​​​​​​​बाल सुधार गृह में अव्यवस्था:बाल बंदी बोले-तीन दिन से खिलाई जा रही करेला व लौकी की सब्जी

चाईबासा2 महीने पहले
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चाईबासा स्थित बाल संप्रेषण गृह में रविवार को बाल बंदियों ने जमकर उत्पात मचाया। बाल बंदी संप्रेषण गृह के मुख्य द्वार (लोहे का बड़ा गेट) जोर-जोर से पीटने लगे। बाल बंदियों के आक्रोश को देख संप्रेषण गृह के बाहर सुरक्षा में तैनात जवान घबड़ा गए। तत्काल पुलिस पदाधिकारी को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही महिला व पुलिसकर्मियों की एक टीम संप्रेषण गृह भेजी गई। मुफस्सिल थाना प्रभारी पवन चंद्र पाठक भी अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे। पुलिस को देख बाल बंदी गेट से हट गए।

थाना प्रभारी ने गेट से संप्रेषण गृह के भीतर प्रवेश कर बाल बंदियों को पहले शांत कराया। इसके बाद उनकी समस्याओं को सुना। मौके पर गृहपति पिंकी कुमारी, परविक्षा पदाधिकारी रूपा ठाकुर व अन्य लोगों को भी बुलाया गया। इस दौरान बाल बंदियों की ओर से जो भी शिकायतें मिली, उन्हें दूर करने का भरोसा दिलाया गया। तब जाकर मामला शांत हुआ। इस दौरान सुबह करीब 10.30 बजे से लेकर करीब डेढ़ बजे तक संप्रेषण गृह में तनाव बना रहा। सूत्रों के अनुसार बाल संप्रेषण गृह में वर्तमान में करीब 80 बाल बंदी हैं। जबकि संप्रेषण गृह की क्षमता 55 बाल बंदी की है।

क्षमता से अधिक लोग रहने के कारण बाल बंदियों को कई तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है। पुलिस के साथ वार्ता के दौरान बाल बंदियों ने अपनी बातों को रखा। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों से हमें करेला, लौकी आदि की सब्जी खाने में दी जा रही है। भोजन का जो मीनू है, उसका अनुपालन यहां नहीं किया जा रहा। हम ये खाना नहीं खाएंगे। हम लोगों को सोने में भी दिक्कत होती है। जगह की कमी होने के कारण एक साथ कई बंदियों को सोना पड़ रहा है। बाल बंदियों के आरोपों को सुनने के बाद सुधार का आश्वासन दिया गया।

वार्डेन ने कहा- बाल बंदियों के उत्पात मचाने की मुझे कोई जानकारी नहीं

बाल संप्रेषण गृह की वार्डन सह इंचार्ज जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अनीशा कुजूर से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने दो टूक कह दिया कि बाल संप्रेषण गृह में बाल बंदियों के उत्पात मचाने की मुझे कोई जानकारी नहीं है। आप लोगों को किसने बता दिया। इसके बाद उन्होंने काल काट दिया। दोबारा काल करने पर कोई उत्तर नहीं मिला।

"हम लोगों के पास यह सूचना आई थी कि बाल संप्रेषण गृह में कुछ बाल बंदी उत्पात मचा रहे हैं। सूचना मिलते ही हम लोग वहां पहुंचे और बाल बंदियों से बातचीत कर समस्या का हल करा दिया गया है। अब कहीं कोई दिक्कत नहीं है।"

-पवन चंद्र पाठक, थाना प्रभारी, मुफस्सिल, चाईबासा।

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