सार्वजनिन दुर्गा पूजा समिति:चाईबासा के आमला टोला में 1870 से हो रही दुर्गा पूजा, बलि प्रथा बंद

चाईबासा2 महीने पहलेलेखक: संतोष वर्मा
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चाईबासा के आमला टोला स्थित आदि दुर्गोत्सव आमला टोला सार्वजनिन दुर्गा पूजा समिति 150 वर्ष से भी अधिक पुरानी दुर्गापूजा समिति है। प. सिंहभूम जिला में सबसे पहले दुर्गा पूजा उत्सव आमला टोला, चाईबासा स्थित घोष परिवार द्वारा 1870 में शुरू किया गया था। दो वर्षों बाद राय बहादुर रत्नेश्वर राय तथा सरकार परिवार इस पूजा समिति में शामिल हुए। 1886 में एक समिति बनी, जिसमें अमला टोला के सभी भाषा-भाषी परिवार के लोग इस समिति के सदस्य बने।

उन परिवारों की वंश परम्परा आज भी इस पूजा समिति में दिखाई दे रही है। पहले टीन के शेड में शुरू हुई, यह पूजा आज एक बड़ा भव्य रूप ले चुकी है। कभी मात्र तीन सौ रुपए यहां पूजा पर खर्च होता था, आज बजट पांच लाख से अधिक है। यहां पारंपरिक रीति-रिवाजों से पूजा होती है। यहां की दुर्गा पूजा से शहर के लोगों की आस्था जुड़ी हुई है।

पहले इस पूजा समिति में बलि की प्रथा भी थी। पर 1886 में इस समिति में मांगी लाल रूंगटा तथा मिश्री लाल जैन सहित अन्य प्रतिष्ठित परिवार शामिल हुए तो सर्वसम्मति से बलि प्रथा को बंद कर दिया गया। इस पूजा के लिए मां दुर्गा की मूर्ति का निर्माण शुरुआती दौर में शहर के कुम्हार टोली निवासी प्रजापति परिवार के सदस्य ने किया था।

आज भी उनके वंशज ही यहां के मूर्ति का निर्माण करते हैं। खासियत यह है कि मां के चेहरे तथा अन्य देवी देवताओं का जो रूप उस समय दिया गया था, वह आज भी कायम है। सभी देवी देवताओं को एक फ्रेम में रखा जाता है। इस पूजा समिति का अध्यक्ष शुरू से रूंगटा परिवार ही है। वर्तमान में प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी मुकुंद रूंगटा इस पूजा समिति के अध्यक्ष हैं। जबकि सचिव तपन कुमार मित्रा है। वहीं झारखण्ड राज्य के मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर, प. सिंहभूम जिला बीस सूत्री सदस्य कांग्रेस नेता त्रिशानु राय भी विगत कई वर्षों से इस पूजा समिति से जुड़े हुए हैं।

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