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सेब के गिरते दामों को लेकर एकजुट हुए किसान:संयुक्त किसान मोर्चा के तहत कई पार्टियों के नेता एक मंच पर आए, चेतावनी- तैयार रहे सरकार, सड़कों पर उतरेंगे हम

शिमला5 महीने पहले
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हिमाचल में एक मंच पर आसीन हुए किसान नेता। - Dainik Bhaskar
हिमाचल में एक मंच पर आसीन हुए किसान नेता।

हिमाचल प्रदेश की मंडियों में सेब के गिरते दामों और प्रदेश में उगने वाली फसलों को एमएसपी में शामिल करने को लेकर किसान संगठन एकजुट हो गए हैं। शिमला के कालीबाड़ी हॉल में किसानों और बागवानों से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के तहत किसान संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें प्रगतिशील बागवानों समेत किसान सभा से जुड़े नेताओं, कांग्रेस, भाजपा और सीपीआईएम के नेताओं ने एक मंच पर हाजिरी लगाई।

किसान सभा के राज्य अध्यक्ष और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि केंद्र सरकार, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य 23 फसलों पर देती है, उसमें हिमाचल में उगने वाले मुख्य फल और सब्जियां शामिल नहीं है। ऐसे में प्रदेश में अदरक, टमाटर, लहसुन, गोभी आदि की फसलें लगाकर किसान तबाह हुए हैं। क्योंकि उनको उनकी फसलों का उचित दाम बाज़ारों में नहीं मिल पाया और लागत मूल्य की वसूली भी नहीं हो पाई।

ऐसे में अब जब सेब सीजन चरम पर है और एकाएक मंडियों में सेब के दाम गिरना ये बताता है की सरकार का सेब ख़रीदने वाली कम्पनियों, आढ़तियों, लदानियों पर कोई नियंत्रण नहीं है। वे अपनी मनमर्जी से दाम घटाते और बढ़ाते हैं। ऐसे में बागवान परेशान हैं और सरकार मूकदर्शक बनकर देख रही है।

बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे किसान नेता।
बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे किसान नेता।

मांगे नहीं सुनी तो 90 के दशक जैसा होगा आंदोलन
किसान नेताओं ने कहा है कि अगर बागवानों और किसानों की मांगों को नहीं सुना गया तो सरकार 90 के दशक जैसे आंदोलन के लिए तैयार रहे। वहीं कुलदीप तंवर ने राकेश टिकैत के हिमाचल दौरे पर कहा कि वह किसानों के सम्मानित नेता हैं। वह किसानों और बागवानों से जुड़े मुद्दों को उठाने हिमाचल आए थे, लेकिन उनके साथ जो व्यवहार किया गया, वह निंदनीय है। यह सब प्रायोजित था, जिसकी वह निंदा करते हैं।

बागवानी मंत्री चुपी साधे बैठे हुए
कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वह विधायक होने के साथ-साथ एक बागवान भी है और बागवानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना उनका पहला कर्तव्य है। ऐसे में बागवानों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर वह इस संयुक्त किसान मंच की बैठक में शामिल हुए हैं। सेब के गिरते दामों पर सरकार पल्ला झाड़ रही है और बाग़वानी मंत्री चुप्पी साधे बैठे हैं। ऐसे में सरकार को इसका ख़ामियाजा आने वाले उपचुनाव में भुगतना पड़ेगा।

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