नगेईक ने जीती स्टेट ठोडा चैम्पियनशिप:फाइनल में किशोर ठोडा दल को 7 अंकों से हराया, 48 टीमों ने लिया भाग

शिमला7 महीने पहले
स्टेट ठोडा चैम्पियनशिप में ठोडा दल।

हिमाचल के शिमला के ठियोग क्षेत्र के देहा-बलसन में राज्य स्तरीय टूर्नामेंट ठोडा प्रतियोगिता संपन्न हो गई है। फाइनल मुकाबला किशोर और नगेईक बलसन के बीच खेला गया। इसमें नगेईक बलसन ने किशोर ठोडा दल को 6 अकों से पराजित किया। जीतने वाले ठोडा दल को दो लाख रुपए प्रथम पुरस्कार, दूसरे नंबर रहे ठोडा दल को डेढ़ लाख रुपए का नकद ईनाम दिया गाय। छबराल और पराली घूंड को संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर विजेता घोषित किया गया।

तीन दिन खेली गई इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर के 48 ठोडा दल ने शामिल हुए। इस टूर्नामेंट का आयोजन हिमाचल प्रदेश ठोडा महासंघ द्वारा करवाया गया। महासंघ के अध्यक्ष एवं चौपाल के विधायक बलवीर वर्मा ने विजेता टीम को बधाई दी और सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। उन्होंने बताया कि ठोडा खेल को नई पहचान देने के लिए यह टूर्नामेंट मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने कहा कि ठोडा केवल खेल नहीं बल्कि लोगों को महाभारत की याद दिलाता है। दरअसल, कौरव-पांडव युद्ध से प्रेरित होकर यह खेल वास्तव खेला जाता है। इसे धनुष-बांण से खेल पारंपरिक वाद्य यंत्रों की झंकार के साथ खेला जाता है। प्रदेशभर से देहा-बलसन आए ठोडा प्रेमियों ने लोगों ने तीन दिन तक इस खेला का आनंद उठाया।

कौरव और पांडवों का नेतृत्व करते हैं ठडोरी

आमतौर पर पहाड़ों में लगने वाले 'बिशु' मेला में यह खेल शाठी और पाशी के बीच खेला जाता है, यानी ठोडा योद्धाओं में एक दल पाशी यानी 5 पांडव और दूसरा दल शाठी यानी 100 कौरवों का नेतृत्व करता है। शाठी दल कभी भी दूसरे शाठी के खिलाफ और पाशी दल कभी भी दूसरे पाशी के खिलाफ नहीं खेलता, लेकिन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शाठी और पाशी सभी आपस में भिड़ रहे हैं।

खेल के नियम

दोनों दलों के खिलाड़ी बारी-बारी प्रतिद्वंदी टीम के खिलाड़ी के घुटने के नीचे वार धनुष-बाण से करते हैं। घुटने के ऊपर अगर तीर लग जाए को उस खिलाड़ी को आउट माना जाता है। तीर से भयंकर पीड़ा होने के बावजूद ठोडा दल इसे बड़े चाव से खेलते हैं।

ऐसे होता है बचाव

खिलाड़ी पूरी टांग में ऊन से बना पजामा पहनते हैं। घुटने से नीचे इसे ज्यादा फोल्ड किया जाता है, ताकि तीर लगे तो चोट न पहुंचे। पैर में मोटा चमड़े का जूता पहना जाता है।

तीर लगने पर ललकारता है ठडोरी

लोक संगीत की मधुर धुनों के साथ ठोडा खेल चलता है। इससे निरंतर जोश कायम रहता है। इसे खेलने वाले को ठडोरी कहा जाता है। जब कोई ठडोरी अपने प्रतिद्वंदी की टांग पर घुटने से नीचे तीर मारता तो वह अपनी बोली में उसे ललकारता है। यह दृश्य सबको मंत्रमुग्ध कर देता है।