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योजना बनाई:एचपीयू में सेशन शुरू हाेते ही मिल सकता है छात्रों काे हाॅस्टल, सात अगस्त के बाद हाेंगे एंट्रेंस, रिजल्ट जल्द निकालने का भी होगा दबाव

शिमला2 महीने पहले
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  • हाॅस्टल फिलहाल खाली रखे गए हैं, यहां पर रिसर्च स्काॅलराें काे भी अभी तक रहने की अनुमति नहीं है

हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में सेशन शुरू हाेते ही हाॅस्टल आवंटित हाे सकते हैं। ऐसे में उन छात्राें काे इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा, जाे प्रतियाेगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए लाइब्रेरी जाते हैं। सात अगस्त के बाद एंट्रेंस टेस्ट हाे सकते हैं। पीजी में प्रवेश के लिए परीक्षाएं इस बार भी सुबह और शाम के सेशन में ही आयाेजित की जाएंगी। माेबाइल फाेन काे ले जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। यूजीसी के आदेश है कि परीक्षाएं में नकल काे राेकने के लिए काॅलेज की ओर से गठित की गई कमेटी समय समय पर इसकी हर रिपाेर्ट संबंधित विवि और यूजीसी काे देगी ताकि छात्राें काे नकल करने से राेका जा सके।

काॅलेज प्रशाससन और विवि प्रशासन पर इस बार परीक्षाएं करवाने काे लेकर दबाव रहेगा। क्याेंकि, अगर समय पर एंट्रेंस टेस्ट के रिजल्ट नहीं निकाले ताे एडमिशन और नया सत्र शुरू करने में दिक्कत आ सकती है। एचपीयू और शिमला शहर के सभी काॅलेजाें के हाॅस्टलाें काे फिलहाल खाली रखा गया है। यहां पर रिसर्च स्काॅलराें काे भी अब रहने की अनुमति नहीं हैं। काॅलेजाें में करीब 8500 स्टूडेंट और एचपीयू में 1647 स्टूडेंट हाॅस्टल में रहते हैं। एचपीयू के वीसी प्रोफेसर सिकंदर कुमार का कहना है कि यूजीसी के नियमों के अनुसार ही आगामी दिनों में हॉस्टल आवंटित किए जाएंगे।

एचपीयू के पास हैं कुल 15 हाॅस्टलः हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के पास कुल 15 हाॅस्टल हैं। इनमें 4 लड़काें के और 11 लड़कियाें के हाॅस्टल हैं। इनमें कुल 1647 स्टूडेंट रह सकते हैं। 1058 लड़कियाें और 589 लड़काें के रहने की सुविधा इन हाॅस्टलाें में हैं। जबकि इसके अलाॅटमेंट में ही देरी की जा रही है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि सभी स्टूडेंट काे हाॅस्टल दिए जाएंगे। सभी पात्र स्टूडेंट काे हाॅस्टल अलाॅट कर दिए जाएंगे।

हाॅस्टल न मिलने से दूरदराज क्षेत्राें के छात्र परेशानः काेराेना संकट में सबसे ज्यादा दिक्कत दूरदराज क्षेत्राें के छात्राें काे हाे रही है। एचपीयू की बात करें ताे यहां पर साल भर का हाॅस्टल का खर्च महज 7000 रुपए हैं। जबकि शिमला में अगर सिंगल रूम भी लेना है ताे पांच हजार रुपए प्रति महीना देना पड़ता है। अगर काेई स्टूडेंट किन्नाैर से शिमला पढ़ने के लिए आ रहा है ताे एक लाख रुपए साल का उसे किराए के कमरें का चुकाना हाेता है। ऐसे में अगर उसे हाॅस्टल मिल जाए ताे उन्हें दिक्कत नहीं हाेगी।

किस जिले में कितने हाॅस्टल

शिमला: हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी सहित आरकेएमवी, संजाैली, रामपुर और सरस्वती नगर सावड़ा में हाॅस्टल हैं। इन हाॅस्टलाें में करीब 2500 स्टूडेंट रहते हैं। लाहाैल स्पीति, चंबा और किन्नाैर क्षेत्राें से स्टूडेंट यहां पढ़ाई करने के लिए आते हैं।

साेलन: यहां पर करीब 10 काॅलेज हैं। तीन काॅलेजाें के पास हाॅस्टल की सुविधा है। नालागढ़, अर्की में करीब 180 स्टूडेंट हाॅस्टल में रहते हैं।

मंडी: 17 काॅलेज हैं। सरकाघाट, बासा और मंडी वल्लभ काॅलेज में हाॅस्टल की सुविधा है। करीब 350 स्टूडेंट्स की हाॅस्टल में रहने की क्षमता है।

कांगड़ा: इस जिले में करीब 28 काॅलेज है। आठ काॅलेज ऐसे हैं, जहां पर हाॅस्टल की सुविधा छात्र छात्राओं काे मिल रही है। 400 के करीब स्टूडेंट हाॅस्टल में रहते हैं।

बिलासपुर, सिरमाैर, हमीरपुर: यहां क्रमश: तीन, 14 और 6 काॅलेज हैं। यहां करीब 250 स्टूडेंट के हाॅस्टल में रहने की क्षमता है।

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