रामपुर में 40 प्रतिशत बढ़े ड्राई फ्रुटस के रेट:अंतरराष्ट्रीय लवी मेले में किन्नौर का मुख्य उत्पाद किन्नौरी पट्टी भी मंहगी

रामपुर3 महीने पहले
रामपुर लवी मेले में लगी किन्नौरी मार्केट, जहां पर दाम आसामान छु रहे है।

हिमाचल के अंतरराष्ट्रीय लवी मेले की पहचान ड्राई फ्रूट्स के रेट इस बार 40 प्रतिशत बढ़े है। मेले में चिलगोजे से लेकर हर ड्राई फ्रुट का रेट आसमान छु रहा है। किन्नौरी मार्केट में लोगों की भारी भीड़ तो जुट रही है, लेकिन ड्राई फ्रूट्स व अन्य पहाड़ी चीजों के रेट सुनकर खरीदारों के पसीने छुट गए। इसे मंहगाई की मार कहे या फिर फसल की कम पैदावार, दोनों ही सूरतों में मेले में सजी चीजों को खरीदना इस बार आम आदमी के बजट से पूरी तरह से बाहर हो गया है। इस बार किन्नौर में चिलगोजे की फसल बेहतर न होना इसका कारण बताया जा रहा है। ये ही कारण है कि इस बार चिलगोजे के दाम में गत वर्ष की बजाय इस वर्ष अधिक बढ़ौतरी हुई है।

किन्नौरी मार्केट।
किन्नौरी मार्केट।

कागजी बादाम में इस बार 40 प्रतिशत तक का उछाल
इस बार चिलगाजा 1800 से लेकर 2000 रूपए प्रति किलो बिक रहा है। वहीं कागजी बादाम में इस बार 40 प्रतिशत तक का उछाल आया हुआ है। साथ ही किन्नौरी राजमाह, सुखी खुरमानी भी मंहगी है। इसके अलावा अखरोट में भी 40 फीसदी उछाल आया हुआ है। ग्रामीणों की ये सोच कि लवी मेले में ड्राई फ्रूट्स व पहाड़ी चीजों के दाम बाजार मूल्य से कम होगें, पूरी तरह से गलत साबित हुई है। खासकर इस मेले में जो किन्नौरी मार्केट बिना किराया दिए यहां पर लगती है। वे भी बाजार से नीचे भाव पर अपना सामान बेचने को तैयार नही है। ऐसे में लोगों के पास इस चीजो को दूर से देखने के सिवाय और कोई चारा नही है।

खुरमानी के रेट 450 रूपए प्रति किलो​​​​​​​
खुरमानी के रेट भी इस बार बढ़े हुए है। जहां गत वर्ष खुरमानी के रेट जहां 250 है वहीं इस बार खुरमानी के रेट 450 रूपए प्रति किलो है। किन्नौरी मार्केट में घूम रहे यशवंत शर्मा, अशोक कुमार, हिरा लाल, प्रदीप कुमार, मोहर सिंह, राम लाल, हिमेश कुमार सहित अन्य लोगों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि यहां पर लगने वाली दुकानों का रेट बाजार से कम तय करे, ताकि लोग यहां पर खरीद फ़रोख़्त करे।

किन्नौरी पट्टी के भी बढ़े दाम
इस बार मंहगाई की मार केवल ड्राई फ्रुटस तक ही सीमित नही है बल्कि किन्नौरी पट्टी के दाम में भी इजाफा हुआ है। जहां गत वर्ष किन्नौरी पट्टी की कीमत 1500 से 2000 रूपए तक थी वहीं इस बार पट्टी की शुरूआती रैंज 2000 रूपए है। वहीं अंगूरा की पट्टी 3000 से शुरू है। विक्रेताओं का कहना है कि जब हर चीज मंहगी हो गई है तो निश्चित तौर से किन्नौर का मुख्य उत्पाद किन्नौरी पट्टी भी मंहगी हो गई है।