कोरोना काल / आईजीएमसी में काेराेना पेशेंट्स के लिए बनेगी अलग ओटी, हर संदिग्ध पेशेंट का ऑपरेशन इसी ओटी में किया जाएगा

IGMC to have separate OT for Carena patients, operation of every suspected patient will be done in this OT
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IGMC to have separate OT for Carena patients, operation of every suspected patient will be done in this OT

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 08:28 AM IST

शिमला. (सोमदत्त शर्मा) सेब सीजन के दौरान अगर काेई दुर्घटना हाेती है और मरीज काे तुरंत ऑपरेशन की जरूरत हाेगी, ताे उसका ऑपरेशन अब सामान्य ओटी में नहीं हाेगा। इसके लिए आईजीएमसी प्रशासन अगल से ऑपरेशन थियेटर तैयार कर रहा है। आईजीएमसी के पुरानी बिल्डिंग के ई ब्लाॅक में यह ओटी बनाई जा रही है। इसी में अब हर काेराेना संदिग्ध का ऑपरेशन किया जाएगा। इसके अलावा सामान मंगवा दिया गया है।
दाे सप्ताह में ओटी काम करना शुरू कर देगी। मकसद इसका सिर्फ यह है कि सेब सीजन के दाैरान दुर्घटनाएं बढ़ जाती है। ऐसे में दुर्घटना पीड़ित काे तुरंत ऑपरेशन की जरूरत रहती है। काेराेना सैंपल लेने के बाद भी ज्यादा इंतजार नहीं किया जा सकता है। अगर सामान्य ओटी में ऑपरेशन करेंगे और बाद में मरीज पाॅजीटिव आता है ताे पूरी ओटी काे बंद करना पड़ेगा। लिहाजा अब प्रशासन अलग ओटी हाेने से मैन ओटी काे बंद करने की जरूरत नहीं रहेगी और अन्य मरीजाें के ऑपरेशन भी चलते रहेंगे।

 सेब सीजन के दौरान बढ़ते हैं सड़क हादसे, चालकों को कोरोना का ज्यादा खतरा

सेब सीजन के दाैरान दुर्घटनाएं 15 से 20 फीसदी तक बढ़ जाती है। सेब काे बाहरी राज्याें में भेजा जाता है ताे चालकाें काे काेराेना हाेने का डर बना रहेगा। ऐसे में अगर दुर्घटना हाेती है ताे चालक काे कई बार इमरजेंसी में ऑपरेशन की जरूरत हाेती है। हालांकि काेराेना की रिपाेर्ट 45 मिनट में आ जाती है, मगर तब तक ऑपरेशन का इंतजार नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्रशासन अब रिपाेर्ट आने से पहले भी अलग ओटी में ऑपरेशन शुरू कर सकेंगे।

फायदा ये भी: रिपोर्ट का नहीं करना पड़ेगा इंतजार, चल सकेगा मरीजों का ऑपरेशन
मरीजाें काे अलग बनी ओटी में  शिफ्ट करने का एक फायदा ये भी है कि जब तक रिपाेर्ट आएगी तब तक मरीज का ऑपरेशन भी चलता रहेगा और मरीज की जान बचाना आसान हाे जाएगा।  

  • मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आदेश के बाद आईजीएमसी में काेराेना संदिग्धाें के लिए अलग से ई ब्लाॅक में ओटी तैयार की जा रही है। सेब सीजन में दुर्घटनाएं बढ़ जाती है, इसमें ज्यादात्तर चालक घायल हाेते हैं और वही सबसे ज्यादा काेराेना संदिग्ध हाेते हैं। अब अगर इमरजेंसी में किसी काे ऑपरेशन की जरूरत हाेगी ताे उसे इस ओटी में ही तुरंत शिफ्ट कर दिया जाएगा। रिपाेर्ट आने से पहले ही मरीज का ऑपरेशन कर दिया जाएगा। इससे अब सामान्य ओटी प्रभावित नहीं हाेगी। डाॅ. राहुल गुप्ता कार्यकारी डिप्टी एमएस, प्रशासनिक अधिकारी आईजीएमसी शिमला

सामान्य ओटी में रहती है भीड़

आईजीएमसी में प्रदेशभर से मरीज आते हैं। सामान्य ओटी में राेजाना 55 से 60 ऑपरेशन हाेती है। इमरजेंसी में अलग से ऑपरेशन किए जाते हैं। ऐसे में अगर यहां पर काेराेना मरीज का ऑपरेशन हाेता है ताे ओटी काे बंद करना पड़ेगा। जिससे ऑपरेशन रूक जाएंगे। ऐसे में अब प्रशासन अलग से ओटी तैयार करके यहां पर आसानी से बिना किसी रूकावट के ऑपरेशन कर सकेंगे। इसके अलावा सामान्य ओटी ट्रामा वार्ड के साथ है, जिसमें अन्य लाेगाें के संक्रमित हाेने का भी डर बना रहता है। ई ब्लाॅक आईजीएमसी से अलग है। यहां पर मरीज की आवाजाही भी नहीं रहती।

प्रशासन ने ट्राई रूम भी अलग किया 
प्रशासन ने इससे पहले ट्राई रूम काे भी अलग किया है। यह ट्राई रूम नए ओपीडी ब्लाॅक में बनाया गया है। इसमें इमरजेंसी में आने वाले हर मरीज काे यहीं रखा जाता है। उनकी रिपाेर्ट आने के बाद ही उन्हें ओटी में शिफ्ट किया जाता है। मगर अब मरीजाें काे ओटी में आसानी से शिफ्ट किया जा सकेगा। 

कोराेना को लेकर शिमला की स्थिति: अब तक कुल 40 केस

कोरोनावायरस को लेकर हालांकि शिमला अभी तक कई अन्य जिलों से बेहतर स्थिति में है। जिले में कोरोनावायरस के अब तक कुल 40 केस सामने आ चुके हैं,इनमें से 20 एक्टिव केस हैं। 17 मरीज ठीक हो चुके हैं, और 2 लोगों की मौत हो चुकी है। केस बढ़ने की संभावनाओं को देखते हुए प्रशासन ने अस्पतालों में व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है, इसी के तहत ये कदम उठाया गया है।

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