समस्या / अब दाे लाख स्टूडेंट्स पर पड़ेगा 18 फीसदी जीएसटी का बाेझ, प्रदेश के विभिन्न काॅलेजाें में बढ़ सकती है फीस

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  • पहले छात्राें काे जीएसटी से बाहर रखा गया था, लेकिन अब दायरे में

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:11 AM IST

शिमला. (जोगेंद्र शर्मा) प्रदेश भर के काॅलेजाें में पढ़ाई करने वाले करीब दाे लाख छात्राें काे अब फीस के साथ 18 फीसदी जीएसटी भी देना हाेगा। काॅलेजाें में इस नियम काे लागू कर दिया है। पहले छात्राें काे जीएसटी से बाहर रखा गया था। जबकि अब उन्हें जीएसटी देना हाेगा। ऐसे में काॅलेजाें में अब फीस बढ़ाेतरी हाे सकती है। इससे पहले एचपीयू ने अपने दूरवर्ती शिक्षण संस्थान इक्डाेल में ही फीस काे बढ़ाया था।

सरकार द्वारा नए सत्र से सरकारी काॅलेजाें से यूनिवर्सिटी को दी जाने वाली एफिलेशन, इंस्पेक्शन और कॉन्टिनुशन  फीस पर जीएसटी लगाया है। इस बार सरकार ने कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए आर्थिक संकट का बहाना लगाकर शिक्षा को अप्रत्यक्ष रूप से जीएसटी के दायरे में लाया है। ऐसे में काॅलेजाें ने साफ कर दिया है कि उनके पास फीस बढ़ाने के अलावा काेई विकल्प नहीं बचा है।

अब इसका असर काॅलेजाें में फीस वृद्धि के रूप में देखने को मिलेगा और हजारों छात्र आर्थिक तंगी के कारण लगातार महंगी हो रही उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। एचपीयू के रजिस्ट्रार घनश्याम चंद का कहना है कि सरकार का फैसला है, इसे मानना हाेगा। जाे हमें आदेश आए हैं, उसे हम लागू करवा रहे हैं।

25 मई से इन मांगाें काे लेकर प्रदर्शन करेगी एसएफआई 

  • शिक्षा में 18 फीसदी जीसटी की शर्त शीघ्र हटाई जाए।
  • सभी शिक्षण संस्थानों में सेनेटाइजर टनल का निर्माण करो।
  • सभी तरह की छात्रवृत्ति शीघ्र बहाल करो।
  • सरकार सभी छात्रों के तीन महीनों की फीस माफ करें। 
  • छात्रों के तीन माह के हाॅस्टल चार्जेज,कमरों के किराए सरकार अदा करे।
  • ऑनलाइन शिक्षण पद्धति को दुरुस्त करो।
  • सभी छात्रों  को राहत के रूप में विशेष भत्ता दिया जाए।
  • विवि में प्रवेश लेने वाले छात्रों का प्रवेश शुल्क माफ किया जाए।

अभी विराेध नहीं हाे सकता, इसलिए इस तरह का फैसला: एसएफआई 
छात्रा संगठन एसएफआई का कहना है कि प्रदेश सरकार भी इस बात को जानती है कि अभी सभी शिक्षण संस्थान बंद है। कोरोना महामारी के चलते सभी छात्र भी अपने घरों में है, ऐसे में छात्रो के द्वारा किसी विरोध की कोई गुंजाइश नही है। इसलिए सरकार गुपचुप तरीके से इस फैसले को लागू करना चाहती है। एसएफआई राज्य सचिव अमित ठाकुर का कहना है कि हम पिछले दाे महीने से कोरोना संकट के कारण पैदा हुई समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार से मांग कर रहे है कि नए शैक्षिणिक सत्र के शुरू होने से पहले सभी शिक्षण संस्थानों में छात्रों व कर्मचारियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। जबकि सरकार अब जीएसटी थाेपने में लगी है। कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए आर्थिक संकट ने प्रदेश के कामगारों, किसानों,बागवानों व छोटे दुकानदारों की कमर तोड़ दी है। 

कॉलेज प्रबंधकों के लिए भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें

कोरोना के इस संकट के दौरान कालेज प्रबंधन व छात्रों को लगा है। प्रदेश में अभी भी ऐसे दर्जनों कालेज हैं, जिन्होंने एफिलेशन फीस एचपीयू को नहीं दी है। पहले से ही एफिलेशन फीस न देने को लेकर कई कालेज बजट न होने की बात कर चुके हैं, लेकिन अब जब नए आदेशानुसार फीस के साथ जीएसटी वसलूने का फैसला ले लिया है, तो इससे सरकारी कालेजों की दिक्कतें बढ़ सकती है।

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