70 फीसदी काम पूरा:10 करोड़ खर्च; 16 साल में भी नहीं बन सका भवन

चाईबासाएक महीने पहलेलेखक: संतोष वर्मा
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राज्य में झामुमो और कांग्रेस की गठबंधन सरकार चल रही है। लेकिन पश्चिमी सिहंभूम जिले के जगन्नाथपुर अनुमंडल में 16 वर्षों से बन रहे राज्य स्तर का आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज भवन आज तक पूर्ण नहीं हो सका है। जबकि इस भवन निर्माण कार्य में 10 करोड़ से अधिक खर्च हो चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के ड्रीम प्रोजेक्ट में से यह एक था। इस योजना को दूरगामी सोच के तहत शुरू किया गया था। इस मेडिकल कॉलेज के खुलने से क्षेत्र में रोजगार के साथ-साथ इलाज की बेहतर सुविधा मिलती। क्योंकि सारंडा जंगल में भरपूर औषधि के पेड़-पौधे हैं। लेकिन इस दौरान कई सरकारें बनीं किसी का इस ओर ध्यान नहीं गया।

समय पर यह योजना पूरी हो जाती तो कोरोना काल में राज्य सरकार और जिला प्रशासन के लिए यह रामबाण साबित होता। इस क्षेत्र से सीएसआर के तहत सर्वाधिक राजस्व मिलता है। डीएमएफटी फंड में राशि जमा होती है। जगन्नाथपुर में बन रहे चाईबासा आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल अपनी स्वीकृति के 16 साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया है।

यह अधूरा भवन अहिल्या की तरह अपने उद्धार की बाट जोह रहा है। दूसरी तरफ अस्पताल भवन बनकर तैयार है, लेकिन वह भी शुरू नहीं हो पा रहा है। आयुर्वेदिक अस्पताल को शुरू करने की योजना भी दो-दो बार फेल हो गई है। सांसद गीता कोड़ा और जगन्नाथपुर के विधायक सोनाराम सिंकू द्वारा तीन वर्ष से इस कॉलेज भवन का निर्माण के लिए प्रयास किया जा रहा है। पश्चिमी सिंहभूम में अब भी 900 करोड़ रुपए डीएमएफटी फंड में राशि है।

2007-08 में मधु कोड़ा के कार्यकाल में मिली थी स्वीकृति

इस भवन के निर्माण को पूरा कराने के लिए जगन्नाथपुर के विधायक सोनाराम सिंकू ने 2021 में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से मिल कर गुहार लगा चुके हैं। राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने 19 दिसंबर 2021 को इस सबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव को पत्र लिख कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था। मंत्री की पहल पर स्वास्थ्य विभाग ने डीएमएफटी फंड से इसका निर्माण पूरा कराने के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन से मंतव्य मांगा था।

इसी तरह सिर्फ कागजी घोड़ा दौड़ रहा है। इसका निर्माण कार्य 2007-08 में मधु कोड़ा के मुख्यमंत्रित्व काल में स्वीकृति मिली थी। समय पर काम नहीं होने के कारण योजना की प्राक्कलित राशि भी बढ़ कर दोगुनी हो चुकी है। अब निर्माण कार्य बंद होने से भवन की स्थिति जर्जर होती जा रही है। मजे की बात यह है कि अधूरे पड़े कार्य को पूरा करने के आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य के पास राशि आ चुकी थी और उपायुक्त द्वारा निरीक्षण भी किया गया था, लेकिन कार्य शुरू नहीं हो सका।

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