प्रदर्शन / मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ सीटू ने सरकार को घेरा

रामपुर में विरोध प्रदर्शन करते हुए क्षेत्रीय समन्वय समिति रामपुर के सदस्य।  रामपुर में विरोध प्रदर्शन करते हुए क्षेत्रीय समन्वय समिति रामपुर के सदस्य। 
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रामपुर में विरोध प्रदर्शन करते हुए क्षेत्रीय समन्वय समिति रामपुर के सदस्य। रामपुर में विरोध प्रदर्शन करते हुए क्षेत्रीय समन्वय समिति रामपुर के सदस्य। 

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

रामपुर बुशहर. सीटू, इंटक, एटक सहित दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व दर्जनों राष्ट्रीय फेडरेशनों के आह्वान पर केंद्र व राज्य सरकारों की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ शुक्रवार को सीटू से संबंधित रामपुर क्षेत्र की सभी यूनियन ने अपने कार्यस्थल पर राष्ट्रीय प्रतिरोध दिवस मनाया। यूनियनों के संयुक्त मंच के रामपुर क्षेत्रीय कमेटी के संयोजक नरेंद्र देष्टा व सह संयोजक नील दत्त ने केंद्र व प्रदेश सरकारों को चेताया है कि वह मजदूर विरोधी कदमों से हाथ पीछे खींचें अन्यथा मजदूर आंदोलन तेज किया जाएगा।

उन्होंने कहा है कि कोरोना महामारी के इस संकट काल को भी शासक वर्ग व सरकारें मजदूरों खून चूसने व उनके शोषण को तेज करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात, राजस्थान में श्रम कानूनों में बदलाव इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अन्य प्रदेशों की तरह ही कारखाना अधिनियम 1948 में तब्दीली करके हिमाचल प्रदेश में काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 कर दिया गया है। इस से एक तरफ मजदूरों की भारी छंटनी होगी वहीं दूसरी ओर कार्यरत मजदूरों का शोषण तेज़ होगा।

इन मजदूर विरोधी कदमों को रोकने के लिए ट्रेड यूनियन संयुक्त मंच ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है व श्रम कानूनों में बदलाव को रोकने की मांग की है। वर्तमान में प्रदेश के ज्यादातर उद्योगों में न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 व वेतन भुगतान अधिनियम 1936 को पहले ही लागू नहीं किया जाता है। सरकार के इस कदम से मजदूरों का शोषण और तेज़ होगा। इस अधिसूचना से पूंजीपतियों को मजदूरों की खुली लूट करने का अधिकार मिल गया है जिसे प्रदेश का मजदूर वर्ग किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं करेगा।

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