वन विभाग फेल:लोगों की जान ले रहा तेंदुआ, विभाग के पास सिर्फ बंदर पकड़ने वाले पिंजरे; आज तक नहीं बना कोई एक्शन प्लान

शिमलाएक महीने पहले
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तेंदुए की लोकेशन ट्रेस करने के लिए डाउनडेल के आसपास जंगलों में कैमरे लगाए जा रहे हैं। - Dainik Bhaskar
तेंदुए की लोकेशन ट्रेस करने के लिए डाउनडेल के आसपास जंगलों में कैमरे लगाए जा रहे हैं।

शहर में तेंदुए के खाैफ में लाेग जी रहे हैं, जबकि वन विभाग और वाइल्ड लाइफ विंग के अफसर फील्ड में जाने के बजाए सीट पर बैठकर काम कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि बंदर काे पकड़ने वाले पिंजरे में कहां तेंदुआ फंसेगा। दाे बच्चाें की माैत के बाद भी वन विभाग नहीं जागा है। आखिर तेंदुए काे आदमखाेर क्याें घाेषित नहीं किया जाता है। शहर के लाेगाें ने बार-बार वन विभाग काे सलाह भी दी है कि वह उन जगहाें पर जालियां और ऊंची दीवार बनाए, जहां पर तेंदुए का ज्यादा खतरा है।

इसके बावजूद लाेगाें की सुरक्षा के लिए काेई काम नहीं हुआ है। बीते वीरवार देर शाम काे डाउनडेल में दाे बच्चे अपने घर के बाहर फूलझड़ी चला रहे थे, इसी बीच तेंदुआ एक बच्चे काे उठा ले गया। इसके बाद चलाए गए सर्च अभियान के दाैरान बच्चे के क्षत विक्षत शव के टुकड़े जंगल में मिले थे। परिवार के लाेगाें ने इसकी पहचान की थी। तब से लेकर अब तक तेंदुए काे पकड़ने का काेई एक्शन प्लान नहीं बनाया गया है। सिर्फ जंगल में नाइट विजन कैमरें लगाए गए हैं।

लोगों के पालतू जानवर तक खा गया है तेंदुआः शिमला और आसपास की एक दर्जन पंचायताें से जानवराें काे तेंदुआ आए दिन उठ ले जाता है। लाेगाें का कहना है कि ये आम बात हाे गई है कि रिहायशी इलाकाें में पहुंच कर कुत्ताें और जानवराें काे तेंदुआ अपना शिकार बना लेता है। लाेगाें की शिकायत पर भी वन विभाग काेई कार्रवाई नहीं करता है। महज पिंजरा लगाकर औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती हैं।

जो वन विभाग बंदर नहीं पकड़ सकता वो तेंदुआ क्या पकड़ेगाः शिमला शहर की बात करें ताे यहां पर कुछ समय पहले बंदराें काे पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए गए थे। इन पिंजराें में बंदर भी नहीं पकड़े जा सके। इसलिए लाेग सवाल उठाते हैं कि जाे वन विभाग बंदर नहीं पकड़ सकता, वाे तेंदुआ क्या पकड़ेगा। कुछ महीने पहले कृष्णानगर में पालतु कुत्ते का शिकार करने आए तेंदुए ने घर में घुसकर एक युवक को लहूलुहान कर दिया था।

नई तकनीक के पिंजरे हों तो पकड़ा जाए तेंदुआ: वन विभाग की हालत ये है कि जिस पिंजरे से बंदर पकड़े जाते हैं, उन्हीं पिंजराें का इस्तेमाल वन विभाग तेंदुए काे पकड़ने के लिए इस्तेमाल करता है। जंगलाें में पिंजरे लगाए जाते है, ये महीना-महीना पड़े रहते हैं, लेकिन इसमें कभी भी तेंदुआ कैद नहीं हुआ। ऐसे में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते है, कि इन पिंजराें काे नई तकनीक के जरिए क्याें नहीं लगाया जाता है।

राजधानी के हर हिस्से में तेंदुआ, सिर्फ वन विभाग को नहीं दिखता
शहर के हर हिस्से में तेंदुआ मिल चुका है। चायली, गिरव, समरहिल, भराड़ी, दूधली, नवबहार, जाखू, बड़श, कनलाेग, विकासनगर, समिट्री, कनलोग, खलीनी और फागली और शहर के अन्य उपनगराें में भी तेंदुआ लाेगाें काे मिलता रहता है। ऐसे में लाेगाें में हर बार डर सताता रहता है कि वह घर के बाहर कैसे निकलें। अधिकतर लाेग प्राइवेट जाॅब करते हैं, ऐसे में उन्हें देर रात कार्यालय से घर काे जाना पड़ता है।

लोगों की जानें मुश्किल में, सोया है वन विभाग
शहर में रहने वाले और एचपीयू के स्टूडेंट अमित कुमार का कहना है कि लाेगाें की जान मुश्किल में है, जबकि वन विभाग साेया हुआ है। लाेगाें की सुरक्षा के लिए काेई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अफसर एसी कमराें से आदेश देते हैं। जबकि फील्ड पर कुछ नजर नहीं आता है। इस तेंदुए काे आदमखाेर क्याें घाेषित नहीं किया जाता है।

वन विभाग के पास काेई प्लान नहीं
समरहिल के रहने वाले नितिश का कहना है कि वन विभाग के पास तेंदुए काे पकड़ने के लिए काेई प्लान नहीं है। लाेगाें की सुरक्षा की इनकाे काेई चिंता नहीं हैं। तेंदुआ बच्चाें पर हमला कर रहा है, जबकि ये सिर्फ कमराें के अंदर प्लान बना रहे हैं, जाे प्लान बन रहा है उसका भी काेई फायदा नहीं हाे रहा है। ऐसे में लाेगाें की सुरक्षा की काेई जिम्मेवारी नहीं ले रहा है।

और हमला हुआ ताे विभाग पर केस हाे
शहर में रहने वाले गाैरव सिंह का कहना है कि अगर तेंदुए ने अब किसी पर हमला किया ताे वन विभाग और वाइल्ड लाइफ विंग पर केस हाेना चाहिए। क्याेंकि, जंगली जानवराें से सुरक्षा दिलाना इनकी जिम्मेवारी है। इस जिम्मेवारी काे ये नहीं निभा पा रहे हैं। अब अगर लाेगाें पर हमला किया ताे पुलिस वन विभाग पर केस दर्ज करें।

हम दिन रात तेंदुए की तलाश में लगे हुए हैं। हमारे सभी अफसर फील्ड में काम कर रहे हैं। तेंदुए काे आदमखाेर घाेषित करने के लिए कई तरह के सबूत चाहिए हाेते हैं। इसलिए कैमरे भी जंगल में लगाए गए हैं। हम काेशिश कर रहे है कि तेंदुए काे पकड़ लें। लाेगाें की सुरक्षा के लिए हम प्रयासरत हैं। लाेगाें काे कहा गया है कि वे रात के समय बच्चाें का पूरा ध्यान रखें। अजय श्रीवास्तव, प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर (पीसीसीएफ), वन विभाग

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