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रक्षाबंधन:रविवार सुबह 5 से शाम 6 बजे तक बांध सकते हैं राखी, इस बार नहीं है भद्राकाल, धनिष्ठा नक्षत्र के साथ शोभन योग का बन रहा शुभ संयोग

शिमला2 महीने पहले
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रक्षाबंधन को लेकर लोअर बाजार में राखी खरीदती युवतियां। - Dainik Bhaskar
रक्षाबंधन को लेकर लोअर बाजार में राखी खरीदती युवतियां।
  • ज्योतिर्विद मदन गुप्ता के अनुसार इस साल 22 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन श्रावण पूर्णिमा

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के त्योहार रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा का साया नहीं पड़ेगा। रक्षाबंधन का पर्व इस साल 22 अगस्त को धनिष्ठा नक्षत्र में मनाया जाएगा। ज्योतिर्विद मदन गुप्ता के अनुसार रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया नहीं पड़ने से पूरे दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध उनकी लंबी उम्र की कामना करेंगी। रविवार के दिन रक्षाबंधन पर धनिष्ठा नक्षत्र व शोभन योग के साथ श्रावणी पूर्णिमा होने से इस दिन की महत्ता और बढ़ गई है।

वहीं व्रत की पूर्णिमा 21 अगस्त को मनाई जाएगी। भाद्रपद मास में भी लगातार हिंदुओं के कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। इसलिए उपहारों की खरीद के लिए बाजारों में रौनक बढ़ी हुई है। इसके अलावा रक्षाबंधन को लेकर बाजार में राखी की दुकानें भी सज चुकी हैं। भद्रा रहित काल में राखी बांधने से सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा की नजर नहीं लगेगी। राखी बांधने के लिए पूर्णिमा के पूरे दिन को जानकारों ने अलग अलग तरीके से योग का निर्धारण कर अवधि को विभक्त किया है।

सावन की पूर्णिमा 21 अगस्त दिन शनिवार को शाम 6:10 से शुरू होगा जो 22 अगस्त रविवार को शाम पांच बजकर एक मिनट के बाद समापन होगा। रक्षाबंधन का त्योहार रविवार को हैं। बीते वर्ष काेराेना का असर काफी था ऐसे में बाजारों में राैनक न के बराबर थी। काराेबारियाें काे काेराेना की मार पड़ी थी।

ऐसे में बाजारों में दुकानदारों में रक्षाबंधन पर्व को लेकर मंदी होने से मायूसी थी, मगर इस बार काेराेना का असर काफी कम हुआ है। ऐसे में बाजारों में काफी भीड़ है। हालांकि अब काेराेना का खतरा बढ़ने लगा है। मरीजाें की संख्या में इजाफा हाे रहा है। आगामी दिनाें में अब काेराेना बढ़ सकता है।

राखी बांधने का शुभ समय : शुभ समय: 22 अगस्त सुबह 05:50 बजे से शाम 6:03 बजे तक। रक्षा बंधन के लिए दोपहर का उत्तम समय: 1:45 से 4:15 तक। राखी को पहले रक्षा सूत्र कहते थे। कलावा या मौली भी कहा जाता था। यह रक्षा सूत्र ही राखी में बदल गया। रक्षा सूत्र को बोलचाल की भाषा में राखी कहा जाता है जो वेद के संस्कृत शब्द ‘रक्षिका’ का अपभ्रंश है। मध्यकाल में इसे राखी कहा जाने लगा।
रक्षाबंधन भाई और बहन के अटूट प्रेम की निशानी का प्रतिक माना जाता है। इस दिन बहन भाइयों को राखी बांध कर अपनी रक्षा का वचन व उनकी लंबी उम्र की दुआएं भी मांगती है। बाजारों में इसकी रौनक नहीं देखी जा रही है और इस बार पर्व पर कोरोना महामारी का असर पिछले साल से बेहतर दिखाई दे रहा है। बीते वर्ष काेराेना के कारण रक्षाबंधन पर बिल्कुल भी भीड़ नहीं थी।

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