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चुनावी खेल:चुनाव काैन लड़ेगा, पर्ची सिस्टम से हाे रहा तय, कई पंचायतों में देवता के नाम पर प्रत्याशियों काे बैठाने का भी अपना रहे फॉर्मूला

शिमला2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • गांव का ही काेई बच्चा या बुजुर्ग निकालता है पर्ची, जो सबको होती है मान्य

पंचायत चुनाव में अब लगातार प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है। जिला परिषद के साथ-साथ अब बीडीसी, पंचायत प्रधान और उपप्रधानों के दावेदाराें की संख्या भी पंचायताें में लगातार बढ़ती जा रही है। जहां पर पूरी पंचायत से तीन या चार दावेदार सामने आते थे, अब एक गांव से ही इतने दावेदार हाेने लगे हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए अप्पर शिमला के कई गांव में नया फाॅर्मूला निकाला है।

गांव से एक ही प्रत्याशी चुनाव मैदान में जाए इसके लिए अब कई पंचायताें में पर्ची सिस्टम से प्रत्याशी का चुनाव किया जा रहा है। हाल ही में शिमला की टिक्कर क्षैणी पंचायत में इसी तरह से प्रधान पद के लिए प्रत्याशी का चयन किया गया। इसके लिए देवता के दरबार में चुनाव लड़ने की फिराक में बैठे सभी प्रत्याशियों काे बुलाया जा रहा है।

इन प्रत्याशियों के नाम की पर्चियां एक बाॅक्स में डाली जाती हैं। फिर गांव का ही काेई बच्चा या बुजुर्ग एक पर्ची निकालता है। पर्ची में जिसका नाम अाता है। उसे गांव से चुनाव में उतारा जा रहा है। अब तक अप्पर शिमला के कई गांव में यह तरीका अपना जा चुका है।

यह हाे रहा फायदाः चुनाव में पर्ची से प्रत्याशी का फैसला करने के निर्णय का काफी फायदा हाेता है। इसमें जिस प्रत्याशी का नाम पर्ची में अाता है, उसे देवता का अाशीर्वाद मानकर चुनाव में उतारा जाता है। एेसे में पूरा गांव उसी प्रत्याशी काे वाेट डालता है।

जिससे प्रत्याशी की जीत भी संभव हाे जाती है। इसके अलावा गांव के लाेगाें के लिए भी एक ही प्रत्याशी काे चुनना अासान हाे जाता है। अगर एक ही गांव से चार या पांच प्रत्याशी मैदान में उतर जाएंगे ताे वाेटर बंट जाएंगे जिससे प्रत्याशियों काे जीतना मुश्किल हाे जाएगा।

खर्चा भी कम

पर्ची सिस्टम से प्रत्याशियों के चुनाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे जहां समय की बचत हाेती है, वहीं जाे लाेग चुनाव लड़ने की फिराक में रहते हैं और उनका नाम पर्ची में नहीं अाता उनका खर्चा बच जाता है। अगर सभी प्रत्याशी चुनाव में खड़े हाेंगे ताे उन्हें काफी खर्च करना पड़ेगा। इसके अलावा चुनाव प्रचार में भी उनका काफी समय बर्बाद हाेगा।

अगर प्रत्याशी काे पूरी पंचायत में घूमना हाे ताे उसे दाे से तीन दिन लग जाते हैं। इसमें जाे लाेग प्रत्याशी के साथ वाेट मांगने के लिए जाते हैं। उनका चाय, खाना समेत कई तरह के खर्चे भी प्रत्याशी काे उठाने पड़ते हैं। जिससे चुनाव खत्म हाेने तक प्रत्याशी का काफी खर्चा हाे जाता है।

कई पंचायतें निर्विराेध चुनी

जहां एक ओर प्रत्याशियों का चुनाव पर्ची सिस्टम से किया जा रहा है, वहीं शिमला और सिरमाैर की कई पंचायताें काे देवता के दरबार में पर्ची सिस्टम से निर्विराेध चुना जा चुका है। इसमें पूरी पंचायत के लाेग इकट्ठे हाेकर ही एक जगह पर सभी प्रत्याशियों के नाम पर्चियाें में लिखते हैं और फिर पर्चियों में जिनका नाम आता है उन्हें ही पूरी पंचायत के लाेग निर्विराेध प्रधान, उपप्रधान अाैर सदस्य चुनते हैं। इससे पंचायत काे 10 लाख रुपए का ईनाम भी मिलता है।

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