अब एक साथ नहीं होंगे एग्जाम:पैरेंट्स के दबाव में ताराहाॅल स्कूल ने बदला निर्णय, पहले सभी बच्चों को बुला लिया था एक साथ

शिमलाएक महीने पहले
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प्रदेश सरकार ने स्कूलाें काे खाेलने के साथ ये शर्त रखी है कि हफ्ते में पहले तीन दिन 10वीं और प्लस टू की कक्षाएं चलेंगी जबकि बाकी के तीन दिन 9वीं और 11वीं की कक्षाएं लगेंगी ताकि स्कूलाें में भीड़ कम करके काेराेना से बच्चाें काे बचाया जा सके। लेकिन राजधानी में लाॅरेटाे काॅन्वेंट ताराहाॅल स्कूल प्रबंधन की ओर से पैरेंट्स काे स्कूल खाेलने का मैसेज भेजने शुरू कर दिए थे। इसमें स्कूल खुलते ही बच्चाें के एग्जाम शुरू करने के मैसेज डाले जा रहे थे।

इस मैसेज में पैरेंट्स काे ही बच्चाें काे स्कूल तक पहुंचाने के लिए खुद ट्रांस्पाेर्टेशन का इंतजाम करने के लिए कहा गया है। पैरेंट्स अब उलझन में थे कि दाे दिनाें के अंदर ड्रेस और ट्रांस्पाेर्टेशन का इंतजाम कैसे करेंगे। पैरेंट्स काे सबसे ज्यादा चिंता बिना किसी ब्रेक के सभी बच्चाें के एग्जाम एक साथ करवाए जाने की थी क्याेंकि एक साथ सभी बच्चाें काे एग्जाम के लिए बुलाने से भीड़ हाेने पर काेराेना का खतरा बढ़ सकता था। उसके बाद पैरेंट्स ने इसका विराेध शुरू किया।

साेमवार काे पैरेंट्स स्कूल पहुंचे और प्रबंधन के साथ बैठक की ताे प्रबंधन ने अपना निर्णय बदला। अब बच्चाें काे सरकार की शर्ताें के तहत बुलाया जाएगा। हालांकि पैरेंट्स काे अभी भी ट्रांस्पाेर्टेशन और ड्रेस की चिंता है। वहीं, काेराेना का खतरा अभी कम नहीं हुआ है। जिला में अभी भी राेजाना 15 से 20 लाेग पाॅजिटिव आ रहे हैं। अभी एक दिन पहले ही नर्सिंग कालेज की तीन छात्राएं भी पाॅजिटिव आई है। इसलिए सरकार ने तीन-तीन दिन स्कूल खाेलने का निर्णय लिया है। इसमें बच्चाें काे पूरे प्राेटाेकाॅल के तहत स्कूल में बुलाया जा रहा है।

अभी भी पैरेंट्स को ट्रांस्पाेर्टेशन की चिंताः हालांकि पैरेंट्स काे अब काेराेना संक्रमण का डर कम इसलिए हाे गया है कि बच्चाें काे सरकार की शर्ताें के तहत स्कूल बुलाया गया है। मगर ट्रांसपाेर्टेशन की चिंता अभी भी पैरेंट्स काे सता रही है। स्कूल की ओर से पहले बच्चाें का इंतजाम खुद किया जाता था। शहर की अलग-अलग लाेकेशन से करीब आठ बसें लगाई जाती थी। इससे बच्चाें और परिजनाें काे सुविधा रहती थी। मगर इस बार स्कूल ने परिजनाें काे ही बच्चाें काे स्कूल छाेड़ने का जिम्मा दिया है। ऐसे में अब पैरेंट्स यदि खुद अपनी गाड़ी में बच्चाें काे स्कूल छाेड़ने आएंगे ताे शहर में जाम भी लगेगा, यदि बसाें में भेजेंगे ताे बच्चाें के लिए काेराेना संक्रमण का खतरा भी बना रहेगा।

2 दिनाें के कैसे खरीद लेंगे ड्रेसः यही नहीं स्कूल प्रबंधन ने एक ओर फरमान बच्चाें के लिए जारी किए हैं। बच्चाें काे अब स्कूल के लिए ड्रेस में आना पड़ेगा। प्रबंधन के इस मैसेज काे देखकर हर काेई पैरेंट्स परेशानी में आ गया क्याेंकि बीते डेढ़ साल से स्कूल ताे लग नहीं रहे हैं। ऐसे में अधिकांश पैरेंट्स ऐसे हैं, जिन्हाेंने ना ताे बच्चाें के लिए ड्रेस खरीद रखी है और पुरानी ड्रेस भी बच्चाें की छाेटी हाे चुकी है। ऐसे में अब दाे दिनाें में ड्रेस कैसे सिलवाएंगे। मगर स्कूल प्रबंधन का फरमान है कि बच्चे बिना ड्रेस के स्कूल नहीं आएंगे।

पैरेंट्स स्कूल प्रबंधन से मिलेः मामले काे लेकर साेमवार काे पीटीए की कार्यकारिणी स्कूल प्रबंधन से मिली। इस दाैरान करीब चार घंटे तक बैठक हुई। इसमें हालांकि स्कूल ने पैरेंट्स की एग्जाम काे टालने की शर्त और बच्चाें काे सरकार की शर्ताें के तहत स्कूल बुलाने की बात मान ली। मगर अभी भी पैरेंट्स के लिए ट्रांसपाेर्टेशन की चिंता है। वहीं अब एग्जाम के लिए स्कूल प्रबंधन पैरेंट्स काे खुद मैसेज डालकर नई डेट बताएगा। पैरेंट्स की शर्ताें के तहत ही एग्जाम का शेड्यूल स्कूल तय करेगा।

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