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शिमला संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस की साख दांव पर:हॉली लॉज-वीरभद्र सिंह का गढ़, भेदने की फिराक में BJP, 2017 में था बराबरी का मुकाबला

पवन ठाकुर/सोलन3 महीने पहले

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे शिमला संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस की साख तय करेंगे। यह संसदीय क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। खासकर, पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह का इस क्षेत्र में दबदबा रहा है। इस बार उनके बिना कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव लड़ा। इसलिए सबकी नजर है कि इस बार शिमला संसदीय क्षेत्र में 'हॉली लॉज' का प्रभाव कितना रहा।

1985 के बाद पहला चुनाव वीरभद्र सिंह के बिना
दूसरी ओर भाजपा के लिए डबल इंजन सरकार के सहारे कांग्रेस के इस गढ़ को भेदने की चुनौती है। 1985 के बाद प्रदेश का यह पहला विधानसभा चुनाव है, जब कांग्रेस के पास वीरभद्र सिंह जैसा नेता नहीं है। इसके बावजूद हॉली लॉज के दबदबे को कम नहीं आंका जा सकता। यह वीरभद्र सिंह के प्रति लोगों की सहानुभूति ही थी कि 2021 में विपरीत परिस्थितियों के बाद भी उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह लोकसभा उप चुनाव जीत गईं।

वहीं मंडी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह जिला है और जिले की सभी 10 सीटें भाजपा के पास थीं। प्रतिभा सिंह इस समय कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष हैं तो शिमला संसदीय क्षेत्र में पार्टी के प्रदर्शन को हॉली लॉज की साख से भी जोड़कर देखा जाएगा। अभी तक हिमाचल की राजनीति में वीरभद्र सिंह के कारण इस क्षेत्र का वर्चस्व रहा है। इस वर्चस्व को कौन आगे बढ़ाएगा, इसका फैसला भी विधानसभा चुनाव के नतीजे तय करने वाले हैं।

संसदीय क्षेत्र में 17 सीटें
शिमला संसदीय क्षेत्र में कुल 17 विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें शिमला जिले की 7, सोलन और सिरमौर जिला की 5-5 सीटें शामिल हैं। शिमला जिले की रामपुर सीट मंडी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है।

2017 में कांग्रेस-भाजपा में बराबरी का मुकाबला
हिमाचल विधानसभा चुनाव 2017 में इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा में मुकाबला बराबरी का रहा। दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने 8-8 सीटें जीतीं। शिमला जिला की रोहड़ू, कुसुम्पटी, शिमला ग्रामीण, सोलन जिला की अर्की, नालागढ़, सोलन सदर, सिरमौर जिला की श्री रेणुका जी और शिलाई सीट पर कांग्रेस जीती।

भाजपा ने शिमला की जुब्बल-कोटखाई, चौपाल, शिमला शहरी, सोलन जिला की दून, कसौली, सिरमौर जिला की पच्छाद, नाहन व पांवटा साहिब की सीट पर जीत दर्ज की थी। ठियोग की सीट माकपा के राकेश सिंघा ने जीती। कांग्रेस के गढ़ में बराबरी करने से ही भाजपा सत्ता पर काबिज होने में कामयाब रही।

भाजपा ने चिन्हित की बार-बार हारने वाली सीटें
भाजपा इस चुनाव में डबल इंजन सरकार से मिलने वाले लाभ के सहारे रही। इसके सहारे पार्टी हिमाचल का रिवाज बदलने की बात करती रही। भाजपा के पास मजबूत संगठनात्मक ढांचा है। पार्टी ने शिमला संसदीय क्षेत्र की ऐसी सीटें चिन्हित की थी, जहां पार्टी लगातार हार रही है। इनमें रोहड़ू, ठियोग, कुसुम्पटी, शिमला ग्रामीण, सोलन जैसी सीटें हैं। इन सीटों पर ज्यादा फोकस किया गया। अब इसमें भाजपा कितनी कामयाब हुई, इसी पर पार्टी का प्रदर्शन भी निर्भर करेगा।