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किसान सभा ने जलाए कृषि कानून:'केंद्र सरकार किसानों के प्रति उदासीन ही नहीं असंवेदनशील बनी'

शिमला4 महीने पहले
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कृषि कानूनों की प्रतियां जलाते हुए किसान सभा के पदाधिकारी और सदस्य। - Dainik Bhaskar
कृषि कानूनों की प्रतियां जलाते हुए किसान सभा के पदाधिकारी और सदस्य।

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर शनिवार को किसानों ने देशभर में काले कृषि कानूनों का दहन किया। शिमला में किसान मोर्चा के संगठनों ने कृषि कानूनों को जलाते हुए संघर्ष ज़िंदा रहने की गवाही दी। हिमाचल किसान सभा के जिलाध्यक्ष सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि यह शर्मनाक ही कि केंद्र सरकार किसानों के प्रति उदासीन ही नहीं असंवेदनशील बनी हुई है।

सत्यवान ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार किसानों की मांगे नहीं मान लेते आंदोलन जारी रहेगा। वहीं किसान सभा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य प्रो. राजेन्द्र चौहान ने कहा कि 1974 के बाद आज फिर से किसान सम्पूर्ण क्रांति का उदघोष कर रहा है जिसकी आंधी वर्तमान किसान विरोधी केंद्र सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने कहा कि न केवल केंद्र में बल्कि राज्यों से भी जल्दी भाजपा का सफाया होगा। जिला कोषाध्यक्ष जयशिव ठाकुर ने भी प्रदर्शन कर रहे किसानों को संबोधित किया।

सत्यवान पुण्डीर ने जानकारी दी कि प्रदेश के सभी जिलों के करीब 30 खंडों में पांच सौ से अधिक गांवों व पंचायतों में लोगों ने काले कृषि कानूनों को जलाया। इस पूरी प्रक्रिया में हजारों लोगों ने भाग लिया। ज्ञात हो कि पिछले साल 5 जून को केंद्र सरकार तीन ऐसे कृषि कानून लायी थी जिनको किसानों ने स्वीकार नहीं किया और उन्हें निरस्त करने की मांग उठाई।

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