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ट्यूलिप में आत्मनिर्भर होगा हिमाचल:12,500 फुट की ऊंचाई पर लाहौल स्पीति के गांवों में ट्यूलिप गार्डन तैयार; विदेशों पर निर्भरता होगी कम

केलांग9 दिन पहलेलेखक: राजेश भट्‌ट
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  • लाहौल के तीन गांवों में 50 किसानों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

अब ट्यूलिप के सुंदर फूलों को निहारने के लिए किसी को कश्मीर घाटी जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हिमाचल के लाहौल स्पीति के तीन गांवों में ट्यूलिप की फ़सल तैयार हो चुकी है। इसका श्रेय सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) के हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) पालमपुर को जाता है जो किसानों को प्रशिक्षण दे रहा है। संस्थान का ये प्रयास कामयाब रहा तो ट्यूलिप के फूलों के लिए विदेशों पर हमें निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हिमाचल से ही देश के विभिन्न भागों में इसकी सप्लाई हो सकेगी।

आईएचबीटी के निदेशक डॉक्टर संजय कुमार ने बताया कि देश में अभी ट्यूलिप कम ही पैदा होता है, अधिकतर इसका बल्ब नीदरलैंड से आयात करते हैं। भारत में इसका बल्ब प्रवर्धन नहीं होता है जिससे इसका बल्ब ज्यादा क़ीमत में लोगों को मिलता है। जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में अभी नीदरलैंड समेत अन्य देशों से फूलों के बल्ब मंगवाए जाते थे।

श्रीनगर के ट्यूलिप गार्डन की बात करें तो वहां भी ट्यूलिप के बल्ब्ज़ 25-30 रुपये में आयात किए जाते हैं। भारत में हर साल करीब 50 करोड़ के बल्ब आयात किए जाते हैं जिनकी फ़सल को शो केस किया जाता है। अभी हमने ऐसी जगह नहीं देखी जहां इनके बल्ब को हम मल्टीप्लाई कर सकें। पिछले तीन साल से हम लाहौल के तीन गांवों मडग्रां, सैनशां और खिनिंग में ट्यूलिप को पैदा करने और पैदावार को और बेहतर करने में लगे हैं। {शेष पेज 11

पालमपुर से बेहतर ट्यूलिप की पैदावार लाहौल स्पीति में

आईएचबीटी के वैज्ञानिक डॉक्टर भाव्य भार्गव ने बताया कि हिमाचल में ट्यूलिप के लिए पालमपुर से बेहतर भौगोलिक परिस्थितयां लाहौल स्पीति में है। पालमपुर में एक फसल के बाद इसका बल्ब छोटा होता है जिसके कारण फूल का आकार भी छोटा हो जाता है पर लाहौल में आशा के अनुरुप ही फूल पैदा हो रहा है और बल्ब की संख्या व आकार भी बड़ा हो रहा है। लाहौल के जिन तीन गांवों में ट्यूलिप पैदा किया जा रहा है, उनमें मडग्रां (उदयपुर) में सबसे पहले फ्लाॅवरिंग मिलती है उसके बाद शांशा व ख़िनिंग में फूल खिलते हैं।

20 दिन तक खिला रह सकता है ट्यूलिप का फूल

ट्यूलिप के फूल की आयु 15 से 20 दिन की ही होती है। यह मौसम और तापमान पर निर्भर करता है कि यह 15 दिन तक खिले रहेंगे या 20 दिन तक। वहीं कटने के बाद ये 5 दिन तक बिना मुरझाए रह सकते हैं।

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