पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

व्यापारियाें का निगम प्रशासन पर आराेप:मेयर के बेटे का है जिम, कैमिस्ट्स के साथ जिम्स के कूड़ा बिल माफ से व्यापारी नाराज

शिमलाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • कहा- निगम प्रशासन अपने चहेतों काे पहुंचा रहा है फायदा
  • सवालः एफसीपीसी की बैठक में बाकी व्यापारियों को राहत क्यों नहीं

नगर निगम की ओर से एफसी-पीसी की बैठक मेें कूड़े के बिल माफ करने और बिल में संशाेधन करने काे लेकर विवाद हाे गया है। अब व्यापार मंडल शिमला और राजनीतिक संगठन ने इसका विराेध किया है। इनका आराेप है कि नगर निगम की मेयर का खुद के बेटे का भी जिम है, इसलिए जिमखाने के भी बिल माफ किए जा रहे हैं।

आराेप है कि नगर निगम प्रशासन ने सिर्फ कैमिस्ट और जिमखाने के बिल ही माफ करने का प्रस्ताव तैयार किया है। जबकि अन्य व्यापारियाें और कर्मिशियल दुकानाें का बिल माफ करने की काेई याेजना नहीं बनाई है। हालांकि, अभी कूड़े के बिल काे माफ करने का प्रस्ताव नगर निगम के हाउस में जाएगा। जबकि इससे पहले ही इस पर विवाद हाे गया है।

शिमला की कैमिस्ट और जिम एसोसिएशन के पदाधिकारी कूड़े के बिलों को कम करने की मांग काे लेकर निगम के पदाधिकारियाें से मिले थे। जिसके बाद एफसीपीसी की बैठक में इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव रखा गया। दोनों एसोसिएशन की मांग है कि हाल ही में नगर निगम ने कूड़े के बिलों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, लेकिन इस बढ़ोतरी में उन पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।

कैमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि कूड़े के बिल सभी कैमिस्ट शाॅप एक समान नहीं है, जहां मालरोड, लोअर बाजार व आसपास के इलाकों में कैमिस्ट स्टोर को ज्यादा बिल चुकाना पड़ता है, तो वहीं शहर के उपनगरों में यह कूड़ा बिल काफी कम है। ऐसे में उन्हाेंने राहत मांगी थी।

कैमिस्ट शॉप तो खुली भी थी, बाकी बंद थी

व्यापार मंडल शिमला के महासचिव संजीव ठाकुर का कहना है कि जाे प्रस्ताव एफसी-पीसी की बैठक में लिया गया है, वह ठीक नहीं हैं। कैमिस्ट और जिम के बिल अगर माफ किए जाते हैं या फिर इसमें कटाैती की जाती है ताे अन्य व्यापारियाें काे भी ये राहत दी जाए।

उनका कहना है कि कैमिस्ट की दुकानें ताे खुली भी थी, जबकि अन्य व्यापारियाें की दुकानें बंद थी। इसके बावजूद दुकानदार कूड़े का पूरा बिल दे रहे हैं। इसके अलावा जिम में भी विशेष वर्ग काे फायदा पहुंचाया जा रहा है। वहीं, नगर निगम की मेयर सत्या काैंडल का कहना है कि ये अभी प्रस्ताव है, इसे मंजूरी हाउस देगा। इसके बाद ही इस पर कुछ फैसला लिया जाएगा।

अपना हित देख रहे, गरीबाें की काेई नहीं सुन रहा

संजय चाैहान माकपा नेता व पूर्व मेयर संजय चाैहान ने आराेप लगाया है कि नगर निगम अपना हित देख रहा है। अपने चहेताें काे फायदा पहुंचाने के लिए कैमिस्ट और जिमखाने के बिल ताे माफ किए जा रहे हैं, लेकिन जाे छाेटे और गरीब दुकानदार हैं, उनसे पूरे बिल लिए जा रहे हैं। कई दुकानदाराें की दुकानें बंद रही हैं, उनका काराेबार भी ठप रहा है। ऐसे में इनके बिल भी माफ किए जाएं। उनका कहना है कि अगर निगम ने सभी दुकानदाराें के बिल माफ नहीं किए ताे वे आंंदाेलन करेंगे।

व्यापारियाें काे नहीं मिल रहा है काेई फायदा

नगर निगम कूड़ा शुल्क के मासिक बिल जारी करता है। इसे जमा करने के लिए 30 दिन का समय मिलता है। इस अवधि के बाद शुल्क देने पर प्रतिमाह एक फीसदी की पेनल्टी लगाई जाती है। घरेलू उपभोक्ताओं का मासिक बिल 96 रुपए हैं। ऐसे में एक फीसदी के हिसाब से इनकी पेनल्टी एक रुपए से भी कम होती है। व्यावासायिक उपभोक्ता जिनके मासिक बिल हजारों रुपए हैं, उन्हें ज्यादा जुर्माना देना पड़ता है। काेराेना कफर्यू के दाैरान ज्यादातर दुकानें बंद रही है, इसके बावजूद भी कूड़े का बिल इन्हें देना पड़ रहा है।

शहर में 20 हजार दुकानें, उन्हें कोई राहत नहीं

शहर में लगभग 20 हजार से अधिक कमर्शियल दुकानें हैं। ऐसे में कराेड़ाें रुपए गारबेज बिल निगम काे आता हैं। जबकि निगम प्रशासन कुछ ही दुकानदाराें के कूड़े के बिल माफ करने की बात कर रहा है। शहर में कूड़ा उठाने के रेट भी बढ़ा दिए हैं। पहले 88 रुपए कूड़े के बिल थे, जिसे अब 98 रुपए किया गया है।

कई उपभाेक्ताओं काे अप्रैल के बाद अब कूड़े के बिल जारी किए गए हैं, उन्हें अब करीब 300 रुपए एक साथ बिल देना हाेगा। कई उपभाेक्ताओं ने कूड़े के बिल माफ करने की गुहार नगर निगम से लगाई, लेकिन निगम ने लोगों काे न केवल कूड़े के बिल जारी किए, बल्कि इसमें 10 फीसदी बढ़ोतरी भी की है।

खबरें और भी हैं...