रैंडम सैंपलिंग:बच्चों में काेराेना के खिलाफ एंटीबाॅडी बनी है कि नहीं, सर्वे हुआ शुरू; 130 बच्चाें के लिए सैंपल

शिमला3 महीने पहले
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जांच के लिए किट्स पहुंची आईजीएमसी, अलग-अलग बीमारियाें से ग्रसित बच्चाें के होंगे सैंपल - Dainik Bhaskar
जांच के लिए किट्स पहुंची आईजीएमसी, अलग-अलग बीमारियाें से ग्रसित बच्चाें के होंगे सैंपल
  • एक हजार बच्चाें के लिए जाएंगे

काेराेना की तीसरी लहर से पहले आईजीएमसी का पेडियाट्रिक विभाग उनकी एंटीबाॅडी पर सर्वे शुरू कर दिया है। इसके लिए आईजीएमसी में स्पेशल किट्स पहुंच गई थी। इन किट्स में जहां बच्चाें के सैंपल लेने के लिए विशेष इक्युपमेंट हैं, वहीं सर्वे में जाे-जाे फॉर्म भरे जाएंगे वह भी इसी में है।

किट्स के पहुंचने के बाद विभाग ने सर्वे शुरू कर दिया है। अब तक 130 बच्चाें के एंटीबाॅडी सैंपल लिए जा चुके हैं। राेजाना आठ से 10 अलग-अलग बच्चाें के सैंपल लिए जा रहे हैं। अलग-अलग बीमारियाें से ग्रसित बच्चाें की रैंडम सैंपलिंग की जा रही है। उसके बाद यह सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे जाएंगे।

कुछ सैंपल की जांच आईजीएमसी में हाेगी, जबकि कुछ सैंपल दिल्ली लैब में जांच के लिए भेजे जाएंगे, उसके बाद यह पता चलेगा कि कितने बच्चाें की एंटीबाॅडी तैयार की गई है। दिल्ली एम्स की तर्ज पर यह सर्वे आईजीएमसी का पेडियाट्रिक विभाग करेगा, ताकि तीसरी लहर से पहले बच्चाें के बारे में पूरा पता चल सके। राेजाना की सैंपलिंग के साथ-साथ बच्चाें पर भी विभाग के डाॅक्टराें ने लगातार निगरानी बनाई है ताकि बच्चाें का पता चलता रहे कि वह कितनी जल्दी बीमारी से रिकवर हाे रहे हैं।

18 साल तक के बच्चाें का हाेगा सर्वे

विशेषज्ञाें के अनुसार तीसरी लहर बच्चाें काे सबसे ज्यादा संक्रमित कर सकती है। ऐसे में अब आईजीएमसी प्रदेश भर के 18 साल तक आयु वर्ग के बच्चों पर यह सर्वे किया जा रहा है। अभी तक 130 बच्चाें के सैंपल लिए गए हैं। 1000 बच्चाें के इसमें अलग-अलग सैंपल लिए जाएंगे।

करीब दो महीने में सर्वे काे पूरा करने का टारगेट है। इसमें आईजीएमसी में आने वाले बच्चाें की रेंडम सैंपलिंग की जा रही है और जिनका किसी वजह से वजन कम है, कोविड हुआ है या अन्य किसी बीमारी का उपचार किया जाना है, तो ऐसे बच्चों के कोविड एंटीबॉडी टेस्ट अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे हैं। बाद में सैंपलिंग के आधार पर बच्चाें के बारे में पूरा पता चल जाएगा कि उनके शरीर में एंटीबाॅडी बनी है या नहीं।

यह हाेगा फायदा

बच्चाें में एंटीबाॅडी सर्वे का सबसे बड़ा यह फायदा हाेगा कि सरकार और विभाग के पास यह आंकड़ा भी हाेगा कि कितने फीसदी बच्चाें में एंटीबाॅडी बनी है। इसके अलावा कितने फीसदी बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें काेराेना की पहली या दूसरी लहर छू कर गई है। इसी के आधार पर यह सर्वे किया जाएगा।

हालांकि आईजीएमसी में कुछ दिन पहले 18 बच्चे ऐसे एडमिट हुए थे, जिन्हें एमआईपीएस बीमारी पाई गई थी, यह ऐसे बच्चे थे, जिन्हें काेराेना हुआ था मगर उनका टेस्ट नहीं किया गया। उनके शरीर में एंटीबाॅडी बन चुकी थी। इस बीमारी काे देखने के बाद अब प्रशासन पहले से ज्यादा सतर्क हाे गया है। ऐसे में अब विभाग काे बच्चाें पर सर्वे करने का जिम्मा साैंपा गया है।

राेजाना पहुंच रहे 60 से ज्यादा बच्चे इलाज के लिए

आईजीएमसी में ओपीडी में रोजाना औसतन 60 से 70 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं 8 से 10 बच्चे वार्डों में दाखिल किए जाते हैं। ऐसे में इनमें से ही चयनित बच्चों पर यह सर्वे किया जा रहा है। हालांकि सर्वे से पहले प्रबंधन इसकी मंजूरी इनके अभिभावकों से भी ले रहा है।

इससे पहले एम्स में इस तरह का सर्वे किया गया है। एम्स ने चार अलग-अलग शहरों के 700 बच्चों पर यह सर्वे किया था, जिसमें 56 से 60 फीसदी बच्चों में एंटीबॉडी पाई गई थी। इसमें कई बच्चे ऐसे थे, जिन्हें काेराेना हुआ था, मगर वह स्वस्थ हाे चुके थे, जबकि उनकी टेस्टिंग नहीं हाे पाई थी।

आईजीएमसी में पेडियाट्रिक विभाग द्वारा एंटीबाॅडी टेस्टिंग के लिए बच्चाें की सैंपलिंग की जा रही है। अब तक 130 बच्चाें के सैंपल लिए जा चुके हैं। इसकी टेस्टिंग के लिए स्पेशल किट्स मंगवाई गई थी, जाे दाे सप्ताह पहले पहुंच चुकी थी। सैंपल की टेस्टिंग के बाद यह पता चलेगा कि कितने फीसदी बच्चाें में एंटीबाॅडी बनी है। -डाॅ. राहुल गुप्ता, प्रशासनिक अधिकारी, आईजीएमसी शिमला

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