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पंचायत चुनाव:दाे दिन के बाद नामांकन, अब बागियाें काे बिठाने के लिए जगह-जगह बैठकों का दाैर शुरू, भाईचारे की दे रहे दुहाई

शिमला2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • कई जगह एक ही गांव में खड़े हो गए हैं दो-तीन उम्मीदवार, वोट कटने का सताने लगा डर

पंचायत चुनाव नामांकन के दाे अब दाे दिन बचे हैं। 31 दिसंबर से पंचायताें के लिए नामांकन शुरू हाे जाएंगे। 2 जनवरी तक प्रत्याशी नामांकन कर सकेंगे। ऐसे में अब यह दाे दिन काफी अहम हाेने वाले हैं। पंचायत चुनाव काे लेकर अब बागियाें काे बिठाने काे लेकर पंचायत में बैठकाें का दाैर शुरू हाे चुका है। लगातार अब प्रत्याशी और उनके समर्थन उन बागियाें काे बिठाने की फिराक में लगे हैं।

जिनसे उन्हें सीधा नुकसान हाेने वाला है। काेई ना काेई लालच देकर बागियाें काे बिठाने का प्रयास किया जा रहा है। पंचायताें में जाे पहले प्रतिनिधि रह चुके हैं। उनके परिवार में अगर काेई चुनाव मैदान में उतर रहा है ताे उन्हें बिठाने काे लेकर भी लगातार दूसरे प्रत्याशी प्रयास कर रहे हैं, क्याेंकि उनसे अपनी हार का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। हालांकि इसमें ज्यादातर लड़ाई प्रधान पद के लिए हाे रही है। प्रधान बनने के लिए अब प्रत्याशी अपने सीधी टक्कर देने वालाें काे बिठाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

ऐसे बिगड़ता है खेल

पंचायत चुनाव में जीत के लिए सबसे अहम हाेता है अगर एक ही गांव से ज्यादा प्रत्याशी खड़े ना हाें। अगर एक गांव से दाे या तीन प्रत्याशी खड़े हाे जाते हैं ताे वह एक दूसरे की वाेट काट देते हैं, जिससे कि दूसरे गांव का प्रत्याशी फायदा उठा लेते हैं। ऐसे में बागी प्रत्याशी ही इसमें पूरा खेल बनाते और बिगाड़ते हैं।

एक ही बिरादरी या गांव से अगर दाे प्रत्याशी खड़े हाे जाएं ताे इसमें जिस प्रत्याशी की दावेदारी मजबूत हाे वह दूसरे प्रत्याशी काे बिठाने के लिए पूरी काेशिश करता है। अगर वह बागी प्रत्याशी काे बिठाने में सफल हाेता है ताे उसकी जीत भी मजबूत हाे जाती है।

इसलिए हाेता है पंचायत चुनाव अहम

पंचायत चुनाव में अपने ही परिवार से प्रत्याशी काे खड़े करने में काफी फायदा रहता है। इससे जहां अपनी क्षेत्र में व्यक्ति का दबदबा साबित हाेता है, वहीं उसकी राजनीतिक पकड़ भी अच्छी हाे जाती है। राजनीति में आने के लिए पंचायत चुनाव सबसे पहली सीढ़ी हाेती है।

यहां पर जाे प्रत्याशी जिला परिषद, बीडीसी, प्रधान, उपप्रधान पद पर हाेता है। स्थानीय नेताअाें की नजर भी उस पर रहती है। सरकार के बीच अपने काम निकलवाने के लिए भी पंचायत प्रतिनिधी माहिर हाे जाते हैं।

पहले ही कर दी थी तैयारियां शुरू

पंचायत चुनाव के लिए हालांकि अब प्रत्याशी खुलकर सामने आ गए हैं, मगर इसके लिए बिसात बिछाना काफी पहले ही उन्हाेंने शुरू कर दिया था। राेस्टर जारी हाेने से पहले ही प्रत्याशी साेशल मीडिया में एक्टिव हाे गए थे।

पाेस्ट डालकर कई प्रत्याशी अपने क्षेत्र में लाेगाें के बीच जाकर चुनाव लड़ने काे लेकर राय मांग रहे थे। जिससे उन्हें यह पता चल गया था कि उन्हें चुनाव में कितना समर्थन मिलेगा। जैसे ही राेस्टर जारी हुअा, उसके बाद उन्हें अपना दांव चल दिया और खुलकर सामने आ गए।

राेस्टर ने भी बिगाड़ा कइयाें का खेल

चुनाव लड़ने की फिराक में बैठे कई लाेगाें का राेस्टर ने इस बार खेल बिगाड़ा है। इस बार ज्यादातर सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। ऐसे में कई प्रत्याशी जाे पूरी तरह से चुनाव लड़ने काे तैयार थे, वह अब सीट रिजर्व हाेने के बाद बाहर हाे गए हैं।

हालांकि कइयाें ने अगर प्रधान पद के लिए सीट आरक्षित हाे गई है ताे वह अब बीडीसी या उपप्रधानी में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं या फिर अपने परिवार की महिला या अन्य सदस्य काे मैदान में उतार रहे हैं। मगर इसमें भी ज्यादा प्रतियोगिता रहती है।

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