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जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई:कुओं और बाेरवेलाें का पानी दूषित हाेने पर सीएस को नोटिस जारी, पाॅल्यूशन कंट्राेल बाेर्ड समेत कई अधिकारियाें से भी मांगा जबाव

शिमलाएक महीने पहले
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हाईकोर्ट ने नालागढ़ के ग्राम माजरा में स्थापित शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के कारण आसपास के क्षेत्रों के कुओं और बोरवेलों का पानी दूषित होने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रदेश मुख्य सचिव, सदस्य सचिव, राज्य पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उपायुक्त, सोलन को नोटिस जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने ये आदेश ग्राम माजरा के जोगिंदर सिंह द्वारा मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र पर संज्ञान लेने वाली जनहित याचिका पर ये आदेश पारित किए।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उक्त संयंत्र द्वारा ठोस कूड़े करकट को बिना उचित ढंग के मिट्टी के नीचे ढककर पिछले 15 वर्षों से जमीन में डाला जा रहा है.। समय बीतने के साथ पंचायत मजरा और आसपास के गांवों के प्राकृतिक स्रोतों, कुओं और बोरवेलों का पानी इस संयंत्र के रासायनिक द्रव्य से दूषित पानी के जमीन में रिसने से जहरीला हो गया है और इसके परिणामस्वरूप पानी से दुर्गंध आ रही है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ-साथ कई अन्य उच्च अधिकारियों को भी शिकायत की लेकिन आज तक ठोस प्रबन्धन संयंत्र कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है । यही नही जहरीले पानी की वजह से उनके मवेशियों की मौत हो रही है। ग्रामीण भी कई गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से आग्रह किया है कि शिवालिक ठोस प्रबंधन कम्पनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं ताकि उन्हें किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का सामना करने वाले खतरनाक प्रभाव से बचाया जा सके। मामले पर सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

याचिका-पंचायत को गुमराह कर लगाया गया था प्लांट
याचिकाकर्ता का आरोप है कि शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट गांव माजरा में पंद्रह साल पहले ग्राम पंचायत को गुमराह कर अनापति प्रमाण पत्र हासिल करने के बाद लगाया गया था। बाद में, जब शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाया गया, तो ग्रामीणों को पता चला कि प्रदेश के विभिन्न कारखानों के खतरनाक रासायनिक ठोस जहरीले कचरे को इस प्लांट में लाया जाना है। इस प्लांट में ठोस कूड़े को वैज्ञानिक तरीके से ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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