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मरीजाें काे परेशानी:इमरजेंसी में रात में 2 घंटे गायब था टेक्नीशियन, मरीजों का अल्ट्रासाउंड के बिना रुका रहा इलाज

शिमला2 महीने पहले
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  • आईजीएमसी में सुबह चार बजे पहुंचे मरीज का छह बजे हो पाया अल्ट्रासाउंड

आईजीएमसी में देररात इमरजेंसी में आए मरीजाें काे इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ी। मरीजाें का इलाज इसलिए नहीं शुरू हाे पाया क्याेंकि इमरजेंसी में डाॅक्टराें ने उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा, जबकि अल्ट्रासाउंड करने के लिए टेक्नीशियन नहीं था।

लिहाजा मरीज और परिजन इंतजार करते रहे। परिजनाें ने कई बार संबंधित टेक्निशियन काे फाेन भी किए, मगर फाेन भी नहीं मिला। सुबह करीब 6:00 बजे अल्ट्रासाउंड के लिए डाॅक्टर पहुंचे, उसके बाद ही अल्ट्रासाउंड किया गया, फिर मरीजाें का इलाज शुरू हाे पाया। इमरजेंसी में आने वाले मरीजाें काे हर तरह की सुविधाएं मुहैवा करवाई जाती है, मगर इस तरह की लापरवाही मरीजाें पर भारी पड़ सकती है। क्याेंकि इमरजेंसी में मरीजाें काे अगर जल्दी इलाज ना मिलने ताे उनकी जान तक जा सकती है।

राेजाना आते हैं 150 के करीब मरीज

आईजीएमसी की इमरजेंसी में राेजाना 150 के करीब मरीज आते हैं। इसमें रात काे ज्यादातर मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां पर इमरजेंसी में कैज्युअल्टी मेडिकल ऑफिसर मरीज का चेकअप करते हैं, फिर संबंधित विभाग के डाॅक्टर काे इलाज के लिए बुलाते हैं। हालांकि जब तक संबंधित विभाग के चिकित्सक आते हैं, तब तक सीएमओ बीमारी के अनुसार टेस्ट करवा देते हैं। इससे फिर मरीज का इलाज शुरू करने में काेई दिक्कत नहीं आती। क्याेंकि संबंधित विभाग के चिकित्सक जब तक पहुंचे हैं रिपाेर्ट आ जाती है और मरीज का इलाज तुरंत शुरू हाे जाता है। ऐसे में यदि समय पर यहां पर टेस्ट करने वाले ना मिले ताे मरीज का इलाज शुरू करना मुश्किल हाे जाता है।

परिजनाें का ये आरोप

राेहड़ू निवासी रामेश्वरी शर्मा ने बताया कि शुक्रवार रात काे उनके पति काे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। इमरजेंसी में वह उन्हें राेहड़ू लेकर गए, वहां से हालत देखकर डाॅक्टर उन्हें प्राथमिक उपचार देकर आईजीएमसी रेफर कर दिया। उन्हाेंने बताया कि सुबह करीब 4 बजे वह आईजीएमसी में पहुंच गए। यहां पर डाॅक्टराें ने इमरजेंसी में उनका अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा। जब उन्हाेंने स्टाफ कर्मियाें से पूछा ताे पता चला कि अल्ट्रासाउंड करने वाले अभी नहीं है। इस दाैरान वह परेशान हाे गए। उन्हाेंने बताया कि स्टाफ से नंबर लेकर टेक्निशियन काे उन्हाेंने फाेन करने की काेशिश भी की मगर फाेन भी बंद आया। करीब दो घंटे बाद 6 बजे अल्ट्रासाउंड करने वाले चिकित्सक आए। उसके बाद उनके पति का इलाज शुरू हाे पाया। उनका कहना है कि उनके अलावा भी कुछ मरीज वहां पर थे, जिनका अल्ट्रासाउंड इमरजेंसी में हाेना था।

इमरजेंसी में जरूरी हाेते हैं टेस्ट

आईजीएमसी में प्रदेशभर से मरीजाें काे रेफर किया जाता है। यहां पर पहुंचने के बाद इन मरीजाें का सबसे पहले आईजीएमसी के चिकित्सक बीमारी के अनुसार अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, सीटी स्कैन या एमआरआई के अलावा अन्य टेस्ट करवाते हैं। दुर्घटना के दाैरान ताे मरीज की बीमारी का पता तभी चलता है जब उसकी एक्सरे या एमआरआई की रिपाेर्ट आती है। उसका इलाज भी तभी शुरू हाे पाता है। इसी तरह पेट की किसी भी समस्या के लिए मरीज का सबसे पहले अल्ट्रासाउंड करवाया जाता है, फिर डाॅक्टर रिपाेर्ट देखकर यह पता कर पाते हैं कि मरीज काे पेट में क्या दिक्कत है। राेहड़ू के मरीज के साथ भी यही हुआ। उनके पेट में दिक्कत थी ओर अल्ट्रासाउंड रिपाेर्ट आने के बाद ही असल बीमारी का पता चलना था।

इमरजेंसी में यदि किसी मरीज का अल्ट्रासाउंड नहीं किया गया ताे वह इसकी शिकायत प्रशासन काे दे सकता है। इसमें जांच की जाएगी। क्याेंकि इमरजेंसी मरीजाें के लिए अलग से अल्ट्रासाउंड मशीन लगाई गई है। हालांकि यहां पर इमरजेंसी में सभी प्रकार के टेस्ट हाेते हैं। काेशिश की जाती है कि किसी भी मरीज काे परेशानी ना आए। -डाॅ. राहुल गुप्ता, प्रशासनिक अधिकारी आईजीएमसी शिमला

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