विरोध प्रदर्शन:कार्टन के दाम बढ़ाने पर भड़के जिला परिषद सदस्य, डीसी ऑफिस के बाहर किया प्रदर्शन

शिमला9 महीने पहले
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शिमला में प्रदर्शन करते कांग्रेस समर्थित जिला परिषद सदस्य। - Dainik Bhaskar
शिमला में प्रदर्शन करते कांग्रेस समर्थित जिला परिषद सदस्य।

शिमला के कांग्रेस समर्थित जिला परिषद सदस्यों ने शुक्रवार को डीसी ऑफिस के बाहर सेब पेटियों के कार्टन का रेट बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन किया। जिला परिषद सदस्यों का आरोप है कि हर साल 40 से 50 फीसदी कार्टन के रेट बढ़ाए जा रहे हैं। इससे बागवानों को अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

सरस्वती नगर जिला परिषद सदस्य कुशलता का कहना है कि इस बार का सेब सीजन बागवानों काे काफी महंगा पड़ने वाला है। इस बार कार्टन के लिए बागवानों काे पिछले साल के मुकाबले 40 से 50% अधिक खर्च करना पड़ेगा। एचपीएमसी प्रबंधन की कार्टन फर्मों के साथ नेगोशिएशन के बाद सेब कार्टन के रेट में काफी अधिक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

उनका कहना है कि पहले ही बागवानों पर माैसम की मार पड़ी है। ओले और अंधड़ से सेब को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में एचपीएमसी ने कार्टन फर्मों काे लाभ पहुंचाने के लिए इसके रेट में काेई नेगोशिएशन नहीं किया है, बल्कि उन्हें लाभ देने के लिए कार्टन के रेट में बढ़ोत्तरी की हैै।

जिला परिषद उपाध्यक्ष सुरेंद्र रेटका का कहना है कि प्रदेश में हर साल ढाई से तीन करोड़ सेब की पेटी का उत्पादन हाेता है। इस साल उम्मीद की जा रही है कि सेब का उत्पादन ठीक होगा। एचपीएमसी ने फर्मों काे तीन करोड़ सेब की पेटी उपलब्ध करवाने की डिमांड दी है ताकि बागवानों काे सेब की पेटियों की कमी न खले।

इस बार ट्रक भाड़ा भी बढ़ सकता है

डीजल महंगा होने के कारण अब ट्रक मालिक सेब की ढुलाई का भाड़ा 15 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी में है। ट्रक यूनियन ने हाल ही में जिला प्रशासन से कहा था कि वह ट्रकों का किराया निर्धारित करें। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से सभी संबंधित एसडीएम और बीडीओ को निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द ट्रक यूनियन और पिकअप यूनियन से इस संबंध में बैठक करें। ऐसे में जल्द ही किराया भी तय हो जाएगा।

बागवानों की मांग, कार्टन पर जीएसटी 18 फीसदी से घटाकर 2% किया जाए

प्रदेश के बागवानों ने कार्टन की आसमान छूती कीमतें नियंत्रित करने के लिए गत्ते पर लगने वाले जीएसटी की दर 18 से घटाकर 2 फीसदी करने का आग्रह किया है। सेब सीजन की तैयारियों को लेकर बागवानी सचिव अमिताभ अवस्थी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में प्लम ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक सिंघा ने यह मामला जीएसटी काउंसिल की बैठक में उठाने का आग्रह किया। इस पर बागवानी सचिव ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।

ईरान से सेब आयात बंद करने की मांग

बागवानों ने ईरान से आयात किए जा रहे सेब पर प्रतिबंध लगाने का मुद्दा भी उठाया, क्योंकि आयातित सेब के कारण राज्य के बागवानों का बीते साल का सेब अभी भी कोल्ड स्टोर में पड़ा हुआ है। इससे बागवानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
सेब स्टोर करने के रेट कम करें एचपीएमसी

​​​​​​​ बागवानों ने एचपीएमसी के कोल्ड-स्टोर (CA) के रेट कम करने की मांग की है। दीपक सिंघा ने बताया कि एचपीएमसी अभी प्रति किलो के पीछे हर महीने 2 रुपए लेता है जबकि निजी स्टोर मालिक सेब रखने के 1.20 रुपए से लेकर 1.50 रुपए लेते हैं।
एचपीएमसी जल्दी तय करे कार्टन के रेट

बागवानों ने बैठक में मांग की कि सरकारी उपक्रम एचपीएमसी जल्द कार्टन और पैकेजिंग सामग्री के दाम तय करें, क्योंकि इनके रेट से बाजार में कार्टन के दाम नियंत्रित होते है। इस पर बागवानी सचिव ने एचपीएमसी को जल्द रेट तय करने के निर्देश दिए। बागवानी सचिव ने पीडब्ल्यूडी को सेब सीजन के दौरान सड़कें दुरुस्त करने, सड़कों पर गड्‌ढे भरने, विद्युत बोर्ड को हर वक्त बिजली बहाल रखने ताकि ग्रेडिंग पैकिंग मशीने सेब भरने का काम हर वक्त सके।

प्लास्टिक क्रेट के विकल्प पर भी चर्चा

इस दौरान सेब की पैकिंग के लिए प्लास्टिक क्रेट के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा की गई, लेकिन यह प्रस्ताव सिरे नहीं चढ़ पाया क्योंकि बीते साल भी यह प्रयोग किया जा चुका है। हैवी वेट क्रेट में सेब की पैकिंग महंगा काम है, जबकि सिंगल यूज प्लास्टिक क्रेट पर्यावरण को नुकसान करेगी।

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