हाईकोर्ट ने कहा- लाेगों के जीवन को खतरे में डाला:फार्मेसी दुकान आवंटन मामले में अफसरों पर कार्रवाई के आदेश

शिमला9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के परिसर में फार्मेसी दुकान के आवंटन में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को चिकित्सा अधीक्षक-सह-सदस्य सचिव, रोगी कल्याण समिति, ऊना और मुख्य चिकित्सा अधिकारी-सह-सदस्य, रोगी कल्याण समिति, ऊना के खिलाफ कानून का उल्लंघन करने के लिए उचित कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने ऊना डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एलायंस (यूडीसीडीए), (हिमाचल प्रदेश सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एलायंस की एक इकाई) द्वारा दायर याचिका पर ये आदेश पारित किए।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2017 में रोगी कल्याण समिति क्षेत्रीय अस्पताल ऊना ने निविदाएं मंगाकर क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के परिसर में एक फार्मेसी की दुकान को एक लाख रुपये मासिक किराए पर आवंटित किया। तीन साल बाद 10% की वृद्धि के साथ एक लाख और दो लाख रुपये की सुरक्षा राशि जमा की जानी थी। लेकिन तीन साल बाद 18 मार्च 2020 को दुकान का आवंटन 9800 रुपये के मासिक किराए पर कर दिया गया।

किराए में वृद्धि के लिए भी कोई प्रावधान नहीं रखा गया और सबसे बढ़कर यह कि यह दुकान एक ऐसे व्यक्ति को आबंटन की गई जो फार्मासिस्ट भी नहीं है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि निविदा को बिना कोई नोटिस जारी किए या किसी समाचार पत्र या सोशल मीडिया में प्रकाशित किए प्रदान किया गया है। याचिका को स्वीकार करते हुए, अदालत ने निविदा के आबंटन को रद्द कर दिया और प्रतिवादी मुनीश कुमार को 20 अगस्त को या उससे पहले उपायुक्त ऊना को दुकान का खाली कब्जा सौंपने का निर्देश दिया।

ये पाया कोर्ट ने: न्यायालय ने पाया कि इतने उच्च मूल्य की निविदा के लिए प्रकाशन को उचित कवरेज दिया जाना चाहिए था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भाग लेने वाले बोलीदाता सरकार को उच्चतम दर की पेशकश करते, लेकिन उत्तरदाताओं ने जानबूझकर इस प्रक्रिया से परहेज किया है। कोर्ट ने कहा कि फार्मेसी की दुकान का टेंडर एक गैर-फार्मासिस्ट को देने के कार्य ने जनता के जीवन को खतरे में डाल दिया है।
न्यायालय ने यह भी पाया कि इसमें वित्तीय अनियमितता भी की गई है क्योंकि पिछले दौर में प्राप्त संपत्ति का किराया पहले तीन वर्षों के लिए 1,00,000/- रुपये प्रति माह था और इस बार यह राशि 9800/- प्रति माह वह भी बिना किसी सुरक्षा राशि जमा के और केवल तीन महीने के किराए के अग्रिम पर दे दी गई। यह न केवल उनके द्वारा की गई एक त्रुटि है, बल्कि एक वित्तीय अनियमितता है।

खबरें और भी हैं...