तीरंदाजी से बुरी शक्तियों पर प्रहार:हिमाचल की रोपा वैली में धनुष-तीर से जीत की धुन में लोग; देवी के लौटने पर होगी शानदार दावत, नृत्य

रिकांगपिओ7 महीने पहले
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हिमाचल के किन्नौर जिले के रोपा वैली में देवी के स्वर्ग प्रवास पर जाने के बाद अब स्थानीय लोग धनुष और तीर लेकर बुरी शक्तियों पर प्रहार काे उतर आए हैं। वैली के हर गांव में इन दिनों तीरंदाजी प्रतियोगिताएं हो रही हैं। देवी के स्वर्ग के लौटने के बाद दावत एवं लोक नृत्य का आयोजन होगा। देवी के अनुपस्थिति में लोग खुद को बुरी शक्तियों के लड़ने के काबिल बनाते हैं।

हिमाचल में तीरंदाजी की परंपरा सदियों पुरानी हैं। इस खेल को तब खेला जाता है, जब स्थानीय देवी- देवता स्वर्ग प्रवास पर जाते हैं। अब मकर संक्रांति से ही देवी देवता स्वर्ग प्रवास पर जा चुके हैं। ऐसे में घाटी में तीरंदाज़ी प्रतियोगिताओं की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि वैली के हर गांव में अपने स्तर पर मान्यता के अनुसार तीरंदाजी खेला जाता है।

रोपा वैली के रुशकलंग गांव में चल रही तीरंदाजी प्रतियोगिता।
रोपा वैली के रुशकलंग गांव में चल रही तीरंदाजी प्रतियोगिता।

रुशकलंग में तीरंदाजी शुरू

जिला के रुशकलंग गांव में इन दिनों तीरंदाजी खेल चल रहा है। स्थानीय देवी टुंगमा जी ( दोर्जे छेनमो जी ) स्वर्ग प्रवास पर है। देवी के आशीर्वाद से ही यह खेल खेला जाता है। रुशकलंग गांव के अमीर नेगी, सुंदर सिंह छोरज्ञा, टीसी छोरज्ञा, नंद किशोर नेगी, कर्मा बोरिस, तंज़ीन नेगी, निर्मल लामा, छोटू नेगी, विनोद कुमार नेगी, चन्द्र प्रकाश नेगी आदि ने कहा कि तीरंदाजी खेल के लिए चार टीमें बनाई जाती है। टीम का एक एक कप्तान होता है, जिस के दिशा निर्देश का पालन करना अनिवार्य है।

बुरी शक्तियों पर प्रहार

देवी जी के स्वर्ग प्रवास के साथ ही तीरंदाजी शुरू होती है। उनके स्वर्ग वापसी के साथ ही इस खेल का समापन होता है। मान्यता है कि स्थानीय देवी जी के स्वर्ग प्रवास पर जाते ही उनकी अनुपस्थिति के दौरान बुरी शक्तियों के प्रकोप को नष्ट करने के उद्देश्य से गांव में तीरंदाजी खेल का आयोजन होता है।

तीरंदाजी में जौहर दिखाते रोपा वैली निवासी।
तीरंदाजी में जौहर दिखाते रोपा वैली निवासी।

देवताओं के पासों से लाभ का निर्णय

जीत- हार फैसले के बाद देवी के स्वर्ग वापसी के बाद दावत एवं लोक नृत्य का आयोजन होता है। इसमें स्थानीय लोग खूब आनंद लेते हुए होता है। ऐसी मान्यता है कि स्वर्ग प्रवास पर सभी देवी देवता इकट्ठा होकर आपस मे पासा खेलते हैं। उस पासा खेल में कृषि, व्यापार, फसल प्राकृतिक आपदा, सामाजिक एवं जनहित सहित वार्षिक शुभ एवं अशुभ फल का निर्णय पासा खेल में हार या जीत के आधार पर होता है। जीत और हार का फलादेश स्वर्ग लोक से पृथ्वी लोक के वापसी पर देवी देवता के माली-गुर ही जनता को बताते हैं।

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