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फंडिंग से मना:प्रदेश काे नहीं मिलेंगी बाकी 100 इलेक्ट्रिक बसें, शिमला शहर काे भी मिलनी थी 35 बसें

शिमला10 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • केंद्र सरकार का फंडिंग से मना, 60 % केंद्र, 40% प्रदेश सरकार वहन करती है खर्च

हिमाचल सहित शिमला काे 100 इलेक्ट्रिक बसें फिलहाल नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव काे रिजेक्ट कर दिया गया है। ऐसे में 100 और इलेक्ट्रिक बसें फिलहाल प्रदेश काे नहीं मिलेंगी। शिमला शहर में पहले ही 50 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। जबकि 35 और नई इलेक्ट्रिक बसें मिलनी थी।

केंद्र सरकार की ओर से साफ कहा गया है कि वह प्रदेश काे फिलहाल बसाें के लिए वित्तीय सहायता नहीं दे सकता। केंद्र के परिवहन मंत्रालय की ओर से सुझाव दिया गया है कि अगर प्रदेश सरकार चाहे ताे प्राइवेट ट्रांसपोर्टरों को इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए आमंत्रित कर सकती है।

अभी तक शिमला और राेहतांग में जाे इलेक्ट्रिक बसें चल रही है, उसकाे चलाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 60 फीसदी की फंडिंग की जाती है। इसी तरह 40 फीसदी प्रदेश सरकार को वहन करना हाेता है। जबकि अब और बसाें के लिए केंद्र सरकार की ओर से फंडिंग देने से इनकार कर दिया गया है। प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची ने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियाें से बात भी की थी, लेकिन फिलहाल फंडिंग देने से केंद्र की ओर से मना किया गया है।

शहर में थी पुरानी बसों को इलेक्ट्रिक बसों में बदलने की योजना

अब टूटी आस

इलेक्ट्रिक बसाें के लिए केंद्र से सहयाेग न मिलने के चलते एचआरटीसी काे खासा नुकसान हाेगा। पहले आस लगाई थी कि इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी, लेकिन अब आस टूटी गई है। शिमला शहर की बात करें ताे एचआरटीसी ने याेजना बनाई थी कि यहां पर पुरानी बसाें काे रिप्लेस किया जाएगा। यानी की डीजल वाली बसाें काे रूटाें पर नहीं भेजा जाएगा।

शहर में सिर्फ इलेक्ट्रिक बसें ही चलेंगी ताकि कमाई ज्यादा हाे और लाेगाें काे इकाे फ्रेंडली सफर करने का माैका भी मिले। सरकार और एचआरटीसी ने याेजना बनाई थी कि शहर काे पूरी तरह से पर्यावरण प्रदूषणमुक्त शहर बनाने के लिए आने वाले दिनाें में इकाे फ्रेंडली बस सेवा शुरू करनी है। अब केंद्र से मिले झटके के बाद सरकार काे पुरानी बसें ही रूटाें पर चलानी पड़ेंगी।

इलेक्ट्रिक बसें कमाई में भी आगे

बीते 19 फरवरी 2018 काे शिमला शहर में इलेक्ट्रिक बसाें का सफर शुरू हुआ था। अब जब बसाें की कमाई का आकलन किया ताे पता लगा की वाॅल्वाे की तरह ये बसें निगम में कमाई का जरिया बन रही है। एक बस की कीमत 76.7 लाख है। आंकड़ाें काे देखें ताे डीजल की बसाें की एक दिन कमाई महज 1700 रुपए हैं।

अगर एक बस 200 किलाेमीटर का सफर तय करती है ताे उसमें लगभग 3000 रुपए का डीजल लगता है। जबकि कमाई पांच हजार की हाेती है। सिर्फ दाे हजार रुपए की कमाई निगम की हाे पाती है। जबकि इलेक्ट्रिक बस की कमाई एक दिन की 4900 रुपए हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार चाहती थी कि अगर और बसें प्रदेश काे मिलेगी ताे इससे उन्हें जहां फायदा हाेगा, वहीं पर्यावरण काे भी इसका लाभ मिलेगा।

दाे घंटे चार्ज, चलती हैं 200 किमी

दाे घंटे चार्ज हाेने पर इलेक्ट्रिक बस लगभग 200 किलाेमीटर तक चलती हैं। बसों से शोर भी नहीं हाेता है। यह बसें बिल्कुल धुआं रहित है। वहीं, इनकी सीटें भी आरामदायक है। एचअारटीसी की इन बसों को शिमला की सड़कों के अनुसार तैयार किया है। इस बस एक सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि यह बस छोटी है।

बस शहर के तीखे मोड़ों पर आसानी से मुड़ रही है। जिससे आगे पीछे चलने वाले वाहनों को भी परेशानी नहीं हाे रही है। अधिकारियाें ने अभी तक इसका जाे फीडबैक लिया है, उसमें पता लगा कि इस बस के चलते ज्यादा जाम नहीं लग रहा है।

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