आध्यात्मिकता से भारत बनेगा विश्व गुरु:राज्यपाल बोले- 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता के बाद नहीं किया आध्यात्मिक शक्ति पर कार्य

शिमला19 दिन पहले
ओम शांति भवन सुन्नी में कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करते राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर।

हिमाचल के शिमला स्थित प्रजापिता ब्रह्मा कुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सुन्नी सेवा केंद्र द्वारा ओम शांति भवन में चतुर्थ वार्षिक आध्यात्मिक उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। संस्था के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से कार्यकारी सचिव डॉ. BK मृत्युंजय, ब्रह्मचारिणी राजयोगिनी BK शिविका, वरिष्ठ राजयोगी BK प्रकाश भी शामिल रहे।

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने आध्यात्मिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश विश्व गुरु रहा है, परंतु हमारी आध्यात्मिक शक्ति पर आघात करने का प्रयास किया गया है। वर्ष 1947 में देश को राजनीतिक स्वतंत्रता तो मिली, मगर उस समय के राजनेताओं ने आध्यात्मिक शक्ति पर कार्य नहीं किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता से ही भारत विश्व गुरु बनेगा।

भारत से कभी भी कोई शस्त्र लेकर भूमि जीतने नहीं गया। भारत विश्व की महासत्ता नहीं चाहता, बल्कि विचारों से, भावना से, प्रेम से, प्रेरणा से हृदय जीतने वाला विश्व गुरु बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने दुष्ट शक्तियों का विनाश करके स्वर्णिम लंका को जीतने के बाद भी वापस लौटा दिया।

क्योंकि उनका मानना था कि 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। वहीं, विवेकानंद ने विदेश में जाकर भारतीय सनातन परंपरा और संस्कृति का ज्ञान सबके समक्ष रखा।

1937 से इस आध्यात्मिक शक्ति को लेकर आगे बढ़ रहे

इसी परंपरा में ब्रह्मा कुमारीज संस्था ने 1937 से इस आध्यात्मिक शक्ति को लेकर आगे बढ़ने का यज्ञ देश में ही नहीं बल्कि विश्व के 147 देशों में चल रहा है। उन्होंने ब्रह्मा कुमारीज सुन्नी सेवा केंद्र की संचालिका बहन शकुंतला द्वारा सुन्नी क्षेत्र के 100 गांव में चलाए जा रहे व्यसन मुक्ति कार्यक्रम की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान महामहिम द्वारा समाज सेवा के कार्यों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्था के सदस्यों को प्रशंसा पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सुन्नी क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों सहित 100 गांवों के लगभग 800 भाई -बहन उत्सव मे शामिल हुए।