कांग्रेस को मिशन से दूर कर सकती गुटबाजी:सोनिया गांधी का एकजुटता का मंत्र बेअसर; नेता खुद ही दे रहे हवा

शिमला5 महीने पहले
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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह। - Dainik Bhaskar
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह।

हिमाचल कांग्रेस संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल के बाद पार्टी के प्रचार अभियान ने तो रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन गुटबाजी आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है। हैरानी इस बात की है कि खेमेबाजी को ज्यादा हवा मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे बड़े नेता ही दे रहे हैं। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि CM बनने के लिए चुनाव जीतना जरूरी है।

यही वजह है कि कांग्रेस नेता सत्तारूढ़ भाजपा से विचारों की लड़ाई लड़ने के बजाय आपस में ही गुत्थम-गुत्था हो रहे हैं। सरेआम एक दूसरे पर शब्दों के तीर छोड़े जा रहे हैं। कुछ कांग्रेस नेताओं ने तो पार्टी लाइन से हटकर निजी एजेंसी हायर करके अपने स्तर पर सर्वे कराने भी शुरू कर दिए हैं, ताकि सर्वे को आधार बनाकर अपने गुट के नेता को टिकट दिलाए जा सके।

अपने आपको अध्यक्ष से भी ऊपर समझ रहे नेता

किसी भी संगठन में अध्यक्ष सर्वोपरि होता है, लेकिन कांग्रेस में कुछ नेता अपने आपको अध्यक्ष से भी ऊपर समझने लगे हैं और PCC चीफ के कार्यक्रमों का बहिष्कार कर रहे हैं।

AICC के निर्देशों की भी परवाह नहीं

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी AICC के निर्देशों पर शिमला में बीते दिनों चिंतन शिविर बुलाया गया। इसमें पार्टी के सभी नेताओं को उपस्थित रहने के निर्देश दिए, लेकिन इस महत्वपूर्ण चिंतन शिविर से चुनाव प्रचार कमेटी के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू समेत कुसुम्प्टी के विधायक अनिरूद्ध सिंह और जुब्बल कोटखाई के विधायक रोहित ठाकुर भी गैर हाजिर रहे।

ऐसे गुटबाजी को हवा दे रहे कांग्रेस नेता

चिंतन शिविर के कुछ दिन बाद शिमला शहरी कांग्रेस राजभवन के बाहर पुलिस पेपर लीक मामले में प्रदर्शन करती है। इस दिन PCC चीफ प्रतिभा दूसरे जिले के दौरे पर थे तो सुक्खू समेत रोहित ठाकुर और अनिरूद्ध सिंह भी राजभवन के बाहर धरने में मौजूद रहते हैं। इस तरह कांग्रेस नेता खुद ही गुटबाजी को हवा दे रहे हैं।

सोनिया गांधी के आदेशों का ठेंगा

कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हिमाचल कांग्रेस संगठन में सबको खुश करने और गुटबाजी को खत्म करने के मकसद से अध्यक्ष के साथ चार वर्किंग प्रैजिडेंट, इलैक्शन कैंपेन कमेटी चेयरमैन और 10 से ज्यादा विभिन्न कमेटियों का गठन कर सबको संगठन में पद देकर खुश करने का प्रयास किया था लेकिन कांग्रेस नेताओं को इसकी भी परवाह नहीं है।

आपसी लड़ाई में सपना न रह जाए मिशन-2022

आपसी लड़ाई में कांग्रेस का मिशन-2022 पीछे छूट सकता है। कांग्रेस नेताओं में निरंतर अनुशासनहीनता सबके सामने आ रही है। किन्नौर में कांग्रेस के विधायक और युवा कांग्रेस अध्यक्ष में हाथापाई की नौबत आना, सिरमौर में कांग्रेस के भारत जोड़ों सद्भावना दिवस पर प्रदेशाध्यक्ष के सामने कांग्रेस नेताओं का हाई वोल्टेज ड्रामा,

हमीरपुर में एक कार्यक्रम में वीरभद्र सिंह समर्थक द्वारा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पर सरेआम अनदेखी के आरोप लगाना, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता आशा कुमारी, सुधीर शर्मा के ज्यादातर कार्यक्रम से गैर हाजिर रहना कांग्रेस के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

नेताओं का अहम गिरा रहा कार्यकर्ताओं का मनोबल

कांग्रेस में कुछ नेताओं के अहम के कारण उन कार्यकर्ताओं को मनोबल गिर रहा है जो दिन रात मेहनत करके कांग्रेस की सत्ता में वापसी चाहते हैं। प्रदेश में पांच से छह महीने बाद विधानसभा चुनाव होने है। इससे नहीं लग रहा कि कांग्रेस चुनाव में एकजुट हो पाएगी। हालांकि प्रतिभा सिंह की अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के बाद कांग्रेस के प्रचार ने रफ्तार पकड़ी है लेकिन गुटबाजी को प्रतिभा सिंह भी नहीं रोक पा रही है।

प्रतिभा को गुटबाजी रोकने के लिए करनी चाहिए पहल

प्रतिभा सिंह भी गुजबाटी पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो प्रतिभा सिंह को भी खेमेबाजी को हवा दे रहे नेताओं से बात करनी चाहिए। यह उनकी भी नाकामी है। कांग्रेस के लिए अच्छी बात यह है कि मुकेश अग्निहोत्री प्रतिभा सिंह के साथ चल रहे हैं। वह PCC चीफ के ज्यादातर कार्यक्रम में प्रतिभा के साथ घूम रहे हैं।

अनुशासन समिति की अध्यक्ष का दावा

कांग्रेस की अनुशासन समिति की अध्यक्ष विप्लव ठाकुर ने बताया कि सिरमौर मामले में प्रदेशाध्यक्ष ने कार्यकारिणी भंग कर कार्रवाई कर दी है,जबकि किन्नौर मामले में उन्हें अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह एक जुट है। छोटे मोटे मनमुटाव हर एक पार्टी में रहते हैं।