लिए आए हैं। यहां पर उनकी पत्नी की कीमाेथैरेपी की गई। इसी तरह चंडीगढ़ से भी मरीज यहां पर कीमाेथैरेपी के लिए पहुंच रहे हैं। राेजाना बाहरी राज्याें से 5 से 8 मरीज शिमला कैंसर अस्पताल में कीमाेथैरेपी या रेडियाेथैरेपी के लिए पहुंच रहे हैं। आईजीएमसी केवल एकमात्र अस्पताल है, जहां पर कैंसर मरीजाें काे इलाज जारी है।

सामान्य ओपीडी भी चल रही है

आईजीएमसी जहां एक ओर कैंसर मरीजाें के लिए इलाज दे रहा है, वहीं यहां पर सामान्य ओपीडी भी पहले की तरह चल रही है। जबकि इससे पहले बीते वर्ष काेराेना में भी यहां सामान्य ओपीडी बंद नहीं की गई। पीजीआई और एम्स समेत कई बड़े अस्पतालाें और मेडिकल कालेजाें ने जब ओपीडी के लिए मना कर दिया था ताे भी आईजीएमसी ने यहां पर सामान्य ओपीडी जारी रख कर मरीजाें काे सेवाएं दी।

आजकल भी आईजीएमसी में राेजाना 500 से ज्यादा ओपीडी हाे रही है। जिसमें मरीज अपना इलाज करवा पा रहे हैं। आईजीएमसी ही प्रदेश का एकमात्र ऐसा मेडिकल कालेज है, जहां अभी तक मरीजाें और काेराेना मरीजाें का इलाज एकसाथ चलता रहा है।

25 प्रतिशत तक बढ़ी ओपीडी

आईजीएमसी में कैंसर विभाग के एचओडी मनीष गुप्ता ने कहा कि इलाज के लिए मरीज हिमाचल के बाहर नहीं जा पा रहे हैं। इसके साथ ही नेरचौक मेडिकल कॉलेज को कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। इसके कारण लोग वहां जाने से डर रहे हैं। टांडा मेडिकल कॉलेज से भी मरीजों को यहां भेजा गया है।

टांडा से अब तक कीमोथैरेपी के लिए 10 और रेडियोथैरेपी के लिए 15 मरीज ही उनके पास पहुंचे हैं। ऐसे में उनके यहां ओपीडी 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है। टांडा से रेफर किए गए मरीज भी यहां पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों को कोरोना कर्फ्यू के बीच आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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