किन्नौर में टल सकती थीं 16 मौतें:रेस्क्यू के बाद लोगों ने सुनाई आपबीती; पासिंग के लिए हो रही बहस के कारण वाहनों की कतारें लग गई थीं, तभी चट्‌टान गिर गई

किन्नौर4 महीने पहले
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हिमाचल प्रदेश में किन्नौर के निगुलसरी में हुए दर्दनाक हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई। बचाए गए लोगों ने बताया कि राहगीरों के बीच बहसबाजी हो रही थी। इस वजह से वाहनों की कतार लग गई। उस वक्त छोटे-छोटे पत्थर गिर रहे थे। अगर वाहन समय रहते निकल जाते तो हादसा टल सकता था और इतनी जिंदगियां बच जातीं। बुधवार दोपहर नेशनल हाईवे 5 पर ऊपर से चट्टानें गिरने से कई वाहन मलबे में दब गए थे।

बस को तलाशने में गलत अनुमान लगाया गया
बताया गया कि बहसबाजी कर रहे लोगों ने ऊपर से गिर रहे पत्थरों को नजरअंदाज किया। फिर अचानक ही चट्‌टान गिर गई। राहत और बचाव कार्य में जुटे जवानों से निगम की बस को तलाशने में भी चूक हुई है। जब सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया, तब यही माना गया कि बस सड़क पर ही मलबे के नीचे हो सकती है, लेकिन जैसे-जैसे मलबा हटाते गए बस का कोई सुराग नहीं लगा।

बाद में पता चला कि बस मलबे के साथ खाई में गिर गई है। गुरुवार सुबह 5 बजे के करीब बस के टुकड़े खाई में मिले। अपनों की तलाश में घटनास्थल पर पहुंचे लोगों का कहना है कि अगर सर्च ऑपरेशन सड़क के नीचे भी चलाया जाता तो सब मिल जाते।

बाकी शवों को निकालना आसान नहीं
जिस तरह से सड़क से मलबा हटाकर पहाड़ी के नीचे फेंका गया, उससे किसी के बचने की उम्मीद ही नहीं रही। वहीं कुछ के शव शायद मलबे के नीचे दब गए हों। ऐसे में अब इन शवों को यहां से बाहर निकालना आसान नहीं होगा।

बचाव अभियान में जुटे ITBP के जवान और NDRF की टीम।
बचाव अभियान में जुटे ITBP के जवान और NDRF की टीम।

पिता का धड़ मिला, सिर नहीं मिला
घटनास्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन की पोल खोलने वाले और सरकार के तमाम प्रयासों की आलोचना करने वाले लोकेंद्र सिंह वैदिक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि उनके पापा की बॉडी मिल गई है, लेकिन सिर नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया था कि शिमला की तरफ से सर्च ऑपरेशन 5 से 6 घंटे की देरी से शुरू हुआ।

राज्य सरकार इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को चार-चार लाख रुपए और गंभीर घायलों को 50-50 हजार रुपए देगी। वहीं, परिवहन विभाग इस हादसे में जान गंवाने वाले बस यात्रियों को एक-एक लाख रुपए देगा।