योजना / इस माॅनसून में सड़कें नहीं देंगी धाेखा, 209 मशीनें रहेंगी तैनात, पीडब्ल्यूडी में 3800 वर्कर्स देंगे सेवाएं

सेब सीजन और मॉनसून के चलते सड़कों की रिपेयरिंग के काम में जुटे पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी। सेब सीजन और मॉनसून के चलते सड़कों की रिपेयरिंग के काम में जुटे पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी।
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सेब सीजन और मॉनसून के चलते सड़कों की रिपेयरिंग के काम में जुटे पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी।सेब सीजन और मॉनसून के चलते सड़कों की रिपेयरिंग के काम में जुटे पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी।

  • लैंड स्लाइड वाली जगहाें पर पीडब्ल्यूडी का रहेगा ज्यादा फाेकस

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 06:16 AM IST

शिमला. (खुशहाल सिंह) बरसात के मौसम में लैंड स्लाइडिंग से बंद होने वाली सड़कों को खोलने के लिए पीडब्ल्यूडी ने प्लान तैयार कर दिया। पीडल्बयूडी ने मशीनरी तैनात करने के साथ-साथ लेबर को भी तैनाती को लेकर भी प्लान बनाया है। इसके तहत शिमला जिला 209 मशीनें विभिन्न जगहों पर काम में लाई जाएंगी। वहीं 3800 से ज्यादा मजदूरों और कर्मचारियों को भी इस काम में लगाया जाएगा।

विभाग की ओर से बरसात के दौरान बंद होने वाली सड़कों को तत्काल खोलने के निर्देश फील्ड अधिकारियों को दिए गए हैं। सेब सीजन को देखते हुए भी मुख्य सड़कों की रिपेअर करने का काम भी करने को भी कहा गया है। बरसात के मौसम होने वाले लैंड स्लाइडिंग का सबसे ज्यादा असर सड़कों पर पड़ता है।

सड़कें ऐसे में बहाल करने के लिए पी़डब्ल्यूडी को खासी मशक्त करनी पड़ती है। यही वजह है की पीडब्ल्यूडी इस मौसम के लिए कमर कस ली है। शिमला जिला की बात करें दो पीडब्ल्यूडी शिमला जोन के तहत कुल 12900 किलोमीटर लंबी सडकें आती हैं जिनमें 7300 पक्की और 5600 कच्चा रोड है। इनमें से शिमला जिला के तहत करीब दो तिहाई सड़कें हैं।
बीते साल पीडब्ल्यूडी को हुआ था ‌600 करोड़ का नुकसान
शिमला जिला में पीडब्ल्यूडी के शिमला, रामपुर और रोहड़ू सर्कल पड़ते हैं। इन सर्कल में अलग-अलग मशीनरी लगाई जाएगी। इसके तहत रोहडू सर्कल में 50 जेसीबी मशीनें, रामपुर सर्कल के तहत 15 डोजर सहित कुल 17 मशीनें और शिमला सर्कल में 9 डोजर सहित कुल 16 मशीनें तैनात रहेंगी। इनमें विभाग की अपनी मशीनों के अलावा निजी मशीनें भी शामिल भी हैं।

निजी मशीनों को जरूरत पड़ने पर हायर किया जाएगा ताकि समय रहते सड़कों को खोला जा सके। इसके अलावा 3818 से ज्यादा मजदूर भी रहेंगे। इनमें शिमला सर्कल में 1426, रामपुर सर्कल में 1468 और रोहड़ू में करीब 924 मजदूर लगाए जाएंगे। बारिश हिमाचल में आफत बनकर बरसती रही है। हर साल करोड़ों का नुकसान सड़कों को बारिश पहुंचाती है।

हालांकि बारेश पेयजल परियोजनाओं, बिजली सहित सरकारी भवनों और निजी भवनों को भी होता है। लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित सड़कें ही होती है। बीते साल राज्य में करीब 1219 करोड़ का नुकसान बारिश से हुआ। इसमें भी सबसे ज्यादा करीब 600 करोड़ का नुकसान पीडब्ल्यूडी को पहुंचा।

संवेदनशील जगहों पर रहे ज्यादा फोकस
विभाग की ओर से सबसे ज्यादा फोकस उन जगहों पर देने को कहा गया है जो कि लैंड स्लाइडिंग की वजह से ज्यादा संवेदनशील हैं। जुलाई माह में सेब का सीजन भी गति पकड़ेगा। हिमाचल में सबसे ज्यादा सेब उत्पादन शिमला में ही होता है। ऐसे में मंडियों तक सेब पहुंचाने के लिए बंद होने पर सड़कों को तुरंत बहाल करना एक बड़ी चुनौती विभाग की प्राथमिकता रहेगी। 

  • चीफ इंजीनयर पीडब्लयूडी साउथ जोन जितेंद्र धीमान का कहना है कि विभाग माॅनसून के लिए  तैयार है। सरकार के आदेशों के अनुसार सड़कों के रख-रखाव और इनको जारी रखने को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं। इस मौसम में विभिन्न जगहों पर मशीनरी तैनात करने के साथ ही पर्याप्त संख्या में लेबर तैनात रहेगी। सेब सीजन को देखते हुए मुख्य सडकों पर पैच वर्क करने, ड्रैनेज की सफाई के निर्देश दिए गए हैं। जहां कहीं मलबा गिरा है उसको भी समय रहते साफ किया जा रहा है। 

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