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मरीजों को मिलगी राहत:आईजीएमसी में नहीं हाेगी आटीपीसीआर रिपाेर्ट में देरी, 3 नई टेस्टिंग मशीनें पहुंची

शिमलाएक महीने पहलेलेखक: सोमदत शर्मा
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  • 1200 से ज्यादा टेस्ट सैंपल की राेजाना हाेगी जांच, इसी हफ्ते मशीनें हो जाएंगी इंस्टॉल

काेराेना की रिपाेर्ट के लिए अब लाेगाें काे ना ताे दाे से तीन दिन तक इंतजार करना पड़ेगा और ना ही ज्यादा सैंपल आने पर लैब में मशीनाें, तकनीशियनाें पर बाेझ रहेगा। आईजीएमसी ने अब काेराेना की टेस्टिंग के लिए तीन नई आरटीपीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) टेस्टिंग मशीनाें की खरीद की है।

यह मशीनें शनिवार काे आईजीएमसी में पहुंच गई हैं। अब इसी सप्ताह से इन मशीनाें काे माइक्राेबाॅयाेलाॅजी विभाग में इंस्टाॅल कर दिया जाएगा। जिसके बाद यहां पर टेस्टिंग की रिपाेर्ट आने में देरी नहीं हाेगी। अभी यहां पर मात्र दाे मशीने हैंं, जबकि प्रदेशभर के मरीज आईजीएमसी आते हैं। जिला शिमला के साथ-साथ ओपीडी और ओटी में आने वाले मरीजाें के सैंपल की जांच भी यहीं पर की जा रही थी।

ऐसे में राेजाना यहां पर कई मरीजाें की रिपाेर्ट पेंडिंग रह जाती थी। जब ज्यादा सैंपल आते थे ताे मरीजाें काे दाे से तीन दिन बाद भी काेराेना की रिपाेर्ट नहीं मिल पाती थी। लिहाजा अब इन सभी समस्याओं का समाधान हाे जाएगा क्याेंकि एक साथ आईजीएमसी में अब पांच मशीनें टेस्टिंग करना शुरू कर देंगी।

काेराेना की पहली और दूसरी लहर में संक्रमण फैलने का एक कारण यह भी था कि इस दाैरान मरीजाें की रिपाेर्ट पेंडिंग रह रही थी। ज्यादात्तर मरीजाें की रिपाेर्ट दूसरे या तीसरे दिन मिलती थी, तब तक मरीज कई सैंपल देने वाला व्यक्ति कई लाेगाें के संपर्क में आ चुका हाेता था।

अभी 800 सैंपल की हो पाती है जांच

नई मशीनें आने से काफी फायदा हाेगा। माैजूदा समय में यहां पर दाे मशीनें आरटी-पीसीआर सैंपल की जांच कर रही हैं। इसमें एक मशीन में करीब 400 सैंपल की जांच की जा रही है, ऐसे में राेजाना 800 सैंपल की जांच हाेती है। जब काेराेना जब पीक पर था ताे यहां पर कई बार एक हजार तक राेजाना सैंपल जांच के लिए पहुंच रहे थे, ज्यादातर मरीजों की रिपाेर्ट पेंडिंग रह जाती थी। मगर अब पांच मशीनाें में 2000 तक टेस्ट राेजाना किए जा सकेंगे, जिससे मरीजाें की रिपाेर्ट पेंडिंग नहीं रहेगी।

तीसरी लहर आई ताे हाे सकेगी ज्यादा टेस्टिंग

विशेषज्ञाें का दावा है कि जुलाई माह के बीच तक काेराेना की तीसरी लहर अपना असर दिखा सकती है। इसमें सबसे ज्यादा बच्चाें के संक्रमित हाेने का भी डर बना हुआ है। ऐसे में अगर तीसरी लहर आती है ताे काेराेना की टेस्टिंग बढ़ाना भी विभाग के लिए जरूरी हाेगा, क्याेंकि टेस्टिंग बढ़ाना ही एक मात्र काेराेना संक्रमण काे राेकने का इलाज है। ऐसे में अब तीसरी लहर में ज्यादा से ज्यादा लाेगाें के काेराेना सैंपल लिए जा सकेंगे और उनकी रिपाेर्ट भी तुरंत आ जाएगी। इससे काेराेना संक्रमण राेकने में काफी मदद मिलेगी।

तीन तरह के टेस्ट किए जा रहे हैं

काेराेना टेस्टिंग के लिए अभी तक तीन तरह के टेस्ट किए जा रहे हैं। इसमें आरटी-पीसीआर, रेट और ट्रू नेट टेस्ट से मरीजाें में काेराेना की पहचान की जा रही है। इन तीनाें में सबसे ज्यादा विश्वसनीय टेस्ट आरटी-पीसीआर माना जाता है क्याेंकि इसमें मरीज काे काेराेना है या नहीं इसका स्टीक पता चल जाता है।

हालांकि रेट टेस्ट की रिपाेर्ट पांच मिनट में आ जाती है, मगर लक्षण वाले मरीज कई बार इसमें निगेटिव भी आ जाते हैं। ऐसे में आरटी-पीसीआर ही एक टेस्ट है, जिसमें मरीज के संक्रमित हाेने का सही पता चलता है।

आईजीएमसी में आरटी-पीसीआर टेस्टिंग के लिए तीन नई मशीनें खरीदी गई हैं। यह मशीनें यहां पर पहुंच गई हैं। इसी सप्ताह इन्हें इंस्टाॅल कर दिया जाएगा। फिर यहां पर पांच मशीनें हाे जाएंगी, इससे जहां अभी तक 800 के करीब टेस्ट की जांच हाे पा रही है, बाद में 2000 तक टेस्ट की जांच राेजाना हाेगी। मरीजाें काे टेस्टिंग की रिपाेर्ट भी कुछ ही घंटाें में मिल सकेगी। -डाॅ. रजनीश पठानिया, प्रधानाचार्य आईजीएमसी शिमला

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